उमाकांत त्रिपाठी।भारत की सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार अब सिर्फ पारंपरिक सैन्य निगरानी तक सीमित नहीं रहना चाहती. देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर घुसपैठ, नार्को-तस्करी, अवैध निर्माण, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क, हवाला फंडिंग और साइबर अपराध जैसे खतरों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एक व्यापक ‘मिशन बॉर्डर’ रणनीति पर काम शुरू कर दिया है.
इसी अभियान के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राजस्थान के बीकानेर बॉर्डर के बाद अब गुजरात के कच्छ क्षेत्र स्थित हरामी नाला पहुंचे हैं. ये दौरा सिर्फ सीमा चौकियों का निरीक्षण भर नहीं, बल्कि आने वाले समय में केंद्र सरकार की नई सीमा सुरक्षा नीति का संकेत माना जा रहा है. गृह मंत्री का ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब केंद्र सरकार सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा, जनसंख्या परिवर्तन, अवैध कब्जों और घुसपैठ के मुद्दों को राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जोड़कर देख रही है.
हरामी नाला क्यों है इतना संवेदनशील? गुजरात के भुज स्थित हरामी नाला का दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ये इलाका लंबे समय से पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ, समुद्री तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों का संवेदनशील मार्ग माना जाता रहा है. हरामी नाला गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित एक जटिल समुद्री और दलदली इलाका है. ये लगभग 22 किलोमीटर लंबा ज्वारीय चैनल है, जो अरब सागर और सर क्रीक क्षेत्र से जुड़ा हुआ है.
हरामी नाला में अमित शाह का दौरा क्यों अहम? गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों को देखें तो साफ होता है कि ये दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं है. उनके कार्यक्रमों में नई सीमा चौकी का उद्घाटन, कंट्रोल रूम का निरीक्षण, आधुनिक सर्विलांस सिस्टम की समीक्षा, जलयान से हरामी नाला क्षेत्र का दौरा और सीमा सुरक्षा से जुड़े विषयों पर हाई-लेवल बैठक शामिल है. इस दौरान वो सीमा चौकी G-7 का उद्घाटन करेंगे और जवानों से संवाद भी करेंगे.














