उमाकांत त्रिपाठी।युवाओं और छात्रों से सीधे संवाद बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक नई पहल की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित One Day, One University कार्यक्रम के तहत हर दिन एक केंद्रीय मंत्री देश की किसी यूनिवर्सिटी का दौरा कर छात्रों से सीधे बातचीत करेगा। इस दौरान मंत्री छात्रों की समस्याएं सुनेंगे, उनके सवालों का जवाब देंगे और शिक्षा, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट सहित युवाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय जानेंगे।
सरकार की इस पहल का मकसद केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं के साथ सीधे संवाद का एक ऐसा मंच तैयार करना है, जहां छात्र अपने सवाल और चिंताएं केंद्रीय मंत्रियों के सामने रख सकें। रिपोर्टों के मुताबिक, One Day, One University प्रस्ताव पर 19 अगस्त को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में चर्चा हुई थी। हालांकि, कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा, यूनिवर्सिटी की सूची और मंत्रियों के दौरे का पूरा शेड्यूल अभी तैयार किया जा रहा है।
One Day, One University में क्या होगा?
One Day, One University के तहत अलग-अलग केंद्रीय मंत्रियों को देश की विभिन्न यूनिवर्सिटीज की जिम्मेदारी दी जा सकती है। मंत्री तय यूनिवर्सिटी में जाकर छात्रों के साथ ओपन-हाउस संवाद करेंगे। इस बातचीत में छात्र अपनी समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था, नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं, स्किल डेवलपमेंट और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल पूछ सकेंगे।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार युवाओं की राय को सीधे समझने की कोशिश करेगी। यूनिवर्सिटी कैंपस में होने वाले संवाद के दौरान छात्रों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। इससे सरकार को यह जानने में मदद मिल सकती है कि युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा और भविष्य को लेकर किस तरह की चिंताएं हैं।
सरकार की ओर से युवाओं और छात्रों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी भी इन कार्यक्रमों के जरिए दी जा सकती है। खास तौर पर शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी योजनाओं को छात्रों तक पहुंचाने पर जोर रहने की संभावना है।
प्रल्हाद जोशी और मनसुख मांडविया को समन्वय की जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, One Day, One University कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया को दी गई है।
दोनों मंत्री यूनिवर्सिटी की सूची तैयार करने और अलग-अलग विश्वविद्यालयों के लिए केंद्रीय मंत्रियों के दौरे को लेकर समन्वय करेंगे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस मंत्री को किस यूनिवर्सिटी में भेजा जाएगा और कार्यक्रम की शुरुआत किस तारीख से होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 1,300 यूनिवर्सिटीज हैं। इनमें केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के अलावा निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटीज भी शामिल हैं। ऐसे में देशभर में इस तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित करना सरकार के लिए एक बड़ा आउटरीच अभियान साबित हो सकता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि इन मुलाकातों के दौरान छात्रों को मोबाइल कैमरों के इस्तेमाल की स्वतंत्रता दिए जाने की संभावना बताई गई है। इससे कार्यक्रमों की पहुंच सोशल मीडिया पर भी बढ़ सकती है और मंत्री-छात्र संवाद सीधे युवाओं के बीच पहुंच सकता है।
सोशल मीडिया पर भी युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी
One Day, One University कार्यक्रम की चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब सरकार युवा वर्ग के साथ डिजिटल माध्यमों पर भी अपना संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
बैठक में केंद्रीय मंत्रियों की सोशल मीडिया पोस्ट की पहुंच और युवाओं तक सरकार का संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचाने को लेकर भी चर्चा हुई। Gen Z का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर सक्रिय है। ऐसे में सरकार के लिए यूनिवर्सिटी कैंपस के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं से जुड़ना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्रियों के यूनिवर्सिटी दौरे के दौरान होने वाले संवाद, सवाल-जवाब और सरकार की योजनाओं से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंच सकती है। इससे एक कार्यक्रम का प्रभाव केवल संबंधित यूनिवर्सिटी तक सीमित न रहकर देशभर के युवाओं तक पहुंचने की संभावना है।
NEET पेपर लीक और छात्र आंदोलनों के बीच बढ़ा युवाओं पर फोकस
सरकार का यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ समय में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में काफी सक्रियता देखने को मिली है।
20 जुलाई को दिल्ली में Cockroach Janta Party (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद NEET पेपर लीक का मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक चर्चा में आया था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया था। दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दिए जाने और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने की बात कही थी।
इस घटनाक्रम के बाद छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हुई। विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई और NEET से जुड़े मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। संसद के मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में भी NEET-UG पेपर लीक का मुद्दा विपक्ष की प्रमुख मांगों में शामिल रहा।
इसी व्यापक पृष्ठभूमि में सरकार का युवाओं से सीधे संपर्क बढ़ाने पर जोर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीएम मोदी भी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से कर चुके हैं संवाद
युवाओं तक सीधे पहुंचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी हाल के महीनों में सरकार की रणनीति का हिस्सा रहा है। NEET और पेपर लीक से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर युवाओं और Gen Z को संबोधित करते हुए कई वीडियो संदेश जारी किए थे।
अब One Day, One University के जरिए इसी संवाद को यूनिवर्सिटी कैंपस तक ले जाने की कोशिश की जा सकती है। सोशल मीडिया पर संदेश देने के बजाय केंद्रीय मंत्री छात्रों के बीच जाकर सीधे उनकी बात सुनेंगे। इससे सरकार और युवा वर्ग के बीच संवाद को ज्यादा प्रत्यक्ष बनाने का प्रयास होगा।
यह पहल रोजगार, स्किल, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर छात्रों की वास्तविक चिंताओं को समझने का माध्यम भी बन सकती है। सरकार के लिए यह फीडबैक भविष्य की नीतियों और योजनाओं को बेहतर तरीके से युवाओं तक पहुंचाने में उपयोगी हो सकता है।
अभी अंतिम घोषणा का इंतजार
फिलहाल One Day, One University एक प्रस्तावित कार्यक्रम है और इसकी अंतिम रूपरेखा तैयार की जा रही है। किस यूनिवर्सिटी में कौन मंत्री जाएगा, कार्यक्रम कब शुरू होगा और एक दिन में कितने छात्रों से संवाद किया जाएगा, इन सवालों पर आधिकारिक कार्यक्रम का इंतजार है।
अगर योजना अपने प्रस्तावित स्वरूप में लागू होती है तो यह केंद्र सरकार का देशभर के विश्वविद्यालयों में युवाओं से सीधे जुड़ने वाला एक बड़ा अभियान बन सकता है। रोजगार, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की राय सीधे केंद्रीय मंत्रियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, One Day, One University के जरिए सरकार युवाओं तक पहुंच बनाने के साथ-साथ उनकी प्राथमिकताओं और चिंताओं को सीधे समझने की कोशिश करती नजर आ रही है। कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा और विस्तृत शेड्यूल सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इसे देश की यूनिवर्सिटीज में किस स्तर पर लागू किया जाता है।














