बठिंडा (पंजाब): Bathinda Tattoo Video Controversy को लेकर पंजाब में नई बहस शुरू हो गई है। बठिंडा के एक टैटू स्टूडियो द्वारा टैटू बनाते समय रिकॉर्ड किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। निहंग मनप्रीत सिंह खालसा ने वीडियो जारी कर टैटू आर्टिस्ट को सार्वजनिक मंचों पर ऐसे वीडियो साझा न करने की चेतावनी दी है।
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उनका कहना है कि शरीर के निजी अंगों पर बनाए जा रहे टैटू के वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से बच्चों और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, टैटू आर्टिस्ट रनबीर सिंह का कहना है कि वे ग्राहकों की सहमति से ही वीडियो रिकॉर्ड और पोस्ट करते हैं तथा यह उनके व्यवसाय के प्रचार का हिस्सा है। Bathinda Tattoo Video Controversy अब सोशल मीडिया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
बठिंडा में संचालित एक टैटू स्टूडियो के इंस्टाग्राम अकाउंट पर महिलाओं के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर टैटू बनाते हुए कुछ वीडियो साझा किए गए। इन वीडियो को लेकर निहंग मनप्रीत सिंह खालसा ने आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक रूप से साझा करना उचित नहीं है।
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उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से टैटू बनवाता है तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन निजी अंगों पर टैटू बनाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर डालना समाज पर गलत असर डाल सकता है।
इस बयान के बाद Bathinda Tattoo Video Controversy सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रखनी शुरू कर दी।
निहंग मनप्रीत सिंह खालसा ने क्या कहा?
मनप्रीत सिंह खालसा ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का अश्लील या आपत्तिजनक कंटेंट साझा नहीं किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि इस तरह के वीडियो बच्चों और किशोरों पर गलत प्रभाव डाल सकते हैं।
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उन्होंने यह भी कहा कि निजी अंगों पर बने टैटू कई बार वैवाहिक जीवन में विवाद का कारण बन सकते हैं। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक आंकड़े या शोध प्रस्तुत नहीं किए।
खालसा ने लोगों से अपील की कि विशेष रूप से शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर टैटू बनवाने और उससे जुड़े वीडियो सार्वजनिक करने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे वीडियो हटाए नहीं गए तो वे संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कर आगे भी कार्रवाई की मांग करेंगे।
पुलिस और प्रशासन से शिकायत का दावा
निहंग मनप्रीत सिंह खालसा ने कहा कि उन्होंने इस मामले में पहले टैटू आर्टिस्ट से सीधे बात करने की कोशिश की थी। उनके अनुसार, बात नहीं बनने पर उन्होंने बठिंडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को भी शिकायत दी।
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उन्होंने दावा किया कि टैटू आर्टिस्ट के परिवार ने आश्वासन दिया था कि भविष्य में इस तरह का कंटेंट पोस्ट नहीं किया जाएगा। हालांकि, उनके अनुसार सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो अभी भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में पंजाब या अन्य शहरों में भी इसी तरह का कंटेंट पोस्ट किया गया तो वे उसके खिलाफ भी आवाज उठाएंगे।
टैटू आर्टिस्ट रनबीर सिंह ने दिया जवाब
Bathinda Tattoo Video Controversy पर टैटू आर्टिस्ट रनबीर सिंह ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे पिछले छह वर्षों से लाइसेंस के साथ पेशेवर तरीके से टैटू बनाने का काम कर रहे हैं और नियमित रूप से सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
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रनबीर सिंह के अनुसार, उनके स्टूडियो में आने वाले ग्राहक अपनी इच्छा से टैटू बनवाते हैं। उन्होंने कहा कि शरीर के जिस हिस्से पर टैटू बनवाना होता है, वह पूरी तरह ग्राहक का निर्णय होता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो रिकॉर्ड करने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले ग्राहकों से स्पष्ट सहमति (Consent) ली जाती है। यदि कोई ग्राहक वीडियो साझा नहीं करना चाहता, तो उसकी इच्छा का सम्मान किया जाता है।
बिजनेस प्रमोशन का हिस्सा बताया
रनबीर सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया आज किसी भी व्यवसाय के प्रचार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार, कई ग्राहक पहले उनके इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वीडियो देखकर ही स्टूडियो तक पहुंचते हैं।
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उन्होंने कहा कि कई महिला ग्राहक चेस्ट, बैक, लेग्स या अन्य हिस्सों पर टैटू बनवाना चाहती हैं और उन्हें पहले यह जानना होता है कि कलाकार का काम कैसा है। ऐसे में सोशल मीडिया पोर्टफोलियो संभावित ग्राहकों के लिए जानकारी का माध्यम बनता है।
उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की अश्लीलता फैलाना नहीं, बल्कि अपने काम को पेशेवर तरीके से प्रस्तुत करना है।
सोशल मीडिया कंटेंट और जिम्मेदारी पर बहस
Bathinda Tattoo Video Controversy ने सोशल मीडिया पर कंटेंट की सीमा और जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। एक पक्ष का मानना है कि यदि कंटेंट ग्राहकों की सहमति से बनाया गया है और किसी कानून का उल्लंघन नहीं करता, तो उसे व्यवसायिक प्रचार के रूप में देखा जाना चाहिए।
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दूसरी ओर, कुछ लोग मानते हैं कि सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण होता है और ऐसे कंटेंट को साझा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट साझा करते समय कानून, प्लेटफॉर्म की गाइडलाइंस और सामाजिक संवेदनशीलता—तीनों का संतुलन आवश्यक है।
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम
फिलहाल Bathinda Tattoo Video Controversy में दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। निहंग मनप्रीत सिंह खालसा सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो हटाने की मांग कर रहे हैं, जबकि टैटू आर्टिस्ट रनबीर सिंह का कहना है कि वे ग्राहकों की सहमति से पेशेवर तरीके से काम कर रहे हैं।
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यह मामला केवल एक टैटू स्टूडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर कंटेंट, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यवसायिक प्रचार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा को आगे बढ़ा रहा है। यदि इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक कार्रवाई या नया बयान सामने आता है, तो विवाद नया मोड़ ले सकता है।














