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चलते ई-रिक्शा को बंद करने वाले चाइनीज एप बैन, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी ऑफ कर देते थे बदमाश

खबर इंडिया की।E-Rickshaw Battery Hacking App को लेकर सामने आए गंभीर सुरक्षा खतरे के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT Ministry) ने ई-रिक्शा चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे तीन मोबाइल ऐप्स—BAT-BMS, लॉसिजी और इपोच ली-आयन—को ऐप स्टोर्स से हटाने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, शुक्रवार तक इनमें से कुछ ऐप्स प्ले स्टोर पर उपलब्ध दिखाई दे रहे थे।

पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें कुछ लोग ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर चलते वाहन को अचानक रोक देते थे। इससे ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा और रोजी-रोटी दोनों पर खतरा पैदा हो गया था। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

BAT-BMS ऐप क्या है और यह क्यों चर्चा में है?

BAT-BMS एक रियल-टाइम बैटरी मैनेजमेंट एप्लीकेशन है, जिसे चीन की टेक कंपनी शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य ब्लूटूथ-इनेबल्ड लीथियम बैटरियों की निगरानी और प्रबंधन करना है।

यह ऐप बैटरी की कई महत्वपूर्ण जानकारियां दिखाता है, जिनमें शामिल हैं:

  • बैटरी का वोल्टेज
  • चार्जिंग लेवल
  • तापमान
  • बैटरी हेल्थ
  • चार्ज-डिस्चार्ज स्टेटस
  • सिस्टम अलर्ट

आमतौर पर इसका उपयोग बैटरी निर्माता, डीलर, मैकेनिक और वाहन मालिक बैटरी की स्थिति पर नजर रखने के लिए करते हैं। लेकिन कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के कारण कुछ असामाजिक तत्वों ने इसका गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

कैसे रोके जा रहे थे चलते हुए ई-रिक्शा?

ई-रिक्शा में लगी कई आधुनिक लीथियम-आयन बैटरियों में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है, जो ब्लूटूथ तकनीक से संचालित होता है। यदि इस सिस्टम को मजबूत पासवर्ड या एन्क्रिप्शन से सुरक्षित नहीं किया गया हो, तो कोई भी व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए उससे कनेक्ट हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, BAT-BMS जैसे ऐप्स लगभग 10 से 15 मीटर की दूरी से बैटरी सिस्टम से जुड़ सकते हैं। यदि किसी बैटरी का ब्लूटूथ कनेक्शन खुला छोड़ा गया है, तो उससे जुड़े कुछ सेटिंग्स को बदलकर वाहन की पावर सप्लाई को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे ई-रिक्शा अचानक रुक सकता है।इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सड़क पर चलते ई-रिक्शा को रोकने के वीडियो बनाए और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

क्या सभी ई-रिक्शा इस खतरे की जद में हैं?

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि देश के सभी इलेक्ट्रिक वाहन हैक किए जा सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है।

किसी ई-रिक्शा को इस तरह प्रभावित करने के लिए दो प्रमुख शर्तें पूरी होना जरूरी हैं:

1. ब्लूटूथ सपोर्ट वाली लीथियम-आयन बैटरी

वाहन में ऐसी लीथियम बैटरी लगी हो, जिसमें ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मौजूद हो।

2. कमजोर या बिना पासवर्ड की सुरक्षा

बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम में पासवर्ड न लगा हो या उसकी सुरक्षा व्यवस्था बहुत कमजोर हो।

यदि इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती, तो ऐसे ऐप्स का प्रभाव वाहन पर नहीं पड़ता।

कौन से ई-रिक्शा पूरी तरह सुरक्षित हैं?

भारत में आज भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा पारंपरिक लेड-एसिड बैटरियों पर चलते हैं। इन बैटरियों में न तो ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती है और न ही डिजिटल बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम। इसलिए ऐसे वाहन इस प्रकार के साइबर जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित माने जाते हैं।

इसके अलावा, जिन लीथियम बैटरियों में निर्माता कंपनियों ने मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ऑथेंटिकेशन सिस्टम लगाए हैं, उन्हें सामान्य मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए एक्सेस नहीं किया जा सकता।

कारों और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों पर क्यों नहीं है खतरा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों और बड़े इलेक्ट्रिक वाहनों में अत्यधिक सुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगाए जाते हैं। इनमें मल्टी-लेयर सिक्योरिटी, एन्क्रिप्शन और ऑथेंटिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाता है।

 

इसी वजह से कोई सामान्य मोबाइल ऐप इन वाहनों की बैटरी से कनेक्ट नहीं हो सकता। यही कारण है कि यह खतरा मुख्य रूप से कुछ कम लागत वाले और कमजोर सुरक्षा वाले ई-रिक्शा बैटरी सिस्टम तक ही सीमित है।

सरकार ने क्या कार्रवाई की है?

ई-रिक्शा चालकों की शिकायतों और वायरल वीडियो के बाद आईटी मंत्रालय ने BAT-BMS, लॉसिजी और इपोच ली-आयन ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का उद्देश्य ऐसे किसी भी प्लेटफॉर्म को रोकना है, जिसका उपयोग सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित करने या वाहन संचालन में बाधा डालने के लिए किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ई-रिक्शा और अन्य छोटे इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए साइबर सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत किया जा सकता है, ताकि इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।

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