Europe Heatwave 2026:खबर इंडिया की।यूरोप इस समय इतिहास की सबसे खतरनाक और रिकॉर्डतोड़ हीटवेव (Heatwave) का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने कई देशों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी ने रविवार को बताया कि 24 जून से 27 जून के बीच देश में भीषण गर्मी के कारण लगभग 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के औसत मृत्यु दर की तुलना में कहीं अधिक है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में इस तरह की गर्मी की लहरें भविष्य में और अधिक बार तथा लंबे समय तक देखने को मिल सकती हैं। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, इटली, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड समेत कुल 16 देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
फ्रांस में सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, हीटवेव के कारण हुई अतिरिक्त मौतों में करीब 85 प्रतिशत मृतक बुजुर्ग थे। अधिकांश मौतें घरों के अंदर हुईं, जहां लोग भीषण गर्मी और उमस से बच नहीं पाए। राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में सबसे अधिक मौतों के मामले सामने आए हैं।
हालांकि- सरकार ने अभी तक कुल मौतों का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों के शुरुआती आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। प्रशासन ने नागरिकों को घरों में रहने, अधिक पानी पीने और अत्यधिक गर्मी के दौरान बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
19 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित
समाचार एजेंसी AFP के अनुमान के अनुसार, रविवार को यूरोप में लगभग 19.1 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कई देशों में सड़कें पिघलने लगी हैं, स्कूलों को बंद करना पड़ा है और जंगलों में भीषण आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप का तापमान वैश्विक औसत तापमान की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में ऐसे चरम मौसम की घटनाओं में और वृद्धि होने की संभावना है।
ब्रिटेन में टूटा 50 साल पुराना रिकॉर्ड
ब्रिटेन भी इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। देश के इतिहास में पहली बार लगातार तीन दिनों तक रेड वॉर्निंग जारी करनी पड़ी है। जून महीने का लगभग 50 साल पुराना तापमान रिकॉर्ड इस सप्ताह लगातार तीन दिनों तक टूटा है।
दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जून महीने का नया रिकॉर्ड बन गया है। इससे पहले जून का रिकॉर्ड 35.6 डिग्री सेल्सियस था। ब्रिटेन में अब तक का सबसे अधिक तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो जुलाई 2022 में रिकॉर्ड किया गया था। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष यह रिकॉर्ड भी टूट सकता है।
अस्पतालों में बढ़े मरीज, स्कूल हुए बंद
ब्रिटेन में गर्मी के कारण बिजली की मांग पिछले 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई बड़े अस्पतालों को आपातकालीन स्थिति घोषित करनी पड़ी है।इसके अलावा, पूरे ब्रिटेन में 1,000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है। पुराने निर्माण और अपर्याप्त वेंटिलेशन वाले स्कूल भवन अत्यधिक गर्म हो गए हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों के लिए वहां रहना मुश्किल हो गया है।
रेलवे और जल आपूर्ति पर असर
भीषण गर्मी का असर ब्रिटेन के परिवहन नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण लोहे की रेलवे पटरियां फैल रही हैं और उनके मुड़ने का खतरा बढ़ गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की गति को 60 मील प्रति घंटा तक सीमित कर दिया गया है।
वहीं, पानी की कमी से निपटने के लिए कई क्षेत्रों में होजपाइप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लोगों को बगीचों और वाहनों पर पानी के उपयोग को सीमित करने की सलाह दी गई है।
यूरोप में बढ़ रहा जलवायु संकट
वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान हीटवेव केवल एक अस्थायी मौसमीय घटना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। यूरोप में बढ़ते तापमान, जंगल की आग, सूखा और अत्यधिक गर्मी के मामले आने वाले वर्षों में और गंभीर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी आपदाएं और अधिक घातक साबित हो सकती हैं। यूरोपीय देशों के सामने अब केवल राहत और बचाव ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जलवायु रणनीति तैयार करने की भी चुनौती खड़ी हो गई है।















