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गुजरात-एमपी में जैश के 8 आतंकी पकड़े गए, गुजरात में टेररिस्ट नेटवर्क फैलाने का काम कर रहे थे, ATS ने क्या बताया?

खबर इंडिया की।JeM Terrorist Arrest Gujarat ATS मामले में गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े आठ संदिग्ध आतंकियों को गुजरात और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ये सभी आरोपी गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे, जिसका इस्तेमाल भविष्य में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था।

सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दो युवकों की उम्र महज 18 और 19 वर्ष है। ATS ने सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इनका नेटवर्क कितना व्यापक था और इनके संपर्क देश और विदेश में किन लोगों से थे।

गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई, अलग-अलग जिलों से हुई गिरफ्तारी

गुजरात ATS को लंबे समय से कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर एक विशेष अभियान चलाया गया। इस ऑपरेशन के तहत गुजरात और मध्य प्रदेश के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की गई, जिसके बाद आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।

 

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए संपर्क में थे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इन आरोपियों को विदेश से किसी प्रकार की आर्थिक या तकनीकी सहायता मिल रही थी।

 

ATS अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इससे इस नेटवर्क की गतिविधियों और इसके संभावित विस्तार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

गुजरात में सक्रिय नेटवर्क बनाने की थी तैयारी

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्ध गुजरात में जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय मॉड्यूल विकसित करने की दिशा में काम कर रहे थे। आशंका है कि उनका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर भर्ती, प्रचार और लॉजिस्टिक सहायता का नेटवर्क तैयार करना था।

 

सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या इन लोगों ने किसी संवेदनशील स्थान की रेकी की थी या किसी आतंकी साजिश को अंजाम देने की तैयारी चल रही थी। फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने मामले के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करने से परहेज किया है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या है जैश-ए-मोहम्मद और कौन है मसूद अजहर?

जैश-ए-मोहम्मद (JeM) पाकिस्तान स्थित एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जिसकी स्थापना आतंकी मसूद अजहर ने साल 2000 में की थी। इस संगठन पर भारत समेत कई देशों में आतंकवादी गतिविधियों और हमलों को अंजाम देने के आरोप लगते रहे हैं।

 

जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में बताया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, यह संगठन पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण शिविर और आतंकी नेटवर्क संचालित करता रहा है।

मसूद अजहर को वर्ष 1994 में जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के अपहरण के बाद बंधकों की रिहाई के बदले भारत सरकार को उसे रिहा करना पड़ा था। इसके बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की, जो बाद में दक्षिण एशिया में सक्रिय प्रमुख आतंकी संगठनों में शामिल हो गया।

सुरक्षा एजेंसियों की जांच जारी

गुजरात ATS और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि गिरफ्तार संदिग्धों का संपर्क किन व्यक्तियों और संगठनों से था। जांच का फोकस उनके डिजिटल नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और संभावित सहयोगियों पर भी है।

 

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवादी संगठनों द्वारा युवाओं को प्रभावित करने और नए नेटवर्क खड़े करने की कोशिशें लगातार जारी रहती हैं। ऐसे में राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय और सतर्कता बेहद आवश्यक है।

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