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कौन हैं कैप्टन रितिका खरेता? जिन्होंने PM मोदी संग फहराया तिरंगा, जांबाज अफसर के बारे में जानिए

उमाकांत त्रिपाठी।15 अगस्त 2026 को देश ने 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाया। नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और देश को संबोधित किया। इस दौरान जहां तिरंगे और प्रधानमंत्री के भाषण पर पूरे देश की नजर थी, वहीं समारोह की एक सैन्य अधिकारी की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया और लोगों के बीच Captain Ritika Khareta को लेकर चर्चा होने लगी।

 

हालांकि, यहां एक जरूरी तथ्य स्पष्ट करना भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिकॉर्ड में Captain Ritika Khareta की 15 अगस्त 2026 के लाल किले समारोह में प्रधानमंत्री के ठीक पीछे मौजूदगी की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं मिलती। Captain Ritika Khareta की सार्वजनिक रूप से प्रमाणित पहचान जनवरी 2025 के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़ी है, जब उन्होंने भारतीय सेना के Corps of Signals की 146 जवानों वाली मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व किया था।

यही वजह है कि वायरल तस्वीर या वीडियो को साझा करते समय इस अंतर को समझना जरूरी है। इसके बावजूद Captain Ritika Khareta की कहानी अपने आप में बेहद प्रेरणादायक है और भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को समझने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी है।

कौन हैं Captain Ritika Khareta?

Captain Ritika Khareta भारतीय सेना के Corps of Signals से जुड़ी अधिकारी हैं। जनवरी 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियां बटोरीं, जब उन्हें 76वें गणतंत्र दिवस परेड में Corps of Signals की मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मिली।

खास बात यह थी कि उनके नेतृत्व वाली टुकड़ी में 146 पुरुष जवान शामिल थे और वह उस मार्चिंग कंटिंजेंट की अकेली महिला सदस्य थीं। इस तरह एक महिला अधिकारी का इतने बड़े पुरुष दल का नेतृत्व करना अपने आप में खास उपलब्धि थी।

Akashvani News ने जनवरी 2025 में भी Captain Ritika Khareta का इंटरव्यू प्रकाशित किया था, जिसमें वह गणतंत्र दिवस परेड में Corps of Signals की मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने को लेकर अपनी भावनाएं साझा करती दिखाई दी थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Captain Ritika Khareta दिल्ली से हैं। उनके पिता दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे हैं, जबकि उनकी मां शिक्षिका हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वह अपने परिवार में पहली अधिकारी हैं। उनके परदादा भी भारतीय सेना में रहे थे और उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।

उनकी शिक्षा दिल्ली के Amity International School, Pushp Vihar से हुई। जनवरी 2025 की रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें जबलपुर स्थित Signal Training Centre में चयन प्रक्रिया के बाद 12 अधिकारियों में से चुना गया था। इसके बाद उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समारोहों में से एक में मार्चिंग कंटिंजेंट की कमान संभालने का अवसर मिला।

146 जवानों की टुकड़ी का किया था नेतृत्व

Captain Ritika Khareta की पहचान सिर्फ इसलिए खास नहीं हुई कि वह एक महिला अधिकारी हैं। असली वजह थी उनकी कमान और जिम्मेदारी।

76वें गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने Corps of Signals की 146 सदस्यीय टुकड़ी का नेतृत्व किया। यह वही सैन्य शाखा है जो सेना के संचार नेटवर्क और उससे जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक रिपोर्ट में Corps of Signals की भूमिका को Army network, cyber warfare और electronic warfare जैसे क्षेत्रों से जोड़ा गया है।

कर्तव्य पथ पर जब Captain Ritika Khareta ने कमान संभाली, तब उनके पीछे बड़ी संख्या में पुरुष सैनिक कदमताल कर रहे थे। उनकी नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और आत्मविश्वास ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

यह दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि भारतीय सेना में महिलाओं की भूमिका लगातार व्यापक हो रही है। पहले जहां महिलाओं की सैन्य भागीदारी को कुछ सीमित भूमिकाओं से जोड़कर देखा जाता था, वहीं अब महिला अधिकारी नेतृत्व, तकनीक, कमांड और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों में भी अपनी जगह बना रही हैं।

Captain Ritika Khareta इसी बदलाव की एक चर्चित मिसाल बन चुकी हैं।

लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का क्या है प्रोटोकॉल?

