उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुई PM Modi Review Meeting में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को और मजबूत किया जाए, ताकि सरकारी योजनाओं और विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को जमीन पर तेजी से और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों को अपने-अपने विभागों से जुड़े राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना चाहिए। इसके लिए क्षेत्रवार और सेक्टर के हिसाब से बैठकें आयोजित करने का सुझाव दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे राज्यों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सीधे समझने और उनके समाधान में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
केंद्र और राज्यों के बीच नियमित बैठक पर जोर
PM Modi Review Meeting में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच नियमित अंतराल पर बैठकें होनी चाहिए। इन बैठकों का उद्देश्य सिर्फ योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि उनके क्रियान्वयन में आ रही वास्तविक दिक्कतों को समझना और उनका समाधान निकालना भी होगा।
प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों को सलाह दी कि वे अपने-अपने मंत्रालय से संबंधित राज्यों के समकक्ष मंत्रियों के साथ सेक्टर-वाइज बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों में किसी एक क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं, परियोजनाओं और नीतियों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है।
इस मॉडल के जरिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संवाद को एक व्यवस्थित रूप देने की कोशिश की जा रही है। इससे राज्यों की जरूरतों और स्थानीय स्तर की चुनौतियों को केंद्र तक पहुंचाने में भी आसानी होगी।
जल शक्ति मंत्रालय की बैठक को बनाया गया मॉडल
केंद्र-राज्य समन्वय के इस मॉडल का उदाहरण हाल ही में जल शक्ति मंत्रालय की बैठक में देखने को मिला। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने 1 और 2 सितंबर को नई दिल्ली में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के साथ विभागीय बैठक आयोजित की थी।
इस बैठक में जल से जुड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स, जल स्रोतों की स्थिरता, ‘जल संचय जन भागीदारी’ और ‘जल जीवन मिशन 2.0’ के क्रियान्वयन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के अंतिम सत्र में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी बातचीत की। इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री ने इसी तरह के मॉडल को दूसरे मंत्रालयों में भी अपनाने की जरूरत बताई है।
सरकार का मानना है कि अगर अलग-अलग मंत्रालय अपने क्षेत्र से जुड़े राज्य मंत्रियों के साथ नियमित बैठकें करते हैं तो केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत और प्रशासनिक तालमेल को बेहतर बनाया जा सकता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय कर सकता है अगला सम्मेलन
सूत्रों के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय केंद्र-राज्य समन्वय को लेकर अगला बड़ा सम्मेलन आयोजित कर सकता है। इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय भी इसी तरह की बैठक आयोजित करने पर विचार कर रहा है।
ऐसी बैठकों में केंद्र सरकार की योजनाओं की प्रगति के साथ-साथ राज्यों की समस्याओं और सुझावों पर भी चर्चा हो सकती है। संबंधित मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की रणनीति तैयार कर सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियां और जरूरतें अलग होती हैं। ऐसे में केवल केंद्र स्तर से दिशा-निर्देश जारी करने के बजाय राज्य सरकारों के साथ सीधे संवाद से योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लागू करने में मदद मिल सकती है।
राज्यों की समस्याओं का सीधे होगा समाधान
PM Modi Review Meeting में दिए गए निर्देशों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को कम करना है। कई बार किसी परियोजना में मंजूरी मिलने के बाद भी जमीन उपलब्ध नहीं होने, फंड जारी होने में देरी, अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की कमी या स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम की गति प्रभावित होती है।
सेक्टर-वाइज बैठकों में केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री इन समस्याओं पर सीधे चर्चा कर सकेंगे। इससे समस्या की पहचान के साथ-साथ उसके समाधान के लिए जिम्मेदारी और समयसीमा तय करने में भी मदद मिल सकती है।
इसके अलावा राज्य सरकारें अपने यहां अपनाए गए सफल मॉडल और अच्छे अनुभव भी साझा कर सकेंगी। अगर कोई व्यवस्था किसी राज्य में बेहतर तरीके से काम कर रही है तो दूसरे राज्य भी उससे सीख लेकर उसे अपने यहां लागू कर सकते हैं।
योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार की कई योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर प्रधानमंत्री का यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
PM Modi Review Meeting में सामने आया यह मॉडल भविष्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पर्यावरण, जल संसाधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है।
नियमित सेक्टर बैठकें होने से केंद्रीय मंत्रालयों को राज्यों से सीधे फीडबैक मिलेगा, जबकि राज्य सरकारों को केंद्र के सामने अपनी प्राथमिकताएं और व्यावहारिक चुनौतियां रखने का अवसर मिलेगा। इससे केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत करने और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर अब केवल योजनाएं बनाने पर नहीं, बल्कि उनके जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत संवाद और समन्वय विकसित करने पर है। आने वाले समय में यदि दूसरे मंत्रालय भी जल शक्ति मंत्रालय के मॉडल को अपनाते हैं, तो विभिन्न क्षेत्रों में केंद्र-राज्य सहयोग का एक अधिक व्यवस्थित तंत्र तैयार हो सकता है।













