केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस ट्रेड एग्रीमेंट की घोषणा करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार करीब 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाए।
इस समझौते से टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए न्यूजीलैंड में काम करने के कुछ नए अवसर भी खुलेंगे।
भारतीय सामान को मिलेगी 100% ड्यूटी-फ्री एंट्री
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों की सभी टैरिफ लाइन्स पर जीरो इम्पोर्ट ड्यूटी की सुविधा दे रहा है। इसका मतलब है कि भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड में अपने सामान पर पहले लगने वाले आयात शुल्क से राहत मिलेगी।
इससे भारतीय उत्पादों की लागत कम करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर उन कारोबारियों को फायदा हो सकता है, जो अब तक आयात शुल्क के कारण अपने उत्पादों को न्यूजीलैंड में बेचने में कठिनाई महसूस करते थे।
इस व्यवस्था से छोटे और मध्यम उद्योगों, निर्यातकों और श्रम आधारित कारोबारों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, जीरो ड्यूटी का लाभ मिलने के बावजूद उत्पादों को न्यूजीलैंड के गुणवत्ता मानकों, सुरक्षा नियमों और अन्य जरूरी शर्तों का पालन करना होगा।
इन भारतीय सेक्टर्स को होगा फायदा
भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत कई प्रमुख क्षेत्रों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इनमें ऐसे उद्योग शामिल हैं, जिनमें भारत की मजबूत उत्पादन क्षमता और निर्यात की संभावनाएं हैं।
प्रमुख सेक्टर इस प्रकार हैं:
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लेदर और फुटवियर: चमड़े के उत्पादों और जूतों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
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अपैरल और टेक्सटाइल: कपड़े और रेडीमेड गारमेंट्स बनाने वाली कंपनियों को नए अवसर मिल सकते हैं।
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फल और सब्जियां: पात्र कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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कॉफी, चाय, कोको और मसाले: इन उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है।
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फार्मास्यूटिकल्स: भारतीय दवा कंपनियों के लिए कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं।
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इंजीनियरिंग गुड्स: मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों के निर्यात को मदद मिल सकती है।
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मरीन प्रोडक्ट्स: समुद्री उत्पादों के कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
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प्लास्टिक और रबर: इन क्षेत्रों के निर्यातकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
इन क्षेत्रों में कारोबार बढ़ने से उत्पादन, रोजगार और विदेशी बाजारों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी को मजबूती मिल सकती है।
न्यूजीलैंड अगले 15 साल में भारत में करेगा 20 अरब डॉलर के निवेश की सुविधा
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर यानी करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये के निवेश को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस निवेश से भारत में विनिर्माण, कृषि, तकनीक, बुनियादी ढांचे और अन्य कारोबारों में अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी निवेशकों के साथ साझेदारी करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई तकनीक अपनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 20 अरब डॉलर का आंकड़ा निवेश की प्रतिबद्धता से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी राशि तत्काल भारत में आ जाएगी। वास्तविक निवेश की मात्रा और समय संबंधित परियोजनाओं, कारोबारी फैसलों और निवेश योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
डेयरी और कई संवेदनशील कृषि उत्पाद समझौते से बाहर
भारत ने घरेलू किसानों और उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील उत्पादों को व्यापारिक रियायतों से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद और कुछ प्रमुख कृषि वस्तुएं शामिल हैं।
प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:
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दूध, क्रीम, दही, पनीर और व्हे जैसे डेयरी उत्पाद।
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भेड़ के मांस को छोड़कर कई अन्य पशु उत्पाद।
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प्याज, चना, मटर, मक्का और बादाम जैसे कृषि उत्पाद।
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चीनी और कृत्रिम शहद।
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पशु, वनस्पति और माइक्रोबियल फैट तथा ऑयल।
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हथियार और गोला-बारूद।
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कुछ जेम्स एंड ज्वेलरी उत्पाद।
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कॉपर और एल्युमीनियम की कुछ श्रेणियां।
इन उत्पादों को बाहर रखने का उद्देश्य घरेलू बाजार पर संभावित दबाव को कम करना और भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करना है। इससे साफ है कि समझौते में निर्यात बढ़ाने के साथ घरेलू संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने पर भी ध्यान दिया गया है।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए वीजा और रोजगार के नए अवसर
