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PM Modi 25 Years Journey:’क्लास में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्रों में मेरा नाम था…’, पीएम मोदी ने याद किया सालों पुराना किस्सा

PM Modi 25 Years Journey:उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर अपने 25 साल पूरे होने के मौके पर विकसित भारत संकल्प सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन की यात्रा को याद किया और देशवासियों का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में राजनीतिक सफर के साथ-साथ बचपन और स्कूल के दिनों से जुड़ी कई पुरानी यादें भी साझा कीं।

पीएम मोदी ने बताया कि आज ही के दिन उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उस समय उन्होंने यह कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन वह सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल का सफर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि इस लंबी यात्रा में जनता का विश्वास, सहयोग और आशीर्वाद उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने खास तौर पर वडनगर के स्कूल के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि बचपन में उन्हें सीखने की बहुत ज्यादा ललक थी और वह स्कूल पहुंचने वाले छात्रों में सबसे आगे रहते थे। प्रधानमंत्री के मुताबिक, बचपन में विकसित हुई सीखने की यह आदत आज भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

PM Modi 25 Years Journey में याद किए वडनगर स्कूल के दिन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान वडनगर में बिताए स्कूल के दिनों का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब वह स्कूल में पढ़ते थे, तब उनके शिक्षक अलग-अलग तरीकों से पढ़ाई करवाते थे। इन गतिविधियों और पढ़ाई के तरीकों को लेकर उनमें काफी उत्सुकता रहती थी।

पीएम मोदी ने कहा कि वह उन छात्रों में शामिल थे, जो क्लास में सबसे पहले पहुंचते थे। स्कूल में कुछ नया सीखने और शिक्षकों से नई चीजें जानने की उत्सुकता उन्हें जल्दी स्कूल पहुंचने के लिए प्रेरित करती थी।

उन्होंने अपने बचपन की इस आदत को आज के जीवन से जोड़ते हुए कहा कि सीखने की इच्छा समय के साथ कम नहीं हुई। जिम्मेदारियां बढ़ीं, उम्र बढ़ी और जीवन का दायरा भी बड़ा हुआ, लेकिन कुछ नया सीखने की इच्छा उनके भीतर बनी रही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह आज भी खुद को एक विद्यार्थी ही मानते हैं। उनके मुताबिक, व्यक्ति को जीवन में लगातार सीखते रहना चाहिए और अपनी सीखने की क्षमता को बनाए रखना चाहिए।

आज भी सीखने की ललक को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि हर दिन कुछ नया सीखना उन्हें हमेशा अच्छा लगता रहा है। बचपन में जो जिज्ञासा थी, वह धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व और जीवन का हिस्सा बन गई। यही वजह है कि आज भी वह नई चीजों को समझने और सीखने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि सीखने की शक्ति उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि वह चाहते हैं कि जीवन के हर चरण में उनके भीतर नई चीजें सीखने की क्षमता बनी रहे।

इसी संदर्भ में उन्होंने मंदिर में की गई अपनी प्रार्थना का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने बताया कि सुबह उन्होंने दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में दर्शन किए। वहां उन्होंने देश और 140 करोड़ देशवासियों के लिए प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने लिए भी भगवान से प्रार्थना की कि उन्हें देश की सेवा करने के लिए शक्ति मिले और उनकी सीखने की क्षमता कभी कम न हो।

छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है पीएम मोदी का संदेश

पीएम मोदी का यह संदेश केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहा। उनके स्कूल के दिनों से जुड़ी यह बात छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। पढ़ाई को केवल परीक्षा, नंबर और डिग्री तक सीमित रखने के बजाय लगातार नई चीजें सीखने की आदत विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सकती है।

प्रधानमंत्री इससे पहले भी छात्रों के साथ संवाद के दौरान पढ़ाई को लेकर कई बार अपनी बात रख चुके हैं। परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान भी उन्होंने छात्रों को परीक्षा के दबाव से बाहर निकलकर शिक्षा को व्यापक नजरिए से देखने की सलाह दी थी।

उन्होंने कहा था कि शिक्षा सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए है। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को पढ़ाई के साथ स्किल, आराम और अपनी रुचियों के लिए भी समय निकालने की सलाह दी थी।

पीएम मोदी के मुताबिक, विद्यार्थी जीवन में केवल किताबों से सीखना ही जरूरी नहीं है। आसपास की परिस्थितियों, लोगों, अनुभवों और नई गतिविधियों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

25 साल के सार्वजनिक जीवन को पीएम मोदी ने किया याद

विकसित भारत संकल्प सभा के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने 25 साल के सार्वजनिक जीवन की यात्रा को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर वह देश की सरकार के प्रमुख के तौर पर इतना लंबा सफर तय करेंगे।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शुरू हुई उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची। इस दौरान उन्होंने देशवासियों के सहयोग और विश्वास को अपनी यात्रा का अहम हिस्सा बताया।

प्रधानमंत्री ने इस मौके को व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर देखने के बजाय देश की जनता से जुड़े अनुभवों और जिम्मेदारियों के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे सार्वजनिक जीवन में देश के लोगों से लगातार सीखने का अवसर मिला।

उनके संबोधन में बचपन की यादों से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में वर्तमान जिम्मेदारियों तक की यात्रा का एक अलग पहलू देखने को मिला। वडनगर के स्कूल में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्र से लेकर देश की सरकार का नेतृत्व करने तक का यह सफर उनके लिए सीखने की निरंतर प्रक्रिया से जुड़ा रहा है।

देश के लिए प्रार्थना, खुद के लिए मांगी सीखने की शक्ति

पीएम मोदी ने बताया कि मंदिर में दर्शन के दौरान उन्होंने सबसे पहले देश और देशवासियों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने भारत की प्रगति और लोगों के कल्याण की कामना की।

इसके बाद उन्होंने अपने लिए भी प्रार्थना करते हुए कहा कि उन्हें देश के लिए और बेहतर तरीके से काम करने की शक्ति मिलती रहे। उनके मुताबिक, जिम्मेदारियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सीखने की क्षमता और नई चीजों को समझने की इच्छा बनी रहनी चाहिए।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन उनके 25 साल के सार्वजनिक जीवन की यात्रा के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व के उस पहलू को भी सामने लाता है, जिसमें वह खुद को लगातार सीखने वाला व्यक्ति बताते हैं। वडनगर के स्कूल की पुरानी यादों को साझा करते हुए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और जीवन में आगे बढ़ने के लिए जिज्ञासा बनाए रखना जरूरी है।

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