Casting Couch: खबर इंडिया की।सिनेमा की दुनिया बाहर से जितनी चकाचौंध भरी दिखाई देती है, उसके पीछे संघर्ष और विवादों की कहानियां भी सामने आती रहती हैं। फिल्म इंडस्ट्री में Casting Couch यानी काम या फिल्म में भूमिका दिलाने के बदले अनुचित मांग किए जाने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। आमतौर पर इस विषय पर एक्ट्रेसेस के अनुभव सामने आते हैं, लेकिन क्या मेल एक्टर्स को भी इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है? फिल्ममेकर राहत शाह काजमी ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए हैं।
मेल एक्टर्स के कास्टिंग काउच पर क्या बोले राहत शाह काजमी?
फिल्ममेकर राहत शाह काजमी ने सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज और वहां मौजूद चुनौतियों पर खुलकर बात की। बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या आज के समय में मेल एक्टर्स भी रोल पाने के लिए डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के साथ संबंध बनाते हैं?
इस सवाल के जवाब में राहत शाह काजमी ने कहा, ”हां, बिल्कुल। ये तो सबको पता ही है। इसमें कोई नई बात नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की परिस्थितियों को मेल एक्टर्स का शोषण भी कहा जा सकता है, जबकि कुछ लोग शोहरत पाने के लिए खुद भी ऐसे रास्ते चुनते हैं। हालांकि, ये राहत शाह काजमी की व्यक्तिगत राय है। उनके बयान से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि फिल्म इंडस्ट्री में सभी मेल एक्टर्स इस तरह की परिस्थितियों से गुजरते हैं या ऐसे फैसले अपनी मर्जी से लेते हैं।
‘मुझे कहीं से भी वो विक्टिम नहीं लगते’
बातचीत के दौरान राहत शाह काजमी ने उन कलाकारों के बारे में भी अपनी राय रखी, जो फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाने के लिए प्रभावशाली लोगों के करीब जाने का रास्ता चुनते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे लोग विक्टिम नहीं लगते, क्योंकि उनके मुताबिक वे खुद इस रास्ते को चुनते हैं। राहत शाह काजमी ने इसके साथ ही संघर्ष करके आगे बढ़ने के विकल्प का भी जिक्र किया।
फिल्ममेकर के मुताबिक, अगर किसी कलाकार को इंडस्ट्री में आसानी से एंट्री नहीं मिलती, तो वह खुद सिनेमा बनाने का रास्ता अपना सकता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी मुश्किल रास्ता चुना है, जबकि कुछ लोग डायरेक्टर या प्रोड्यूसर के साथ जुड़कर आगे बढ़ने का विकल्प चुनते हैं।
हालांकि, कास्टिंग काउच जैसे मामलों में सहमति, दबाव और सत्ता के असमान संतुलन को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी कलाकार की महत्वाकांक्षा को अपने आप में शोषण के लिए सहमति नहीं माना जा सकता।
उम्रदराज सुपरस्टार्स के साथ कम उम्र की हीरोइनों की जोड़ी पर भी उठाए सवाल
राहत शाह काजमी से बातचीत के दौरान यह सवाल भी पूछा गया कि फिल्म इंडस्ट्री में बड़े उम्र के हीरो अक्सर कम उम्र की अभिनेत्रियों के साथ नजर आते हैं। आखिर यह चलन कब खत्म होगा?
इस पर फिल्ममेकर ने कहा कि रियलिस्टिक सिनेमा बनाने के मामले में सुपरस्टार्स काफी इनसिक्योर हैं। उनके मुताबिक, बड़े सितारे प्रयोग करने और अपने लुक में बदलाव करने से बचते हैं।
राहत शाह काजमी ने यह भी कहा कि कई बार डायरेक्टर्स अपने बड़े सितारों के सामने खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। ऐसे में फिल्मों में नए तरह के किरदारों, अलग-अलग उम्र के कलाकारों की जोड़ियों और वास्तविक कहानियों को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती।
उनकी इस टिप्पणी ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में स्टारडम, उम्र के अंतर और कलाकारों की छवि को लेकर होने वाली चर्चा को सामने ला दिया है।
फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच का मुद्दा क्यों है अहम?
कास्टिंग काउच का मुद्दा केवल महिला कलाकारों तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। फिल्म इंडस्ट्री में काम पाने की इच्छा रखने वाले पुरुष और महिलाएं, दोनों ही अनुचित मांगों या पेशेवर दबाव का सामना कर सकते हैं।
किसी कलाकार को भूमिका देने के बदले निजी संबंध बनाने का दबाव डालना गंभीर मामला है। वहीं, किसी भी आरोप की सच्चाई का आकलन संबंधित तथ्यों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर किया जाना चाहिए।
राहत शाह काजमी के बयान ने मेल एक्टर्स के अनुभवों और फिल्म इंडस्ट्री में अवसर हासिल करने के तरीकों पर चर्चा को एक बार फिर तेज कर दिया है। साथ ही, उनके विचारों ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या फिल्म जगत में नए कलाकारों को उनकी प्रतिभा के आधार पर अवसर मिलते हैं या स्टारडम और प्रभावशाली संपर्क भी अहम भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल, राहत शाह काजमी के ये बयान फिल्म इंडस्ट्री की कार्यसंस्कृति और बड़े सितारों के प्रभाव को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय के तौर पर देखे जाने चाहिए।