भारत-न्यूजीलैंड FTA में केवल सामान के व्यापार पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि सेवा क्षेत्र और पेशेवरों की आवाजाही को भी शामिल किया गया है। न्यूजीलैंड ने भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए 118 सर्विस सेक्टर और सब-सेक्टर में बाजार पहुंच से जुड़े अवसर देने की व्यवस्था की है।
इनमें आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज, टेलीकम्युनिकेशन, कंस्ट्रक्शन, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज और टूरिज्म जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
समझौते के तहत अलग-अलग श्रेणियों के पेशेवरों के लिए कुछ व्यवस्थाएं की गई हैं:
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इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफर: एक ही कंपनी के भीतर ट्रांसफर होने वाले पात्र कर्मचारी तय शर्तों के तहत तीन साल तक रह सकेंगे।
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बिजनेस विजिटर्स और सर्विस वर्कर्स: उपकरण लगाने या उनकी सर्विसिंग जैसे कामों के लिए पात्र कर्मचारी निर्धारित अवधि तक न्यूजीलैंड में रह सकेंगे।
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कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस प्रोवाइडर्स: पात्र पेशेवरों को अनुबंध के आधार पर अस्थायी रूप से काम करने के अवसर मिल सकते हैं।
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टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट वीजा: कुशल भारतीयों के लिए 5,000 वीजा का विशेष कोटा तय किया गया है।
इस व्यवस्था के तहत आईटी, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन, शिक्षा और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों के साथ योग प्रशिक्षक, शेफ, संगीत शिक्षक और आयुष प्रैक्टिशनर्स जैसे पेशों को भी शामिल किया गया है। इन अवसरों का लाभ पात्रता, वीजा नियमों और निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करेगा।
सेब, कीवी और शहद के आयात पर रहेंगी विशेष शर्तें
न्यूजीलैंड के कुछ कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश देने के लिए विशेष प्रावधान रखे गए हैं। इनमें सेब, कीवी, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसे उत्पाद शामिल हैं।
इन उत्पादों के लिए टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ, न्यूनतम आयात मूल्य और सेफगार्ड उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य आयात को नियंत्रित तरीके से बढ़ाना और घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करना है।
क्या होता है टैरिफ रेट कोटा (TRQ)?
TRQ ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत किसी उत्पाद की एक निश्चित मात्रा तक आयात पर कम या शून्य शुल्क लगाया जा सकता है। निर्धारित मात्रा से अधिक आयात होने पर सामान्य या ज्यादा शुल्क लागू हो सकता है।
इस व्यवस्था से विदेशी उत्पादों को भारतीय बाजार में सीमित पहुंच मिलती है, जबकि घरेलू उत्पादकों को अचानक बढ़ने वाले आयात के प्रभाव से बचाने की कोशिश की जाती है।
समझौते में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए साझेदारी भी शामिल है। इसके तहत कीवी, सेब और शहद जैसे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन में सुधार के लिए काम किया जाएगा।
कस्टम क्लीयरेंस और कागजी प्रक्रिया होगी आसान
समझौते में व्यापार प्रक्रिया को तेज करने के लिए कस्टम क्लीयरेंस और डिजिटल प्रमाणन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं।
प्रावधानों के अनुसार, सामान्य कार्गो के लिए 48 घंटे और एक्सप्रेस या जल्दी खराब होने वाले सामान के लिए 24 घंटे के भीतर कस्टम क्लीयरेंस का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल सर्टिफिकेशन और रूल्स ऑफ ओरिजिन के सेल्फ-सर्टिफिकेशन से कागजी कार्रवाई और नियमों का पालन करने में लगने वाली लागत कम हो सकती है। इससे निर्यातकों को समय पर माल भेजने और कारोबार की प्रक्रिया आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, वास्तविक क्लीयरेंस का समय दस्तावेजों की पूर्णता, सीमा शुल्क जांच और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
भारत और न्यूजीलैंड का लक्ष्य 2030 तक आपसी व्यापार को करीब 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों के बीच वस्तुओं के व्यापार के साथ सेवाओं, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने से भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में विस्तार करने का अवसर मिलेगा। वहीं, भारत को निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
लेकिन इस समझौते की सफलता केवल आयात शुल्क खत्म होने पर निर्भर नहीं करेगी। भारतीय कंपनियों को उत्पादों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी कीमतों, बाजार की मांग और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी ध्यान देना होगा। इसी तरह, घरेलू किसानों और संवेदनशील उद्योगों पर आयात के प्रभाव को भी देखना होगा।
भारत-न्यूजीलैंड FTA क्यों है अहम?
भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खोलने, कारोबार की लागत कम करने और निवेश सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे टेक्सटाइल, लेदर, फार्मा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
समझौते में घरेलू किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील उत्पादों को रियायतों से बाहर रखा गया है। वहीं, सेवा क्षेत्र और कुशल पेशेवरों के लिए नए अवसरों की व्यवस्था भी की गई है।
कुल मिलाकर, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की क्षमता रखता है। हालांकि, 20 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता और 2030 तक व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य कितना हासिल होता है, यह आने वाले वर्षों में समझौते के क्रियान्वयन और कारोबारियों की भागीदारी से तय होगा।














