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Parliament Special Session 2026: संसद का विशेष सत्र इसी महीने बुला सकती है मोदी सरकार, महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर नजर

उमाकांत त्रिपाठी।Parliament Special Session 2026. केंद्र सरकार महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें सामने आई हैं। हालांकि, अक्टूबर में विशेष सत्र बुलाने और सरकार के पास जरूरी बहुमत होने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए Parliament Special Session 2026 को लेकर फिलहाल किसी अंतिम फैसले की घोषणा मानना सही नहीं होगा।

अप्रैल 2026 में सरकार ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने और परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़े तीन विधेयक पेश किए थे। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल थे। संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर सका, जिसके बाद बाकी दोनों विधेयक भी आगे नहीं बढ़ पाए। <Cite refs={[“turn494138search5″,”turn494138search6”]}/>

अप्रैल में क्यों पारित नहीं हो पाया था महिला आरक्षण से जुड़ा बिल?

सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का विशेष सत्र बुलाया था। इस दौरान महिला आरक्षण को लागू करने के तरीके में बदलाव और लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से संबंधित विधेयकों पर चर्चा हुई।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का उद्देश्य लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव करने का था। इसके जरिए महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने का प्रस्ताव था।

हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका। इसके बाद परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी आगे नहीं बढ़े। <Cite refs={[“turn494138search5″,”turn494138search7”]}/>

लोकसभा की सीटें बढ़ाने का क्या है प्रस्ताव?

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें राज्यों से अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 35 सदस्य होने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया।

इसके साथ परिसीमन विधेयक के जरिए लोकसभा और संबंधित विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण के लिए परिसीमन आयोग गठित करने का प्रस्ताव था।

इन बदलावों का उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था। हालांकि, अप्रैल में विधेयक पारित नहीं होने के कारण ये प्रस्ताव लागू नहीं हो सके। <Cite refs={[“turn494138search30″,”turn494138search31″,”turn494138search1”]}/>

महिला आरक्षण लागू करने की कोशिश क्यों अहम?

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान 2023 के 106वें संविधान संशोधन के जरिए किया गया था। इसके लागू होने की व्यवस्था परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया पर निर्भर थी।

अप्रैल 2026 में पेश किए गए नए विधेयकों में इस प्रक्रिया में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा गया था, ताकि महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता तैयार किया जा सके।

हालांकि, परिसीमन के आधार, जनगणना के आंकड़ों और राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के अनुपात को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इसलिए इस विषय पर विधायी प्रक्रिया के साथ-साथ राजनीतिक सहमति भी महत्वपूर्ण है। <Cite refs={[“turn494138search5″,”turn494138search32”]}/>

क्या सरकार के पास दोबारा जरूरी बहुमत है?

संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सामान्य विधेयक की तुलना में अधिक समर्थन की जरूरत होती है। इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित होकर मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों का समर्थन आवश्यक होता है।

इसी वजह से सरकार के लिए केवल अपने गठबंधन के सांसदों का समर्थन पर्याप्त न भी हो सकता है। अन्य दलों का रुख और मतदान के समय सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या भी अहम होगी।

कुछ रिपोर्टों में विपक्षी दलों और छोटे राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाने की कोशिशों का जिक्र किया गया है। लेकिन अक्टूबर में प्रस्तावित विशेष सत्र के लिए सरकार ने जरूरी संख्या जुटा ली है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

विशेष सत्र को लेकर क्या है स्थिति?

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर दोबारा विचार किए जाने की संभावना के बीच विशेष सत्र को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इससे पहले अगस्त में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के लिए 16 से 18 अगस्त तक विशेष सत्र बुलाए जाने की खबरों को खारिज किया था। <Cite refs={[“turn494138search0″,”turn494138search8”]}/>

फिलहाल अक्टूबर में विशेष सत्र की तारीख, विधेयकों को दोबारा पेश करने और आवश्यक बहुमत जुटाने को लेकर आधिकारिक घोषणा की पुष्टि जरूरी है। सरकार की ओर से कोई औपचारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला आरक्षण और परिसीमन के प्रस्तावों पर संसद में आगे कब चर्चा होगी।

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