नई दिल्ली: Gold Price Forecast 2026 इन दिनों निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। हाल के महीनों में सोने की कीमतों में आई गिरावट ने जहां कई खरीदारों को राहत दी है, वहीं दुनिया की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं ने आने वाले समय में सोने के दामों में बड़ी तेजी की संभावना जताई है।
ईरान युद्ध शुरू होने से पहले भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। हालांकि युद्ध समाप्त होने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गई। यानी कुछ ही समय में करीब 15 हजार रुपये की कमी देखने को मिली।
लेकिन अब JP Morgan, Goldman Sachs, UBS, Deutsche Bank और Citibank जैसे वैश्विक संस्थानों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमतें 20% से 40% तक बढ़ सकती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा या कुछ समय इंतजार करना बेहतर होगा?
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट क्यों आई?
सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में इसकी कीमतों में गिरावट देखने को मिली है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह डॉलर की मजबूती रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना खरीदना अपेक्षाकृत महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है।
ईरान युद्ध के दौरान डॉलर इंडेक्स में लगभग 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते कई निवेशकों ने सोने के बजाय डॉलर और बॉन्ड में निवेश को प्राथमिकता दी।
इसके अलावा 2025 से 2026 की शुरुआत तक सोने की कीमतों में लगभग 74% की तेजी देखने को मिली थी। जब किसी एसेट की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच जाती हैं तो निवेशक मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं। इसी कारण बड़ी मात्रा में सोने की बिक्री हुई और कीमतों में गिरावट आ गई।
घरेलू मांग में कमी का भी पड़ा असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। हालांकि हालिया समय में घरेलू मांग में कमी दर्ज की गई है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, देश में पहले से पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। दिसंबर 2025 में भारत ने 4.13 अरब डॉलर का सोना आयात किया था, जबकि जनवरी 2026 में यह बढ़कर 12.07 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ज्वेलर्स के पास पहले से पर्याप्त स्टॉक होने के कारण नई खरीदारी सीमित रही। इसका असर भी कीमतों पर देखने को मिला।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब मांग कमजोर होती है और बाजार में स्टॉक अधिक होता है, तब कीमतों पर दबाव बनना स्वाभाविक है।
2026 तक सोना 40% महंगा क्यों हो सकता है?
हालांकि अभी कीमतों में गिरावट है, लेकिन अधिकांश वैश्विक वित्तीय संस्थानों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है।
JP Morgan का अनुमान
जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर से लगभग 40% अधिक है।
Deutsche Bank की राय
जर्मनी के डॉयचे बैंक ने भी 6,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य दिया है, जो मजबूत तेजी का संकेत देता है।
Goldman Sachs और UBS का अनुमान
गोल्डमैन सैक्स ने 5,400 डॉलर प्रति औंस जबकि UBS ने 5,500 डॉलर प्रति औंस तक कीमत पहुंचने की संभावना जताई है।
Citibank का दृष्टिकोण
सिटीबैंक का अनुमान अपेक्षाकृत संतुलित है, लेकिन उसने भी 5,000 डॉलर प्रति औंस तक की कीमत संभव बताई है।
यदि भारत में मौजूदा कीमतों के आधार पर गणना की जाए, तो:
20% वृद्धि पर 10 ग्राम सोना लगभग 1.74 लाख रुपये
30% वृद्धि पर लगभग 1.88 लाख रुपये
40% वृद्धि पर लगभग 2.03 लाख रुपये तक पहुंच सकता है
सेंट्रल बैंकों की खरीदारी बनी सबसे बड़ी वजह
सोने की कीमतों में संभावित तेजी की सबसे बड़ी वजह दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही खरीदारी मानी जा रही है।
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस के विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद कई देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई।
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा सोने में बदल रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025-26 में केंद्रीय बैंकों ने 900 टन से अधिक सोना खरीदा। यह लगातार चौथा वर्ष है जब इतनी बड़ी खरीदारी हुई है।
चीन सबसे आगे
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना लगातार सोना खरीद रहा है। इसके अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया और ग्वाटेमाला जैसे देशों ने भी अपने भंडार बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
यही कारण है कि विशेषज्ञ आने वाले वर्षों में सोने की मांग और कीमतों में वृद्धि की संभावना देख रहे हैं।
क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि वर्तमान समय में सोना खरीदना सही रहेगा या नहीं।
केड़िया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केड़िया के अनुसार अगले 1 से 3 महीने सोना खरीदने के लिए बेहतर अवसर हो सकते हैं।
उनका कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के कारण निकट भविष्य में सोने की कीमतों में कुछ और नरमी देखने को मिल सकती है। हालांकि लंबी अवधि में तेजी की संभावना बनी हुई है।
HDFC सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट अनुज गुप्ता का भी मानना है कि अल्पकाल में कीमतों में दबाव रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अभी भी एक मजबूत विकल्प है।
निवेशकों के लिए क्या है निष्कर्ष?
Gold Price Forecast 2026 को लेकर वैश्विक संस्थानों की राय स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में सोना फिर से नई ऊंचाइयों को छू सकता है। हालांकि अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
यदि आपका लक्ष्य 3 से 5 साल का निवेश है, तो मौजूदा गिरावट को अवसर के रूप में देखा जा सकता है। वहीं अल्पकालिक निवेशक बाजार की दिशा स्पष्ट होने तक कुछ समय इंतजार कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और डॉलर पर घटती निर्भरता जैसे कारक आने वाले समय में सोने को फिर से मजबूत बना सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।














