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PM मोदी ने छोटा किया अपना काफिला, देश के टॉप नेताओं ने भी किया आत्मसात, ये दिग्गज हुए प्रधानमंत्री की मुहिम में शामिल

उमाकांत त्रिपाठी।PM Modi’s 2-Car Convoy: सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वे दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा के भारी-भरकम लाव-लश्कर के बजाय सिर्फ दो गाड़ियों के काफिले में नजर आ रहे हैं। वीवीआईपी (VVIP) कल्चर और प्रोटोकॉल को दरकिनार कर पीएम मोदी ने अपने काफिले को बेहद छोटा कर दिया है। जानिए पीएम मोदी ने आखिर क्यों उठाया है ये कदम?

आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में 12 से 15 गाड़ियां होती हैं, जिनमें बुलेटप्रूफ मर्सिडीज-मेबैक, जैमर वाहन और एम्बुलेंस शामिल रहती हैं। लेकिन हालिया वीडियो में पीएम मोदी को केवल एक रेंज रोवर और एक फॉर्च्यूनर के साथ सफर करते देखा गया।स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) ने पीएम के निर्देश पर काफिले का साइज 50% तक कम कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि काफिला भले ही छोटा हुआ है, लेकिन सुरक्षा के ‘ब्लू बुक’ नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

 

 

पीएम ने क्यों किया काफिला छोटा?
पीएम मोदी का यह कदम उनके द्वारा हाल ही में हैदराबाद और वडोदरा में दी गई स्पीच से जुड़ा है। ईरान संकट की वजह से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों और सप्लाई में बाधा आने की आशंका है। इसके जवाब में पीएम ने नागरिकों से 7 अपील की है। जिनमे पेट्रोल-डीजल बचते हुए सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो का अधिक उपयोग करने, विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए कम से कम एक साल तक सोना खरीदने से बचें और कंपनियों और दफ्तरों को सलाह दी गई है कि जहां संभव हो, घर से काम (WFH) और ऑनलाइन क्लास को बढ़ावा दें।

मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों में भी मची होड़
प्रधानमंत्री मोदी की बचत और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब पूरे देश में दिखने लगा है। पीएम और गृह मंत्री अमित शाह ने अपने काफिले की गाड़ियां आधी कर दी हैं, जिसका पालन अब राज्यों के मुख्यमंत्री भी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा यादव के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी अपने काफिले का आकार आधा कर दिया है। यहां तक कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अब बस और ट्रेन से सफर करने का फैसला किया है, ताकि सरकारी संसाधनों की बचत हो सके।

 

 

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