खबर इंडिया की।उत्तर प्रदेश के झांसी से सामने आया Jhansi Land Dispute का एक हैरान करने वाला मामला चर्चा में है। यहां महज 2 बीघा जमीन को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि एक बुजुर्ग पिता की मौत के बाद करीब 35 घंटे तक उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका। मृतक के बेटों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि जब तक उनकी बहन जमीन वापस नहीं करती, तब तक पिता का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। मामला इतना बढ़ गया कि परिवार को जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन कभी OTP की समस्या तो कभी सर्वर की दिक्कत के कारण काम पूरा नहीं हो सका।
यह Jhansi Land Dispute झांसी के समथर थाना क्षेत्र के चिरगांव खुर्द गांव का बताया जा रहा है। घटना के बाद से गांव और आसपास के इलाके में इस मामले को लेकर चर्चा बनी हुई है।
2 बीघा जमीन को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?
जानकारी के मुताबिक, चिरगांव खुर्द गांव निवासी ठाकुर दास कुशवाहा के दो बेटे और तीन बेटियां हैं। ठाकुर दास के पास कुल करीब 5 बीघा जमीन बताई गई है। परिवार के अनुसार, कुछ समय पहले ठाकुर दास की तबीयत खराब रहने लगी थी। इस दौरान उनकी दूसरे नंबर की बेटी अंगूरी उन्हें अपने साथ ले गई और इलाज कराया।
बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान ठाकुर दास ने अपनी 2 बीघा जमीन बेटी अंगूरी के नाम कर दी थी। इसके बाद गुरुवार को इलाज के दौरान ठाकुर दास की मौत हो गई। बेटी उनके शव को लेकर वापस गांव चिरगांव खुर्द पहुंची।
यहीं से Jhansi Land Dispute ने गंभीर रूप ले लिया। मृतक के दोनों बेटों ने पिता का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। बेटों की मांग थी कि उनकी बहन पहले उनके नाम की गई 2 बीघा जमीन वापस करे। जब तक जमीन का मामला हल नहीं होता, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
जमीन वापस करने को तैयार हुई बहन, लेकिन नहीं हो सकी रजिस्ट्री
परिवार के बीच विवाद बढ़ने के बाद आखिरकार बेटी अंगूरी जमीन वापस करने के लिए तैयार हो गई। इसके बाद दोनों भाई अपनी बहन को लेकर मोठ स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे, ताकि जमीन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
हालांकि, यहां भी परिवार की परेशानी खत्म नहीं हुई। बताया गया कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान OTP नहीं आने की वजह से काम पूरा नहीं हो सका। इस कारण परिवार को वापस लौटना पड़ा। शाम तक अंतिम संस्कार की तैयारी की गई, लेकिन किसी वजह से उस दिन भी अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
इसके बाद तय किया गया कि अगले दिन यानी शुक्रवार की सुबह पिता का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। परिवार को उम्मीद थी कि तब तक जमीन से जुड़ा विवाद भी किसी तरह खत्म हो जाएगा।
सर्वर की समस्या ने फिर रोका जमीन का काम
शुक्रवार की सुबह दोनों भाई अंतिम संस्कार से पहले एक बार फिर अपनी बहन को लेकर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे। परिवार की कोशिश थी कि किसी भी तरह जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर दी जाए, ताकि विवाद खत्म हो और पिता का अंतिम संस्कार किया जा सके।
लेकिन इस बार भी परिवार को निराशा हाथ लगी। रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वर की समस्या बताई गई, जिसके कारण पूरे दिन रजिस्ट्री का काम नहीं हो सका। घंटों इंतजार के बाद दोनों भाई देर शाम घर लौटे।
इस घटनाक्रम के चलते Jhansi Land Dispute और भी लंबा खिंच गया। एक तरफ घर में पिता का शव अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ परिवार जमीन से जुड़े दस्तावेजी काम को पूरा कराने के लिए परेशान था।
बारिश के बीच आखिरकार हुआ अंतिम संस्कार
देर शाम दोनों भाई घर लौटे और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की गई। इसी दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई। परिवार के सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई। परिजनों के मुताबिक, गांव में मुक्तिधाम की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मृतक के शव को करीब पांच किलोमीटर दूर समथर कस्बे स्थित मुक्तिधाम ले जाना पड़ा।
इसके बाद ठाकुर दास कुशवाहा का अंतिम संस्कार किया गया। इस तरह मौत के करीब 35 घंटे बाद परिवार ने पिता का अंतिम संस्कार किया।
पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि जमीन के विवाद ने परिवार को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां पिता के अंतिम संस्कार तक में देरी हो गई। Jhansi Land Dispute का यह मामला जमीन और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े विवादों की गंभीरता को भी सामने लाता है।
पुलिस ने क्या बताया?
मामले की जानकारी मिलने के बाद समथर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। समथर थाना प्रभारी अतुल राजपूत ने बताया कि पुलिस को सूचना मिलने पर टीम मौके पर गई थी। पुलिस ने परिवार के लोगों को समझाया, जिसके बाद मृतक का अंतिम संस्कार कराया गया।
पुलिस के मुताबिक, अंतिम संस्कार करीब 35 घंटे बाद हो सका। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी प्रक्रिया OTP और बाद में सर्वर की समस्या के कारण पूरी नहीं हो पाई थी।
परिवार के विवाद ने खींचा लोगों का ध्यान
झांसी का यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। Jhansi Land Dispute में जमीन का हिस्सा, पारिवारिक सहमति और अंतिम संस्कार जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दे एक साथ सामने आए। मामला यह भी दिखाता है कि जमीन से जुड़े पारिवारिक विवाद किस तरह तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस की मौजूदगी और समझाइश के बाद अंतिम संस्कार संपन्न हो गया। जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया किस तरह और कब पूरी होती है, इस बारे में आगे की जानकारी का इंतजार है।














