उमाकांत त्रिपाठी।देश में डिजिटल पेमेंट के बढ़ते दायरे के साथ साइबर ठगी के मामले में भी तेजी से बढ़ रहे हैं. फर्जी बैंक खाते के जरिए आम लोगों की मेहनत की कमाई ठगों तक पहुंच रही है. इस खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार अब बैंकों में एक खास एआई टूल लागू करने पर जोर दे रही है. गृहमंत्री अमित शाह ने सभी बैंकों से म्यूल अकाउंट हंटर यानी MuleHunter.ai को अपनाने की अपील की है. दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि साइबर सुरक्षा अब सिर्फ वित्तीय मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है, उन्होंने बताया कि- दुनिया में होने वाला हर दूसरा डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहा है. ऐसे में बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करना बहुत जरूरी है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि म्यूल अकाउंट हंटर साइबर फ्रॉड से कैसे बचाएगा, जिसे इस्तेमाल करने पर अमित शाह जोर दे रहे हैं.
जानिए- क्या है म्यूल हंटर?
म्यूल हंटर एआई आधारित सॉफ्टवेयर है, जिसे रिजर्व बैंक इनोवेशन हब ने केंद्र सरकार के सहयोग से तैयार किया है. इसका उद्देश्य ऐसे बैंक खातों की पहचान करना है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है. इस टूल की घोषणा दिसंबर 2024 में की गई थी. यह सिस्टम मशीन लर्निंग तकनीकी की मदद से काम करता है. यह बैंक खातों के लेनदेन के पैटर्न को लगातार मॉनिटर करता है और संदिग्ध गतिविधियों को पहचान कर तुरंत फ्लैग कर देता है. दावा किया गया है कि इस टूल की मदद से हर महीने करीब 20 हजार संदिग्ध या फर्जी खातों की पहचान की जा रही है.
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी के पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं. कई बार यह खाते फर्जी डॉक्यूमेंट पर खोले जाते हैं, तो कई मामलों में लोग अनजाने में अपना अकाउंट किराए पर दे देते हैं. दरअसल ठग सीधे अपने खाते में पैसा नहीं मांगते, बल्कि ऐसे खातों के जरिए रकम घूमा कर ट्रैकिंग को मुश्किल बना देते हैं. कई मामलों में लोगों को ज्यादा कमाई या घर बैठे काम का लालच देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता है. बाद में यही खाते साइबर फ्रॉड की कड़ी बन जाते हैं.
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
म्यूल हंटर को बड़े डाटा सेट पर ट्रेन किया गया है. यह खातों की गतिविधियों और ट्रांजैक्शन पैटर्न का विश्लेषण करता है. वहीं यह नॉर्मल खातों और संदिग्ध खातों के व्यवहार में फर्क कर सिस्टम उन संकेतों की पहचान करता है, जो आमतौर पर म्यूल अकाउंट में देखे जाते हैं. जैसे ही कोई सामान्य गतिविधि सामने आती है, बैंक को अलर्ट मिल जाता है ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके.
इसके अलावा सरकार का मानना है कि अगर सभी सार्वजनिक, निजी और सहकारी बैंक के इस टूल को अपनाते हैं, तो म्यूल अकाउंट के बड़े नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है. वहीं इसे लेकर गृहमंत्री ने जानकारी दी कि साइबर फ्रॉड में चोरी हुए हजारों-करोड़ों रुपये में से बड़ी रकम को फ्रिज किया गया है. जांच एजेंसी ने लाखों सिम कार्ड रद्द किए हैं, मोबाइल आईएमईआई ब्लॉक किए गए हैं और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गृहमंत्री ने यह भी बताया कि दिसंबर 2026 तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ढांचे से जोड़ा जाएगा ताकि साइबर अपराध के खिलाफ एकजुट और तेज कार्रवाई हो सके.












