Iran US Conflict: खबर इंडिया की।Iran US Conflict लगातार नए मोड़ ले रहा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार नौ रातों तक हवाई हमले किए हैं, जिसकी पुष्टि यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने की है। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने और समुद्री हमलों की क्षमता को कमजोर करना बताया गया है। दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। इस संघर्ष ने पूरे मध्य-पूर्व में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई से यह टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है।
अमेरिका ने लगातार 9 रातों तक किए हवाई हमले
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार अमेरिकी सेना ने लगातार नौ रातों तक ईरान के विभिन्न सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्च साइट, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर और नौसैनिक सुविधाएं प्रमुख लक्ष्य रहीं।
रिपोर्ट के अनुसार, हमलों का मकसद ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित कर सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
अमेरिकी हमलों के दौरान बंदर अब्बास, सिरिक, क़ेश्म द्वीप और खार्ग द्वीप सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में विस्फोट और आग लगने की खबरें सामने आईं। खार्ग द्वीप ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में से एक माना जाता है।
जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवार
Iran US Conflict के बीच ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन की मदद से कई सैन्य ठिकानों पर सफल हमले किए गए।
सबसे प्रमुख निशाना मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस (MSAB) और प्रिंस हसन (अल-अज्रक) क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाएं रहीं। ईरान का कहना है कि हमलों में कमांड सेंटर, ड्रोन ऑपरेशन क्षेत्र, एयरक्राफ्ट पार्किंग और फाइटर जेट शेल्टर को नुकसान पहुंचाया गया।
हालांकि- इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इस हमले को हाल के वर्षों में अमेरिकी ठिकानों पर सबसे गंभीर हमलों में से एक माना जा रहा है।
अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों में कम से कम चार अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई जबकि एक सैनिक लापता बताया गया। कई अन्य सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह में जॉर्डन के विभिन्न अमेरिकी ठिकानों पर कई बार हमले हुए हैं। इन घटनाओं के बाद पूरे संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैनिकों की कुल मौत का आंकड़ा करीब 16 तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
जॉर्डन की एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहीं। इससे सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा।
ईरान के सैन्य और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान
अमेरिकी हवाई हमलों का असर ईरान के कई रणनीतिक इलाकों में देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार कई सैन्य अड्डों के अलावा तेल निर्यात से जुड़ी सुविधाएं, पुल, जल आपूर्ति केंद्र और बंदरगाह भी प्रभावित हुए।
होर्मोज़गान प्रांत में पानी के भंडारण केंद्रों को नुकसान पहुंचने से हजारों लोगों की जल आपूर्ति प्रभावित हुई। वहीं तेल निर्यात से जुड़े ढांचे को नुकसान होने की वजह से आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि- यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो ईरान की ऊर्जा व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों पर बड़ा दबाव बन सकता है।
वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर
Iran US Conflict का सबसे बड़ा असर ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है।
यदि इस समुद्री मार्ग में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके साथ ही एशिया और यूरोप के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि- यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार, शिपिंग कंपनियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा
मध्य-पूर्व में पहले से मौजूद अस्थिरता के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। जॉर्डन, इराक, खाड़ी देशों और अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा व्यवस्था भी इस तनाव से प्रभावित हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है। हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने सैन्य अभियानों को जारी रखे हुए हैं।
यदि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज होता है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।














