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इस राज्य में पागल कुत्तों के आतंक से 10 स्कूल बंद, देश में दूसरी बार हो रहा ऐसा, घरों से डंडा लेकर निकल रहे लोग

खबर इंडिया की।उत्तराखंड के चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र में Dog Attack की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हिंसक और आक्रामक कुत्तों के लगातार हमलों में अब तक 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र के 10 स्कूलों में छुट्टी घोषित की है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले 600 से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई फिलहाल ऑनलाइन कराई जा रही है।

इलाके में Dog Attack का डर इस कदर बढ़ गया है कि कई लोग जरूरी काम से घर से बाहर निकलते समय हाथ में डंडा लेकर चल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों के झुंड के कारण बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा महसूस हो रहा है। प्रशासन और वन विभाग की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आक्रामक कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है।

नारायणबगड़ में Dog Attack से बढ़ी दहशत

नारायणबगड़ क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से कुत्तों के हमले लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रविवार और सोमवार को तीन लोगों को कुत्तों ने अपना निशाना बनाया। इसके बाद मंगलवार को स्थिति और गंभीर हो गई, जब स्कूली बच्चों समेत चार लोगों पर हमला किया गया।

बुधवार को भी हमले नहीं रुके। इस दिन तीन स्कूली बच्चों समेत चार अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद क्षेत्र में डर का माहौल है। अभिभावक अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं, वहीं ग्रामीण भी जरूरी काम के अलावा घर से निकलने में सावधानी बरत रहे हैं।

घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिए गए। अधिकारियों के अनुसार, कुत्तों के काटने के मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

10 स्कूलों में छुट्टी, 600 से ज्यादा बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई

बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन ने नारायणबगड़ क्षेत्र के 10 स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। चमोली कलेक्टर गौरव कुमार के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सरस्वत ने इस संबंध में आदेश जारी किया।

शुरुआत में 20 से 23 अगस्त तक चार दिनों की छुट्टी घोषित की गई थी। हालांकि, बाद में इसे घटाकर दो दिन कर दिया गया। स्कूल बंद रहने के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प अपनाया गया है।

इन स्कूलों में 600 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। प्रशासन का उद्देश्य बच्चों को Dog Attack के खतरे से दूर रखते हुए उनकी पढ़ाई भी जारी रखना है। स्कूलों के आसपास स्थिति सामान्य होने और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के बाद आगे की स्थिति पर फैसला लिया जा सकता है।

अभिभावकों के लिए भी प्रशासन की ओर से सतर्कता बरतने की जरूरत है। बच्चों को अकेले सुनसान रास्तों से न भेजने और आक्रामक कुत्तों के झुंड से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

वन विभाग की QRT ने संभाला मोर्चा

हिंसक कुत्तों को पकड़ने के लिए वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम यानी QRT को अभियान में लगाया गया है। टीम क्षेत्र में सक्रिय कुत्तों की पहचान कर उन्हें पकड़ने का प्रयास कर रही है। अब तक तीन कुत्तों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

प्रशासन की कोशिश है कि जिन कुत्तों से लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है, उन्हें जल्द से जल्द नियंत्रित किया जाए। इसके लिए वन विभाग की टीम स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटा रही है और उन इलाकों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां हमले ज्यादा हुए हैं।

Dog Attack की घटनाओं के बीच स्थानीय लोगों का सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किसी कुत्ते के असामान्य या बेहद आक्रामक व्यवहार की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करने की अपील की जा रही है।

क्या किसी पागल कुत्ते की वजह से बढ़ा हमला?

स्थानीय लोगों के बीच एक दावा यह भी सामने आया है कि एक पागल कुत्ते ने क्षेत्र के दूसरे कुत्तों को काटा था, जिसके बाद कई कुत्ते आक्रामक हो गए। हालांकि, इस दावे की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे मामलों में कुत्तों के व्यवहार के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। इसलिए किसी एक वजह को जिम्मेदार मानने से पहले विशेषज्ञ जांच जरूरी है। प्रशासन और वन विभाग की टीमों की ओर से की जा रही कार्रवाई के दौरान इस पहलू पर भी नजर रखी जा रही है।

लोगों में फैली अफवाहों के बीच प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना जरूरी है। खासकर Dog Attack जैसी घटनाओं में गलत जानकारी से लोगों में अनावश्यक डर और भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

कई घायल अस्पताल पहुंचे, एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए

कुत्तों के हमले में घायल हुए दीपांशु बिष्ट, मानवी, वैष्णवी, मजदूर प्रकाश और पंती गांव की लक्ष्मी समेत कई लोगों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में घायलों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिए गए।

कुत्ते के काटने के बाद समय पर चिकित्सा सहायता लेना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में घाव को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी होता है। नारायणबगड़ में लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने भी लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती है।

बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर प्रशासन की नजर

नारायणबगड़ में Dog Attack की घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन के सामने सुरक्षा की चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ी है, तो दूसरी तरफ ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम के लिए बाहर निकलना पड़ रहा है।

स्कूलों में छुट्टी और ऑनलाइन पढ़ाई का फैसला फिलहाल बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया कदम है। वहीं वन विभाग की QRT के अभियान से उम्मीद है कि आक्रामक कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं होती, लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों को अकेले बाहर न भेजना, कुत्तों के झुंड के पास न जाना और किसी भी संदिग्ध या आक्रामक कुत्ते की सूचना प्रशासन को देना महत्वपूर्ण है।

नारायणबगड़ में Dog Attack की घटनाओं के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई पर है। तीन कुत्तों को पकड़े जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता बच्चों और आम लोगों को कुत्तों के हमलों से सुरक्षित रखना है।

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