हेल्थ डेस्क: Heart Attack Risk आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चिंताओं में से एक है। पहले जहां हार्ट अटैक को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, वहीं अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। हार्ट अटैक का नाम सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहला सवाल आता है कि क्या कोई व्यक्ति एक से अधिक बार हार्ट अटैक झेल सकता है? अगर हां, तो दिल कितनी बार ऐसे झटकों को सहन कर सकता है और किस स्थिति में मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सवालों का कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, दिल की सेहत, उपचार की उपलब्धता और जीवनशैली अलग होती है। हालांकि कुछ महत्वपूर्ण तथ्य ऐसे हैं जिन्हें समझना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है।
हार्ट अटैक आखिर होता क्यों है?
हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में रुकावट आ जाती है। यह रुकावट आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल, फैट और अन्य पदार्थों के जमा होने से बनती है। जब रक्त प्रवाह बाधित होता है तो दिल की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
ऑक्सीजन की कमी के कारण हृदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो दिल का प्रभावित हिस्सा स्थायी रूप से कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हार्ट अटैक अचानक जरूर दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे कई वर्षों से विकसित हो रही समस्याएं जिम्मेदार होती हैं। अस्वस्थ खानपान, धूम्रपान, तनाव, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
एक व्यक्ति कितनी बार हार्ट अटैक झेल सकता है?
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है कि आखिर दिल कितने हार्ट अटैक सह सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसका कोई तय आंकड़ा नहीं है।
कुछ लोग एक बार हार्ट अटैक आने के बाद पूरी तरह स्वस्थ जीवन जीते हैं, जबकि कुछ मरीजों को जीवन में दो या उससे अधिक बार भी हार्ट अटैक हो सकता है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि:
पहला हार्ट अटैक कितना गंभीर था
दिल को कितना नुकसान पहुंचा
उपचार कितनी जल्दी मिला
मरीज ने बाद में अपनी जीवनशैली में बदलाव किए या नहीं
यदि पहले हार्ट अटैक के बाद उचित इलाज और देखभाल मिले तो कई मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकते हैं। लेकिन बार-बार हार्ट अटैक आने से दिल की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और हृदय की पंपिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है।
क्यों बढ़ जाता है दोबारा हार्ट अटैक का खतरा?
पहला हार्ट अटैक अक्सर शरीर की ओर से एक गंभीर चेतावनी माना जाता है। इसके बाद यदि व्यक्ति अपनी आदतों में सुधार नहीं करता, तो दोबारा हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है।
प्रमुख जोखिम कारक
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
मधुमेह (Diabetes)
मोटापा
अत्यधिक तनाव
व्यायाम की कमी
असंतुलित भोजन
विशेषज्ञों का कहना है कि पहला हार्ट अटैक झेल चुके लोगों को नियमित जांच और दवाओं का पालन करना बेहद जरूरी होता है। लापरवाही भविष्य में गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।
हार्ट अटैक के लक्षण जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
हार्ट अटैक के कई संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें लोग सामान्य थकान या गैस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही गलती कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
सामान्य लक्षण
छाती में दर्द या दबाव महसूस होना
बाएं हाथ में दर्द या भारीपन
गर्दन, कंधे या जबड़े में असहजता
सांस लेने में तकलीफ
ठंडा पसीना आना
अचानक कमजोरी महसूस होना
चक्कर आना
बेचैनी और घबराहट
महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह के मरीजों में लक्षण कई बार अलग भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य शारीरिक संकेत को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
कब जान बचाना हो जाता है सबसे मुश्किल?
हार्ट अटैक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय की होती है। डॉक्टर अक्सर कहते हैं कि “गोल्डन ऑवर” यानी शुरुआती समय में मिला उपचार मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
स्थिति तब ज्यादा गंभीर हो जाती है जब:
दिल का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो जाए
मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो
हृदय की धड़कन अनियमित हो जाए
कार्डियक अरेस्ट हो जाए
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक अलग स्थितियां हैं, हालांकि दोनों आपस में जुड़े हो सकते हैं। कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता और CPR जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं।
हर मिनट की देरी मरीज के बचने की संभावना को कम कर सकती है।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें
अच्छी खबर यह है कि अधिकांश मामलों में हार्ट अटैक के जोखिम को कम किया जा सकता है।
दिल को स्वस्थ रखने के उपाय
रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें
हरी सब्जियां और फल अधिक खाएं
जंक फूड और अत्यधिक तैलीय भोजन कम करें
धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें
शराब का सेवन सीमित करें
तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान करें
वजन नियंत्रित रखें
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।














