उमाकांत त्रिपाठी। PM Modi VivaTech Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की डिजिटल क्रांति और तकनीकी उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा। फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे बड़े तकनीकी सम्मेलन विवाटेक (VivaTech) में संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि फ्रांस भारत और यूरोप के बीच एक महत्वपूर्ण पुल की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब वैश्विक पहचान बन चुका है और फ्रांस में एफिल टॉवर तथा पेरिस एयरपोर्ट पर भी इसका उपयोग किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने टेक्नोलॉजी के माध्यम से व्यापक बदलाव किए हैं और आज देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
भारत की डिजिटल क्रांति का दुनिया में बढ़ता प्रभाव
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की डिजिटल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया के लगभग आधे रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं। यह उपलब्धि UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि भारत ने केवल डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भी दुनिया के सामने एक मॉडल पेश किया है। डिजिलॉकर का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल डॉक्यूमेंट वॉलेट्स में से एक है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम आम नागरिकों को सशक्त बनाने का काम कर रहा है। फाइनेंशियल इन्क्लूजन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन, कृषि और सरकारी सेवाओं में तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
भारत-यूरोप संबंधों के लिए खास है साल 2026
पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2026 भारत और यूरोप के रिश्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि साल की शुरुआत में भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा हुआ है।
प्रधानमंत्री के अनुसार यह समझौता दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ की शुरुआत भी दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बनाएगी।
उन्होंने कहा, “फ्रांस एक अहम पुल का काम कर रहा है, जो भारत और यूरोप के टेक इकोसिस्टम को एक-दूसरे के करीब ला रहा है।”
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भविष्य की तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत और यूरोप मिलकर काम कर सकते हैं।
दुनिया का सबसे बड़ा टैलेंट पूल है भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा टैलेंट हब बताते हुए कहा कि देश में युवाओं की बड़ी आबादी नवाचार और तकनीकी विकास को नई दिशा दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार नियमों को सरल बना रही है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने पर काम कर रही है। स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए 50 अरब डॉलर से अधिक के विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इनोवेशन को कमर्शियलाइजेशन तक पहुंचाना भी है। इसी वजह से भारत आज वैश्विक निवेशकों और टेक कंपनियों के लिए आकर्षक केंद्र बनता जा रहा है।
दुनिया का सबसे सस्ता डेटा और ग्रीन एनर्जी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध कराने वाले देशों में शामिल है। इसके साथ ही देश कम लागत वाली हरित ऊर्जा पर भी तेजी से काम कर रहा है।उन्होंने कहा कि- सरकार की भूमिका सुविधाएं और आवश्यक ढांचा उपलब्ध कराने की है, जबकि उद्योग और स्टार्टअप्स नवाचार को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। भारत का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।पीएम मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर भविष्य की तकनीकों के विकास और उपयोग में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
क्या है VivaTech Summit?
विवाटेक (VivaTech) यूरोप का सबसे बड़ा तकनीकी और स्टार्टअप सम्मेलन माना जाता है। इस आयोजन में दुनियाभर की प्रमुख टेक कंपनियां, स्टार्टअप्स, निवेशक और विशेषज्ञ भाग लेते हैं।
सम्मेलन में मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, ग्रीन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, उद्यमिता और भविष्य की उभरती तकनीकों पर चर्चा की जाती है। यह मंच वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों और नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए जाना जाता है।G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी पेरिस पहुंचे थे, जहां भारतीय समुदाय ने उनका जोरदार स्वागत किया। विवाटेक समिट में उनका संबोधन भारत की बढ़ती तकनीकी शक्ति और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।














