नई दिल्ली: Omar Abdullah Divorce मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला की शादी को आपसी सहमति से समाप्त करने की मंजूरी दे दी। दोनों लंबे समय से अलग रह रहे थे और उन्होंने अदालत को बताया कि वे अपने सभी विवादों का समाधान कर चुके हैं। **Omar Abdullah Divorce** केस में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वर्षों से चल रहे कानूनी विवाद का अंत माना जा रहा है।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने आपसी सहमति से वैवाहिक संबंध समाप्त करने और सभी लंबित विवादों को खत्म करने का निर्णय लिया है। इसके बाद अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विवाह समाप्त करने की अनुमति दे दी।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
**Omar Abdullah Divorce** विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। अंततः दोनों ने अदालत को सूचित किया कि वे अब अपने रिश्ते को कानूनी रूप से समाप्त करना चाहते हैं और सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।
15 साल से अलग रह रहे थे दोनों
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला पिछले करीब 15 वर्षों से अलग-अलग रह रहे थे। लंबे समय से दोनों के बीच वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं थे और मामला अदालत तक पहुंच गया था।
हालांकि, दोनों ने अपने बच्चों की परवरिश और अन्य पारिवारिक मामलों को लेकर समय-समय पर संवाद बनाए रखा। अब दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली है।
ओबेरॉय होटल में हुई थी पहली मुलाकात
उमर अब्दुल्ला और पायल की पहली मुलाकात दिल्ली के प्रसिद्ध ओबेरॉय होटल में हुई थी। उस समय दोनों वहीं कार्यरत थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में उन्होंने विवाह कर लिया।
दोनों के दो बेटे हैं, जिनका नाम जहीर और जमीर है। परिवार से जुड़े मामलों को लेकर भी दोनों ने आपसी समझौते के तहत समाधान निकालने की बात अदालत को बताई।
अनुच्छेद 142 के तहत दायर किया गया आवेदन
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ को बताया कि इस महीने की शुरुआत में दोनों पक्षों ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने के लिए संयुक्त आवेदन दाखिल किया था।
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकार प्राप्त हैं। इसी संवैधानिक शक्ति का उपयोग करते हुए अदालत ने दोनों की शादी समाप्त करने की मंजूरी दी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दी थी समझौते की सलाह
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की सलाह दी थी।
अदालत ने कहा था कि यदि दोनों गंभीरता से बातचीत करें तो मामला सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त हो सकता है। कोर्ट ने उम्मीद जताई थी कि दोनों अपने मतभेद दूर करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगे।
बाद में दोनों पक्षों ने अदालत के समक्ष सहमति जताते हुए विवाह समाप्त करने का संयुक्त निर्णय प्रस्तुत किया।
300 करोड़ रुपये की एलिमनी का आरोप भी आया था सामने
**Omar Abdullah Divorce** मामले की सुनवाई के दौरान एक समय यह भी दावा किया गया था कि पायल अब्दुल्ला तलाक के बदले 300 करोड़ रुपये की एलिमनी की मांग कर रही हैं।
उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में यह आरोप लगाया था। हालांकि, अंतिम सुनवाई में दोनों पक्षों ने अदालत को बताया कि उन्होंने सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिए हैं। अदालत ने भी अंतिम आदेश में केवल सहमति से विवाह समाप्त करने पर फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का महत्व
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दोनों पक्षों को राहत दी है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हों और दोनों आपसी सहमति से विवाह समाप्त करना चाहें, तब अदालत पूर्ण न्याय के सिद्धांत के आधार पर ऐसे मामलों में विशेष अधिकारों का उपयोग कर सकती है।














