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ऊर्जा संकट के बीच UAE, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जाएंगे पीएम मोदी, इस वजह से जरूरी है ये दौरा, MEA ने बताया साफ-साफ

उमाकांत त्रिपाठी।वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन 5 देशों की यात्रा का उद्देश्‍य भारत को अपनी साझेदारियों को ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा और नई तकनीक जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत करना है।विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि यह दौरा भारत की वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों को और मजबूत करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी।

 

MEA सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। वे वहां के सम्राट विलेम-अलेक्जेंडर और महारानी मैक्सिमा से भी मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री के भारतीय समुदाय को संबोधित करने और नीदरलैंड के शीर्ष कारोबारी नेताओं से मिलने की भी उम्मीद है।जॉर्ज ने कहा, ’17 मई को स्वीडन में, प्रधानमंत्री मोदी गोथेनबर्ग की आधिकारिक यात्रा करेंगे। 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए अपनी ऐतिहासिक यात्रा के बाद, स्वीडन की यह प्रधानमंत्री मोदी की दूसरी यात्रा होगी।’

UAE से होगी यात्रा की शुरुआत, ऊर्जा सहयोग पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी 15 मई को अपनी यात्रा की शुरुआत UAE से करेंगे, जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। बैठक में भारत-UAE संबंधों, ऊर्जा सहयोग और पश्चिम एशिया से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और UAE के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और वहां 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच UAE भारत का भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बना हुआ है।

 

नीदरलैंड्स और नॉर्डिक देशों में व्यापार-निवेश पर जोर
15 से 17 मई तक प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड्स में रहेंगे। 2017 के बाद यह उनकी दूसरी यात्रा होगी और इसे दोनों देशों के संबंधों के लिए अहम माना जा रहा है। इसी दौरान तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन भी आयोजित होगा, जिसमें स्वीडन, नॉर्वे समेत अन्य नॉर्डिक देशों के साथ व्यापार, निवेश, हरित तकनीक और नवाचार को लेकर व्यापक चर्चा होगी।

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