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PM Modi on Mohan Bhagwat Speech: PM मोदी ने की मोहन भागवत के संबोधन की तारीफ, पंच परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण पर दिया जोर

उमाकांत त्रिपाठी। PM Modi on Mohan Bhagwat Speech प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की तारीफ की है। नागपुर में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित विजयादशमी उत्सव में मोहन भागवत ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक एकता, भारत की प्रगति और दुनिया में बदलते हालात समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री ने उनके संबोधन को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।


PM Modi on Mohan Bhagwat Speech को लेकर सामने आई प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री ने समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि ये मूल्य RSS के स्वयंसेवकों के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पीएम मोदी ने मोहन भागवत के पंच परिवर्तन संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिल सकती है।

मोहन भागवत के संबोधन पर पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन की सराहना करते हुए राष्ट्रीय प्रगति और सामाजिक एकता से जुड़े विचारों को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता किसी भी सामाजिक प्रयास के अहम आधार हैं।

पीएम मोदी ने पंच परिवर्तन पर भी विशेष रूप से ध्यान दिलाया। RSS के संदर्भ में पंच परिवर्तन का विचार सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने से जुड़ा है। इसमें सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्यों जैसे विषय शामिल हैं।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई, जब RSS अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के तहत संगठन की विचारधारा, सामाजिक भूमिका और भविष्य की प्राथमिकताओं पर चर्चा कर रहा है।

मोहन भागवत बोले- दुनिया में व्यवस्था बदलने की कोशिशें जारी

नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम से ऐसी आंधी चली है, जो व्यवस्थाओं, सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय संस्कारों को नुकसान पहुंचाना चाहती है।

अपने संबोधन में उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपने स्वार्थ पूरे करने और अपने समर्थकों को प्रभावी बनाने के लिए कई तरह की गतिविधियां होती हैं।

मोहन भागवत ने ‘रिजीम चेंज’ यानी किसी देश की सत्ता या शासन व्यवस्था में बदलाव के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल शासन बदलने से परिस्थितियां अपने आप नहीं बदल जातीं। उन्होंने भारत की मजबूती को ऐसी गतिविधियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

ये टिप्पणियां अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम को लेकर मोहन भागवत का आकलन थीं। अलग-अलग देशों में राजनीतिक बदलावों के कारण और परिस्थितियां एक-दूसरे से अलग हो सकती हैं।

भारत की नई पीढ़ी और मजबूत नेतृत्व का किया जिक्र

RSS प्रमुख ने कहा कि पिछले दशकों में भारत ने दृढ़ नीतियों के साथ काम किया है और मजबूत नेतृत्व ने देश को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, इसका असर नई पीढ़ी की सोच पर भी दिखाई देता है और युवाओं में देश के लिए कुछ करने तथा वैश्विक जिम्मेदारियां निभाने की भावना बढ़ी है।

मोहन भागवत ने कहा कि समाज के प्रयासों के कारण उन ताकतों के मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिनका उद्देश्य भारत को कमजोर करना है। उन्होंने भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने के कथित प्रयासों का उल्लेख करते हुए इसे ‘डिस्मैंटलिंग’ की संज्ञा दी।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वार्थ से प्रेरित सत्ता और विवेकहीन फैसलों के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेताओं से ऐसी ताकतों को मदद मिल सकती है। ये विचार उनके संबोधन का हिस्सा थे, जिनमें उन्होंने राष्ट्रीय एकता और देश की मजबूती पर जोर दिया।

आंदोलनों का उद्देश्य समाधान होना चाहिए: मोहन भागवत

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने देश में होने वाले आंदोलनों और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत अभी विकास की प्रक्रिया में है और देश का पूर्ण विकास होना बाकी है। ऐसे में समस्याओं का बने रहना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि समस्याएं होंगी तो आंदोलन भी होंगे और लोकतंत्र में आंदोलनों की भूमिका होती है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

मोहन भागवत के मुताबिक, आंदोलन करने वाले समूहों, शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाने वाले शासन-प्रशासन तथा राजनीतिक नेताओं को समस्या के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध के साथ-साथ संवाद और समाधान भी जरूरी हैं।

पंच परिवर्तन के जरिए सामाजिक बदलाव पर जोर

मोहन भागवत के संबोधन और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया में सामाजिक बदलाव का विषय भी महत्वपूर्ण रहा। पंच परिवर्तन की अवधारणा के माध्यम से सामाजिक समरसता, परिवारों में सकारात्मक मूल्यों, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, स्वदेशी उत्पादों और नागरिक कर्तव्यों को बढ़ावा देने की बात की जाती है।

प्रधानमंत्री ने इन विचारों को सकारात्मक सामाजिक बदलाव से जोड़ते हुए संबोधन की तारीफ की। वहीं, मोहन भागवत ने अपने भाषण में भारत की राष्ट्रीय शक्ति, सांस्कृतिक पहचान, लोकतंत्र और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।

RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान दिया गया यह संबोधन संगठन की प्राथमिकताओं और देश की मौजूदा परिस्थितियों को लेकर उसके दृष्टिकोण को सामने रखता है। प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया से भी राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों के महत्व को रेखांकित किया गया।

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