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PM मोदी से मिलेंगे NCP (SP) सांसद, परिसीमन पर बनेगी बात, इस दिन हो सकती है मुलाकात?

उमाकांत त्रिपाठी।संसद के मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में Delimitation Bill को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार जहां संसद में जारी गतिरोध खत्म कर परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे अहम विधेयकों पर आगे बढ़ना चाहती है, वहीं एनसीपी (शरद पवार) गुट के सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संभावित मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक 10 अगस्त को हो सकती है। सांसदों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से मुलाकात के लिए समय मांगा है और इस दौरान अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद के अंतिम सप्ताह में Delimitation Bill को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की कोशिशें तेज हो सकती हैं। ऐसे में यह संभावित मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

PM Modi से मुलाकात क्यों मानी जा रही है अहम?

सूत्रों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों की विकास परियोजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और लंबित योजनाओं पर चर्चा करेंगे। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि बैठक के दौरान Delimitation Bill और महिला आरक्षण विधेयक जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठ सकते हैं।

सरकार की प्राथमिकता संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की है। ऐसे में विभिन्न दलों के सांसदों से संवाद स्थापित कर सहमति बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

सुप्रिया सुले के बयान से बदला राजनीतिक माहौल

एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले पहले ही Delimitation Bill को लेकर पार्टी का संभावित रुख स्पष्ट कर चुकी हैं। उन्होंने कहा था कि यदि परिसीमन के तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या समान रूप से बढ़ाई जाती है और किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होता, तो पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।

सुप्रिया सुले ने यह भी कहा था कि यदि विधेयक में देशभर में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत तक समान वृद्धि का प्रावधान किया जाता है, तो उनकी पार्टी सकारात्मक रुख अपना सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में भी परिसीमन के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के कुछ दलों के रुख में लचीलापन देखने को मिल सकता है।

महिला आरक्षण और Delimitation Bill पर सरकार का फोकस

केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में महिला आरक्षण और Delimitation Bill दोनों प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। माना जा रहा है कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिला आरक्षण कानून को लागू करने का रास्ता और स्पष्ट हो जाएगा।

संसद के मानसून सत्र में इन दोनों मुद्दों पर चर्चा कराने की कोशिश लगातार जारी है। हालांकि विपक्ष के विरोध और सदन में जारी गतिरोध के कारण अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद के जरिए सहमति बनाने की कोशिश कर रही है ताकि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जा सके।

NDA के संख्या बल पर PM Modi का भरोसा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास जताया है कि एनडीए के पास लोकसभा में महिला आरक्षण और Delimitation Bill जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

सूत्रों के अनुसार, सरकार को लगभग 366 सांसदों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है। यदि मानसून सत्र के दौरान इन विधेयकों पर चर्चा संभव नहीं हो पाती, तो केंद्र सरकार इस महीने के अंत में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी विचार कर सकती है।

ऐसी स्थिति में परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों ही राष्ट्रीय राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण विषय बन सकते हैं।

10 अगस्त की संभावित बैठक पर टिकी निगाहें

राजनीतिक हलकों की नजर अब 10 अगस्त को प्रस्तावित प्रधानमंत्री और एनसीपी (एसपी) सांसदों की संभावित बैठक पर टिकी हुई है। इस मुलाकात में क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों के अलावा Delimitation Bill, महिला आरक्षण, संसद की कार्यवाही और राजनीतिक सहमति जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

सुप्रिया सुले के हालिया बयान के बाद इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो संसद में सरकार को विपक्ष के कुछ दलों का सहयोग मिल सकता है। वहीं, यदि सहमति नहीं बनती है तो सरकार विशेष सत्र बुलाकर इन विधेयकों पर आगे बढ़ने का विकल्प भी चुन सकती है।

फिलहाल, देश की राजनीति में Delimitation Bill सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल है और संसद के अंतिम सप्ताह में होने वाली गतिविधियों पर सभी दलों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सरकार इन महत्वपूर्ण विधेयकों को मौजूदा सत्र में आगे बढ़ा पाती है या फिर विशेष सत्र का रास्ता अपनाया जाएगा।

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