हर साल 15 अगस्त को लाल किला देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोह का केंद्र बन जाता है। रक्षा मंत्रालय के Rashtraparv पोर्टल के मुताबिक, 15 अगस्त 1947 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। इसके बाद से प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से तिरंगा फहराने और देश को संबोधित करने की परंपरा जारी है।

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण में भी अंतर होता है। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं, जबकि 26 जनवरी को राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज से जुड़ी औपचारिकता निभाते हैं। स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के आगमन, गार्ड ऑफ ऑनर, ध्वजारोहण, राष्ट्रगान और अन्य सैन्य औपचारिकताओं के बीच बेहद सटीक तालमेल रखा जाता है।

2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए भी लाल किले में कई सप्ताह पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। सुरक्षा, मंच, तकनीकी व्यवस्थाओं और रिहर्सल के लिए लाल किले को पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद रखा गया था।

Captain Ritika Khareta क्यों बनीं नारी शक्ति की मिसाल?

Captain Ritika Khareta की कहानी सिर्फ एक सैन्य अधिकारी के करियर की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की तस्वीर है जिसमें भारतीय महिलाएं देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

2025 के गणतंत्र दिवस परेड में उनका पुरुष जवानों वाली टुकड़ी का नेतृत्व करना इस बदलाव का स्पष्ट उदाहरण था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे पहले Captain Tania Shergill भी 2020 में Corps of Signals की पुरुष टुकड़ी का नेतृत्व कर चुकी थीं।

इससे यह संदेश जाता है कि सेना में नेतृत्व की क्षमता केवल लिंग से तय नहीं होती। अनुशासन, प्रशिक्षण, क्षमता और जिम्मेदारी निभाने का आत्मविश्वास किसी अधिकारी को नेतृत्व के लिए तैयार करता है।

लाल किले से जुड़ी वायरल तस्वीरों और वीडियो के बीच Captain Ritika Khareta का नाम फिर चर्चा में आना इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि 15 अगस्त 2026 के समारोह में उनकी कथित भूमिका की पुष्टि किए बिना उसे तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

सेना में अफसर कैसे बन सकती हैं लड़कियां?

Captain Ritika Khareta जैसी सैन्य अधिकारियों की कहानी उन युवतियों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो भारतीय सेना में करियर बनाना चाहती हैं।

ग्रेजुएशन के बाद महिलाओं के लिए भारतीय सेना में अधिकारी बनने के कई रास्ते उपलब्ध हैं। इनमें Combined Defence Services यानी CDS जैसी प्रवेश परीक्षाएं प्रमुख हैं। इसके अलावा पात्र उम्मीदवार NCC Special Entry जैसे रास्तों से भी अवसर प्राप्त कर सकती हैं।

आमतौर पर चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा या संबंधित एंट्री के अनुसार शॉर्टलिस्टिंग, उसके बाद Services Selection Board यानी SSB Interview, मेडिकल परीक्षण और अंतिम चयन जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। चयनित उम्मीदवारों को संबंधित सैन्य अकादमी में कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।

यह प्रशिक्षण केवल शारीरिक क्षमता तक सीमित नहीं होता। नेतृत्व क्षमता, मानसिक मजबूती, निर्णय लेने की क्षमता, टीमवर्क और कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाने की योग्यता भी अधिकारी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

एक तस्वीर से आगे की कहानी

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से तिरंगे के साथ दिखाई देने वाला हर सैन्य दृश्य अपने पीछे वर्षों की मेहनत, प्रशिक्षण और अनुशासन की कहानी लेकर आता है। Captain Ritika Khareta का उदाहरण भी इसी बात को सामने लाता है।

जनवरी 2025 में 146 जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व कर उन्होंने राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई थी। 15 अगस्त 2026 को उनके नाम से जुड़ी तस्वीरों या दावों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जरूर हो सकती है, लेकिन किसी वायरल दावे को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य मानना सही नहीं है।

फिर भी Captain Ritika Khareta की उपलब्धि अपने आप में इतनी बड़ी है कि वह देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। उनकी यात्रा बताती है कि भारतीय सेना में महिलाओं के लिए नेतृत्व और जिम्मेदारी के नए रास्ते खुल रहे हैं।

लाल किले की प्राचीर से लहराता तिरंगा सिर्फ आजादी का प्रतीक नहीं है, बल्कि उन लाखों सपनों का भी प्रतीक है जिन्हें देश की नई पीढ़ी पूरा करना चाहती है। Captain Ritika Khareta जैसे अधिकारी इसी सपने को अनुशासन, साहस और कर्तव्य के साथ आगे बढ़ाने की मिसाल पेश करते हैं।

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