बिहार के पूर्णिया में Inter Caste Marriage का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जातिवाद और परिवार की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 18 साल की रिया ने अपनी पसंद से दूसरी जाति के मिलन कुमार से शादी कर ली। बेटी के इस फैसले से नाराज परिवार ने उसे सामाजिक रूप से मृत घोषित करते हुए उसका पुतला बनाया, शवयात्रा निकाली और श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं।

रिया के मुताबिक, उसके माता-पिता ने उसकी खुशी और पसंद को समझने के बजाय समाज और जाति को प्राथमिकता दी। अब रिया ने अपने माता-पिता से रिश्ता खत्म करने की बात कही है। उसका कहना है कि पति और ससुराल ही अब उसकी दुनिया हैं। वहीं, पति मिलन कुमार का कहना है कि उन्होंने समाज को देखकर नहीं, बल्कि अपनी खुशी के लिए शादी की है।
8 सितंबर को घर से निकली, 12 सितंबर को कोर्ट में की शादी
पूर्णिया के नगर थाना क्षेत्र की रहने वाली रिया 8 सितंबर को घर से निकली थी। इसके बाद 12 सितंबर को उसने मिलन कुमार के साथ कोर्ट में शादी की। अगले दिन यानी 13 सितंबर को दोनों ने मंदिर में भी विवाह की रस्में पूरी कीं।

शादी के बाद रिया ने अपने माता-पिता को फोन करके बताया कि उसने अपनी मर्जी से शादी कर ली है। बताया जाता है कि रिया ब्राह्मण परिवार से है, जबकि मिलन पासवान समाज से आते हैं। दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम संबंध था।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, दोनों परिवारों के घरों के बीच लगभग दो किलोमीटर की दूरी है और परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते थे। हालांकि, अलग-अलग जातियों से होने के कारण इस रिश्ते को परिवारों की सहमति नहीं मिली।

परिवार की असहमति के बावजूद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया। इसके बाद रिया के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों को बरामद कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।
‘मां-बाप ने मेरी खुशी नहीं देखी’, रिया ने कही ये बात
शादी के बाद रिया ने अपने परिवार के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उसने कहा कि अपने ही माता-पिता की ओर से इस तरह की प्रतिक्रिया मिलना उसके लिए असहनीय था।

रिया के मुताबिक, आज के युवा जब अपने प्यार और शादी की इच्छा परिवार को बताते हैं, तो कई बार उन्हें समझने के बजाय धमकाया जाता है। दूसरी जाति में शादी करने पर हत्या तक की धमकी मिलने की बात भी उसने कही।
रिया ने कहा कि अगर माता-पिता बच्चों से उनकी पसंद के बारे में बातचीत करें, तो शायद उन्हें घर छोड़कर शादी करने जैसा कदम नहीं उठाना पड़े।
उसने अपने परिवार पर समाज और जातिवाद को बेटी की खुशी से ऊपर रखने का आरोप लगाया। रिया ने यह भी कहा कि अब उसका अपने माता-पिता से कोई रिश्ता नहीं है और उसके पति तथा ससुराल वाले ही उसका परिवार हैं।

रिया ने अपनी शादी के फैसले पर कहा कि उसने काफी सोच-विचार के बाद यह कदम उठाया है। उसके मुताबिक, वह अपनी जिंदगी अपनी पसंद से जीना चाहती है।
पति मिलन बोले- समाज हमारा घर नहीं चलाएगा
रिया के पति मिलन कुमार ने भी अंतरजातीय विवाह को लेकर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि दोनों ने समाज की सोच के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी खुशी और आपसी सहमति से शादी की है।

मिलन के मुताबिक, अगर दोनों एक-दूसरे के साथ खुश हैं, तो समाज की राय उनके जीवन का फैसला क्यों करे? उन्होंने कहा कि समाज न तो उन्हें कमाकर खिलाएगा और न ही उनका घर चलाएगा।

मिलन का कहना है कि उनके लिए एक-दूसरे की खुशी और साथ महत्वपूर्ण है। शादी को लेकर दूसरे लोग क्या सोचते हैं, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
गांव के कुछ लोगों ने भी इस जोड़े के फैसले का समर्थन किया। जानकारी के मुताबिक, कुछ लोगों ने रिया और मिलन को डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर देकर उनके सुखद भविष्य की कामना की।
पिता ने पुतला बनाकर निकाली शवयात्रा
बेटी की शादी से नाराज रिया के पिता मनोज कुमार गोस्वामी ने उसे सामाजिक रूप से मृत घोषित करने का फैसला किया। 15 सितंबर को परिवार की ओर से रिया का प्रतीकात्मक पुतला बनाया गया और उसकी तस्वीर के साथ शवयात्रा निकाली गई।
ग्रामीणों के अनुसार, शवयात्रा के दौरान लोगों ने ‘राम नाम सत्य है’ के नारे लगाए। इसके बाद पुतले को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। बताया गया कि पिता ने पुतले को मुखाग्नि दी।
इस घटना में गांव के कई लोगों के शामिल होने की बात सामने आई। परिवार ने इसके बाद श्राद्ध और ब्रह्मभोज का आयोजन भी किया।

17 सितंबर को श्राद्ध संस्कार के दौरान पुरोहितों को बुलाया गया और धार्मिक रस्में निभाई गईं। परिवार के सदस्यों ने मुंडन कराया और पिंडदान समेत अन्य कर्मकांड किए। इसके बाद रिश्तेदारों, परिचितों और स्थानीय लोगों के लिए ब्रह्मभोज आयोजित किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरजातीय विवाह, सामाजिक दबाव और परिवार के भीतर बच्चों की पसंद को स्वीकार करने के मुद्दे पर बहस छेड़ दी।

कोर्ट में रिया ने अपनी मर्जी से साथ रहने की बात कही
पुलिस ने रिया और मिलन को बरामद करने के बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत में रिया का बयान दर्ज किया गया, जिसमें उसने खुद को बालिग बताते हुए मिलन के साथ अपनी इच्छा से रहने की बात कही।

रिया ने स्पष्ट किया कि वह मिलन के साथ जीवन बिताना चाहती है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों को साथ रहने की अनुमति मिली।
परिवार को बेटी का यह फैसला स्वीकार नहीं हुआ। परिजनों की नाराजगी के बीच उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि बालिग युवक-युवतियों की शादी और जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता के सामने जाति और सामाजिक प्रतिष्ठा को कितना महत्व दिया जाना चाहिए।

रिया और मिलन का कहना है कि उन्होंने अपनी खुशी के लिए शादी की है और वे साथ रहना चाहते हैं। वहीं, परिवार की ओर से किए गए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार ने सामाजिक सोच और पारिवारिक रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।















