उमाकांत त्रिपाठी।तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर बिना चिकित्सकीय निगरानी के प्रसव कराने के खतरों को उजागर कर दिया है। यहां एक गर्भवती महिला ने अस्पताल जाने के बजाय यूट्यूब वीडियो की मदद से घर पर ही प्राकृतिक प्रसव (नेचुरल डिलीवरी) कराने का फैसला किया, लेकिन यह फैसला उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) के कारण महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले के उथुकुली क्षेत्र के थलावयपालयम गांव की रहने वाली शशिकला अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली थीं। उनके पति कार्तिक के साथ उनकी पहले से एक चार वर्षीय बेटी भी है। परिवार ने अस्पताल में प्रसव कराने के बजाय इंटरनेट और यूट्यूब वीडियो की मदद से घर पर ही डिलीवरी कराने का जोखिम भरा फैसला लिया, जो बाद में एक बड़े हादसे में बदल गया।
घर पर डिलीवरी कराने का लिया फैसला
जानकारी के अनुसार, शशिकला और उनके पति कार्तिक ने किसी अस्पताल या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की सहायता लेने के बजाय ऑनलाइन उपलब्ध वीडियो देखकर घर पर ही प्रसव कराने की योजना बनाई। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता के घर पर प्रसव कराना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि प्रसव के दौरान अचानक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
24 जून को शशिकला ने घर पर ही एक बच्ची को जन्म दिया। शुरुआती तौर पर सब कुछ सामान्य दिखाई दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। परिवार के लोगों ने पहले इसे सामान्य समझा, लेकिन जब लगातार ब्लीडिंग बंद नहीं हुई और उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी, तब उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया।
अत्यधिक ब्लीडिंग बनी मौत की वजह
परिवार के सदस्य शशिकला को तत्काल पेरनदुरई सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार शुरू किया। हालांकि, लगातार बिगड़ती हालत और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोयंबटूर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया।
दुर्भाग्यवश, इलाज के दौरान शशिकला की मौत हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है। नवजात बच्ची सुरक्षित बताई जा रही है, लेकिन मां की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि परिवार ने अस्पताल में प्रसव कराने के बजाय घर पर डिलीवरी का निर्णय क्यों लिया और क्या उन्हें पर्याप्त स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया गया था।वहीं, उथुकुली पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस मामले में किसी तरह की लापरवाही या गलत सलाह की भूमिका रही है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी हमेशा सुरक्षित या चिकित्सा रूप से प्रमाणित नहीं होती। प्रसव जैसी गंभीर प्रक्रिया को केवल प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों या स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में ही कराया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के दौरान होने वाला अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। यदि समय पर चिकित्सा सहायता न मिले, तो मरीज की जान बचाना मुश्किल हो सकता है।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, जबकि कुछ लोगों ने सोशल मीडिया और यूट्यूब पर उपलब्ध गैर-प्रमाणित चिकित्सा सलाह पर चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को इंटरनेट पर मौजूद स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अंतिम सत्य मानने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। खासकर गर्भावस्था और प्रसव जैसे मामलों में किसी भी तरह का जोखिम जानलेवा साबित हो सकता है।
लोगों के लिए सीख
तिरुप्पुर की यह दर्दनाक घटना एक बड़ी सीख है कि चिकित्सा आपात स्थितियों और प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में केवल ऑनलाइन वीडियो या सोशल मीडिया सलाह पर भरोसा करना गंभीर परिणाम दे सकता है। गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच और सुरक्षित अस्पताल प्रसव को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।















