खबर इंडिया की। दो लड़कियां कैब से घर जा रही थी, उसमें से एक कहती हैं.. कि मुझे SuSu आ रही हैं यार। फिर वीडियो बनाने वाली दूसरी लड़की कहती हैं कि मुझे Potty आ रही हैं यार, अंकल जल्दी घर पहुंचा दो। ड्राइवर : Saaf Waaf करके निकला करो ना। ये बात हर इंसान अपने जीवन में करता हैं, क्योंकि ये चीजें नैचुरल हैं! लेकिन इसका वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डालना और खुद को इन्फ्लूएंसर कहना, बिल्कुल भी सही नहीं हैं
खबर इंडिया की। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने एक बार फिर कंटेंट क्रिएशन की सीमाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में दो लड़कियां कैब से घर जाती नजर आती हैं। बातचीत के दौरान एक लड़की कहती है कि उसे “SuSu आ रही है”, जबकि दूसरी लड़की मजाकिया अंदाज़ में ड्राइवर से कहती है— “मुझे Potty आ रही है अंकल, जल्दी घर पहुंचा दो।”
इस बातचीत पर ड्राइवर भी प्रतिक्रिया देता है और कहता है— “साफ-वाफ करके निकला करो ना।” वीडियो में दिख रही यह पूरी बातचीत रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूर है, क्योंकि हर इंसान अपने जीवन में कभी न कभी ऐसी स्थिति से गुजरता है। यह एक पूरी तरह से नैचुरल प्रक्रिया है, जिस पर शर्म या झिझक नहीं होनी चाहिए।
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ऐसी निजी और शारीरिक जरूरतों से जुड़ी बातें कैमरे में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डालना सही है? क्या सिर्फ व्यूज और लाइक्स के लिए हर बातचीत को कंटेंट बना देना ही इन्फ्लुएंसर होने की पहचान है?
सोशल मीडिया यूजर्स का एक बड़ा वर्ग इस वीडियो को गैर-जिम्मेदाराना बता रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह के वीडियो न सिर्फ ड्राइवर जैसे कामकाजी लोगों को असहज स्थिति में डालते हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं। कई यूजर्स ने कमेंट में लिखा कि कंटेंट क्रिएशन के नाम पर मर्यादा और संवेदनशीलता की सीमाएं लांघी जा रही हैं।
डिजिटल दौर में अभिव्यक्ति की आज़ादी जरूरी है, लेकिन इसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। हर नैचुरल बात को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर मज़ाक बनाना न तो समझदारी है और न ही सही उदाहरण। इन्फ्लुएंसर कहलाने से पहले यह सोचना जरूरी है कि आपका कंटेंट किसे और किस तरह प्रभावित कर रहा है।















