उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आर्थिक नीतियों और पिछले एक दशक में हुए सुधारों का जिक्र करते हुए PLI Scheme को देश की बदलती आर्थिक सोच का अहम उदाहरण बताया। इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब उस दौर से बाहर निकल चुका है, जब ज्यादा उत्पादन करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहित करने के बजाय नीतियों के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने पुराने सिस्टम को ‘Production-Linked Punishment’ यानी प्रोडक्शन-लिंक्ड पनिशमेंट बताया और कहा कि आज PLI में ‘I’ का अर्थ Incentive यानी प्रोत्साहन है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब ऐसी नीतियों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिनका मकसद उत्पादन बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, रोजगार पैदा करना और देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है। उन्होंने साफ किया कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए सुधारों की रफ्तार आने वाले समय में और तेज की जाएगी।
PLI Scheme से बदली उत्पादन को लेकर सरकार की सोच
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में PLI Scheme और पुराने आर्थिक मॉडल के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि पहले की व्यवस्था में उत्पादन बढ़ाने के बजाय कई बार ऐसी परिस्थितियां पैदा होती थीं, जिनमें कंपनियों को ज्यादा उत्पादन करने में परेशानी होती थी। उन्होंने इसे ‘Production-Linked Punishment’ की सोच बताया।
पीएम मोदी के मुताबिक उस दौर की नीतियों के पीछे ऐसी सोच काम कर रही थी, जिसमें जरूरी चीजों की कमी बनी रहना और लोगों की निर्भरता को बनाए रखना एक तरह से व्यवस्था का हिस्सा बन गया था। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जो नागरिकों और कारोबारियों को अवसर दें, न कि उन्हें लगातार किसी व्यवस्था पर निर्भर रहने के लिए मजबूर करें।
इसके उलट PLI Scheme के जरिए सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन देने का रास्ता चुना। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इस नीति से बड़े निवेश को आकर्षित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और निर्यात को बढ़ाने में मदद मिली है।
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का उद्देश्य केवल सुर्खियां बटोरना या चुनाव से पहले घोषणाएं करना नहीं है। सरकार ऐसी योजनाओं और सुधारों पर जोर दे रही है, जिनका वास्तविक असर अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई दे।
‘नीतियां देश के हिसाब से बननी चाहिए, देश नीतियों के हिसाब से नहीं’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी देश की नीतियां वहां के लोगों और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिसमें सरकार लोगों की समस्याओं को समझकर समाधान तैयार करे।
उन्होंने कहा कि आज सरकार का फोकस आर्थिक विकास के साथ-साथ Ease of Living और Ease of Doing Business को बेहतर बनाने पर भी है। पुराने और अनावश्यक कानूनों तथा नियमों को हटाने की दिशा में भी काम किया गया है।
प्रधानमंत्री ने डीरेगुलेशन और सुधारों का उदाहरण देते हुए कहा कि इसका असर ड्रोन, जियो-स्पेशियल मैपिंग, डिफेंस प्रोडक्शन और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। सरकार का प्रयास ऐसे क्षेत्रों में संभावनाओं को खोलना है, जहां पहले कई तरह की नियामकीय बाधाएं मौजूद थीं।
मुफ्त बिजली के बजाय रूफटॉप सोलर का उदाहरण
पीएम मोदी ने नीतियों में बदलाव का उदाहरण देते हुए रूफटॉप सोलर योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुफ्त बिजली देने का वादा करने के बजाय NDA सरकार ने ऐसा मॉडल चुना, जिसमें लोगों को बिजली पैदा करने और जरूरत से ज्यादा बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई करने का अवसर मिलता है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक ऐसी नीतियां केवल तत्काल राहत देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम करती हैं। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें विकास का लाभ आम नागरिक तक पहुंचे और लोगों को नई आर्थिक संभावनाओं से जोड़ा जा सके।
यह दृष्टिकोण PLI Scheme की सोच से भी जुड़ता है, जिसमें उत्पादन और क्षमता बढ़ाने को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जाता है। सरकार का तर्क है कि जब उत्पादन बढ़ेगा तो निवेश, रोजगार और निर्यात के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रेलवे और मेट्रो का उदाहरण देकर बताया- बदला है भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने शासन व्यवस्था में सुधार का उदाहरण देते हुए रेलवे सुरक्षा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग खत्म करने और इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाने जैसे कदमों के कारण रेल हादसों की संख्या में बड़ी कमी आई है।
पीएम मोदी ने दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल और दिल्ली मेट्रो की समय की पाबंदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की बेहतर समयबद्धता केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सोच में आए बदलाव का संकेत है।
उन्होंने कहा कि पहले किसी काम में देरी होने पर लोग मजाक में उसे ‘इंडियन टाइम’ से जोड़ते थे। लेकिन अब भारत में कई सार्वजनिक परिवहन सेवाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंच रही हैं। उनके मुताबिक यह बदलाव उस नए भारत की तस्वीर पेश करता है, जहां लोगों के समय को भी उतनी ही अहमियत दी जा रही है जितनी अन्य संसाधनों को।
DigiYatra, FASTag और UPI से Ease of Living में बदलाव
पीएम मोदी ने आम लोगों की जिंदगी में टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल को भी भारत के बदलाव का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने DigiYatra, FASTag, UPI पेमेंट और ऑनलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में Ease of Living को बेहतर बनाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। इन बदलावों का असर खासतौर पर मिडिल क्लास की जिंदगी में दिखाई देता है।
उनका कहना था कि कई ऐसे बदलाव हुए हैं, जो विकसित देशों में भी अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। डिजिटल सेवाओं ने सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के साथ-साथ समय की बचत भी की है।
‘विकसित भारत’ के लिए सुधारों की रफ्तार और तेज होगी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार युवाओं, महिलाओं, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के हितों के लिए काम करती रहेगी।
प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया भारत को एक ‘ब्राइट स्पॉट’ यानी उम्मीद की किरण के रूप में देख रही है। उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता और गरीबी कम करने की दिशा में हुए प्रयासों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि एक विकसित और स्थिर भारत वैश्विक स्तर पर भी स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके मुताबिक अगर भारत का भविष्य सुरक्षित और मजबूत होता है, तो इसका सकारात्मक असर दुनिया के भविष्य पर भी पड़ेगा।
आत्मनिर्भर भारत पर विपक्ष को PM मोदी का जवाब
प्रधानमंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की आलोचना को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलग होना नहीं है, बल्कि भारत की उत्पादन क्षमता, तकनीकी क्षमता और आर्थिक ताकत को मजबूत करना है।
PLI Scheme इसी व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है, जिसके माध्यम से सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने पर जोर दे रही है।
पीएम मोदी के मुताबिक भारत अब ऐसी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां उत्पादन, निवेश, तकनीक और रोजगार के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा रहा है।
सत्यन गजवानी ने भी नेतृत्व की स्थिरता का किया जिक्र
कार्यक्रम में टाइम्स इंटरनेट के चेयरमैन सत्यन गजवानी ने भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की स्थिरता को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व किसी देश में एकता, सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना मजबूत कर सकता है।
उन्होंने युवाओं के सपनों, उद्यमियों के साहस, किसानों की हिम्मत और देश के भविष्य को मजबूत नेतृत्व से जोड़ते हुए कहा कि स्थिरता किसी भी देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन PLI Scheme, आर्थिक सुधार, Ease of Living, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। पीएम मोदी ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में सरकार का जोर केवल योजनाओं की घोषणा पर नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां लागू करने पर रहेगा, जिनसे उत्पादन, रोजगार, निवेश और आम नागरिकों की सुविधा में वास्तविक सुधार हो।














