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दो-तिहाई कारें भारत में बना रही.. जापानी पीएम से मिलकर बोले पीएम मोदी, ताकाइची को बहन कहा

उमाकांत त्रिपाठी।भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई दिशा और गति देने के लिए भारत और जापान ने कई बड़े फैसले लिए हैं। भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम के दौरान Narendra Modi ने जापानी कंपनियों की समस्याओं के समाधान के लिए ‘Japan Business Week’ शुरू करने का ऐलान किया। इस पहल के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के वरिष्ठ अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे, जिससे निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

 

फोरम के दौरान भारत और Japan ने अगले 10 वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन जापानी येन के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच 129 समझौता ज्ञापनों (MoUs) की घोषणा की गई, जिनका उद्देश्य निवेश, उद्योग, तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है।

 

भारत-जापान आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर

भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था, तकनीक और उत्पादन क्षमता भी एक-दूसरे की पूरक हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल भारत और जापान के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभदायक साबित होगा।

 

प्रधानमंत्री ने जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi को संबोधित करते हुए उन्हें अपनी “छोटी बहन” बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन व्यवस्था में भारत-जापान साझेदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

‘Japan Business Week’ से निवेशकों की समस्याओं का होगा समाधान

प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों की लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और निवेश संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ‘Japan Business Week’ की शुरुआत की घोषणा की। इस पहल के अंतर्गत पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से जापानी निवेशकों के साथ बैठक करेंगे और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास करेंगे।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। जापानी कंपनियां पहले से ही ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, बुनियादी ढांचे और विनिर्माण क्षेत्रों में भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। अब सरकार की नई पहल से निवेश प्रक्रिया और अधिक सुगम होने की उम्मीद है।

सुजुकी की दो-तिहाई कारें भारत में बन रही हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में बिकने वाली सुजुकी की लगभग दो-तिहाई कारों का निर्माण भारत में हो रहा है और इन्हें 100 से अधिक देशों में निर्यात किया जा रहा है।

 

यह उपलब्धि भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उसकी मजबूत होती स्थिति को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का एक प्रमुख उत्पादन केंद्र बनकर उभर रहा है और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता तथा भारत की उत्पादन क्षमता का संयोजन नई संभावनाएं पैदा करेगा।

फर्टिलाइजर सेक्टर में भी होगा बड़ा सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि जापान के सहयोग से देशभर में लगभग 1000 खाद (फर्टिलाइजर) कारखानों की स्थापना की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को मजबूत करना और किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह योजना निर्धारित समय में लागू होती है तो इससे कृषि उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह पहल भारत के कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

हरियाणा में मारुति सुजुकी के चौथे प्लांट का उद्घाटन

भारत और जापान के बीच बढ़ते औद्योगिक सहयोग का एक और बड़ा उदाहरण हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी के चौथे वाहन निर्माण संयंत्र का उद्घाटन है। प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संयुक्त रूप से इस संयंत्र का उद्घाटन किया।

 

इस नए प्लांट से भारत में वाहन निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही, हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। सरकार का मानना है कि इससे भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

129 समझौते और ₹1.18 लाख करोड़ से अधिक निवेश की घोषणा

भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम के दौरान कुल 129 समझौता ज्ञापनों (MoUs) की घोषणा की गई। इन समझौतों का उद्देश्य निवेश, तकनीक, कौशल विकास, औद्योगिक सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करना है।

इसके अतिरिक्त, भारत में 2 ट्रिलियन जापानी येन यानी लगभग ₹1.18 लाख करोड़ के नए निवेश की घोषणा भी की गई है। यह निवेश भारत की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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