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PM Modi New Zealand Visit: 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक दौरा, FTA समझौते पर होगी बड़ी बातचीत

PM Modi New Zealand Visit :उमाकांत त्रिपाठी।भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंच चुके हैं। लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा है। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था। ऐसे में इस यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की सफल यात्राओं के बाद हो रहा है। न्यूजीलैंड पहुंचने पर भारतीय समुदाय और स्थानीय प्रशासन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय वार्ता, मुक्त व्यापार समझौता (FTA), व्यापारिक कार्यक्रम, खेल आयोजन और भारतीय समुदाय को संबोधित करना प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हैं।

40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक है। पिछले चार दशकों में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड पहुंचा है। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना है।

 

यात्रा की शुरुआत न्यूजीलैंड सरकार के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक से होगी। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे। सबसे अहम विषय Free Trade Agreement (FTA) को अंतिम रूप देना माना जा रहा है। यदि यह समझौता होता है तो भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

 

FTA समझौते पर रहेगी दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा FTA समझौता है। लंबे समय से दोनों देश इस समझौते पर चर्चा कर रहे हैं।

FTA लागू होने के बाद कृषि, डेयरी, आईटी, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और सेवा क्षेत्र में व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। इससे भारतीय निर्यातकों को भी बड़ा फायदा मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक साबित होगा।

 

इसके अलावा रक्षा सहयोग, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है।

ऑकलैंड में 40 हजार भारतीयों को करेंगे संबोधित

PM Modi New Zealand Visit का सबसे बड़ा आकर्षण ऑकलैंड में आयोजित होने वाला भारतीय समुदाय का कार्यक्रम होगा। यहां लगभग 40 हजार भारतीय मूल के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

 

प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए भारतीय समुदाय ने ‘किया ओरा मोदी’ कार्यक्रम का आयोजन किया है। न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह कार्यक्रम बेहद खास माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने संबोधन में भारत की वैश्विक भूमिका, प्रवासी भारतीयों के योगदान और भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को लेकर अपने विचार साझा करेंगे।

 

भारतीय समुदाय की बड़ी भागीदारी इस बात का संकेत है कि न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

ऑस्ट्रेलिया दौरे में भी हुई बड़ी घोषणा

न्यूजीलैंड रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा पूरा किया। अपने दौरे के अंतिम दिन उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) का दौरा किया।

 

इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक महत्वपूर्ण खेल संबंधी घोषणा की। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित टी-20 लीग Big Bash League (BBL) का उद्घाटन मुकाबला पहली बार भारत में आयोजित किया जाएगा।

 

यह मैच 12 दिसंबर को चेन्नई के ऐतिहासिक चेपॉक स्टेडियम में खेला जाएगा। यह पहली बार होगा जब किसी विदेशी क्रिकेट लीग का आधिकारिक मुकाबला भारत में आयोजित होगा। इस घोषणा को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेल सहयोग का नया अध्याय माना जा रहा है।

MCG में प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे।

भारत की वैश्विक कूटनीति को मिलेगी मजबूती

प्रधानमंत्री मोदी का यह छह दिवसीय विदेश दौरा भारत की सक्रिय वैश्विक कूटनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अब न्यूजीलैंड के दौरे के जरिए भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूजीलैंड के साथ FTA, व्यापारिक सहयोग, शिक्षा, कृषि और तकनीकी साझेदारी दोनों देशों के लिए नए अवसर लेकर आएगी। वहीं प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत करेगा।

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