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Karwa Chauth 2026:करवा चौथ पर 1 घंटे 18 मिनट का मुहूर्त, नोट करें चांद निकलने का समय, आपके आएगा बहुत काम

Karwa Chauth 2026: खबर इंडिया की।करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। हिंदू परंपरा में यह पर्व प्रेम, विश्वास और वैवाहिक रिश्ते की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ के दिन सुबह सर्गी खाने के बाद व्रत शुरू किया जाता है और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा की जाती है।

Karwa Chauth 2026 में यह पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चतुर्थी तिथि, पूजा के शुभ मुहूर्त और चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व रहेगा। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने और पारंपरिक रस्में निभाने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलेंगी। हालांकि, पूजा और चंद्रोदय के समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय जानना जरूरी है।

करवा चौथ 2026 की तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन शाम के समय पूजा की जाती है। दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं विधि-विधान से पूजा करके अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं।

पूजा के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। इसके साथ ही करवा माता की पूजा और करवा चौथ की व्रत कथा सुनने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में बैठकर कथा सुनती हैं और पूजा की थाली के साथ पारंपरिक रस्में निभाती हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि दिल्ली का पूजा मुहूर्त हर शहर के लिए समान नहीं माना जाना चाहिए। स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग की गणना के अनुसार पूजा के समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर का सटीक मुहूर्त जरूर जांच लें।

करवा चौथ पर कब शुरू होगी चतुर्थी तिथि?

करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात करीब 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात करीब 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। चंद्रमा के दर्शन और व्रत की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सर्गी ग्रहण करके व्रत की शुरुआत करती हैं। इसके बाद दिनभर भोजन और पानी से परहेज करने की परंपरा प्रचलित है। हालांकि, व्रत रखने के नियम व्यक्तिगत स्वास्थ्य, पारिवारिक परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

करवा चौथ की तैयारी के लिए महिलाएं एक दिन पहले ही पूजा की सामग्री, करवा, दीपक, रोली, चावल, मिठाई और अन्य जरूरी वस्तुएं तैयार कर सकती हैं। इससे पूजा के समय किसी तरह की परेशानी नहीं होती और सभी रस्में व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सकती हैं।

करवा चौथ 2026 में कब निकलेगा चांद?

करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं रात में चंद्रमा निकलने का इंतजार करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति की लंबी उम्र तथा वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना की जाती है।

दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 को चंद्रोदय रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर होने का अनुमान है। अलग-अलग शहरों में चंद्रमा निकलने का समय भिन्न हो सकता है। उदाहरण के लिए, लखनऊ में चंद्रोदय करीब रात 8 बजकर 6 मिनट और मुंबई में करीब रात 9 बजे बताया गया है।

चंद्रोदय का समय खगोलीय गणना पर आधारित होता है। पहाड़ियों, ऊंची इमारतों, बादलों और मौसम की स्थिति के कारण चंद्रमा वास्तव में दिखाई देने में देरी हो सकती है। इसलिए व्रत खोलने से पहले अपने शहर का चंद्रोदय समय और परिवार में प्रचलित धार्मिक परंपरा ध्यान में रखें।

चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति को देखने की रस्म निभाती हैं। इसके बाद पति के हाथों से पानी ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इस रस्म के तरीके में अंतर हो सकता है।

करवा चौथ पर सर्गी का क्या है महत्व?

करवा चौथ के दिन सर्गी की परंपरा से व्रत की शुरुआत होती है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सर्गी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। महिलाएं सूर्योदय से पहले सर्गी खाती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं।

सर्गी को केवल भोजन तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे परिवार के स्नेह और आशीर्वाद से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, सर्गी देने और ग्रहण करने की परंपरा हर परिवार में एक जैसी नहीं होती।

दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और पूजा की तैयारी करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं। पूजा के दौरान करवा बदलने और अन्य पारंपरिक रस्मों का भी पालन किया जाता है।

करवा चौथ की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?

करवा चौथ के दिन पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखना बेहतर होता है। पूजा में करवा, जल, दीपक, रोली, चावल, फूल, मिठाई और पूजा की थाली जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। सामग्री और पूजा की विधि स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करें। इसके बाद व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा निभाएं। रात में चंद्रमा निकलने पर अर्घ्य दें और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।

व्रत के दौरान अपनी सेहत का भी ध्यान रखना जरूरी है। यदि किसी महिला को कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, वह गर्भवती है या नियमित दवाएं लेती है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी जरूरी है।

करवा चौथ 2026: एक नजर में जरूरी जानकारी

  • व्रत की तारीख: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
  • चतुर्थी तिथि शुरू: 29 अक्टूबर, रात करीब 1:06 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, रात करीब 10:09 बजे
  • दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक
  • दिल्ली में अनुमानित चंद्रोदय: रात करीब 8:17 बजे
  • व्रत की शुरुआत: सूर्योदय से पहले सर्गी ग्रहण करने के बाद
  • व्रत खोलने की परंपरा: चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद

कुल मिलाकर, करवा चौथ पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। वर्ष 2026 में यह व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। पूजा का समय और चंद्र दर्शन के लिए अपने शहर के पंचांग को प्राथमिकता दें, ताकि सभी धार्मिक रस्में सही समय पर पूरी की जा सकें।

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