उमाकांत त्रिपाठी। महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण को लेकर देश में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि आज देश की 3 करोड़ से ज्यादा महिलाएं अपने घर की मालिक बन चुकी हैं। उन्होंने इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पहले आम तौर पर परिवार में आर्थिक फैसलों के दौरान महिलाओं को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “पिता और बेटा व्यापार की बात करते हैं और अगर मां आ जाए तो कहा जाता है कि आप जाइए।” लेकिन अब स्थिति बदल रही है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, तो परिवार में उनकी भागीदारी और सम्मान भी बढ़ा है।
अपने खास अंदाज में उन्होंने कहा, “मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन जानता सब हूं,” जिससे उन्होंने महिलाओं के जीवन और उनकी भूमिका की गहरी समझ को जाहिर किया।
महिला आरक्षण बिल पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की जरूरत दशकों से महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर करीब 40 साल से चर्चा चल रही है और इसमें सभी राजनीतिक दलों और कई पीढ़ियों का योगदान रहा है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2023 में जब “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित हुआ था, तब सभी दलों ने एकमत होकर इसका समर्थन किया था। साथ ही यह लक्ष्य भी रखा गया था कि इसे 2029 तक हर हाल में लागू किया जाए।
प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने सांसदों से मिलें, अपनी अपेक्षाएं और सुझाव साझा करें। उन्होंने कहा कि जब सांसद सदन के लिए निकलें, तो उन्हें आशीर्वाद देकर विदा करें, ताकि वे महिलाओं के हित में सही निर्णय ले सकें।
इस बीच, सरकार “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में दो बड़े संशोधन करने की तैयारी में है। इनमें एक अलग परिसीमन विधेयक शामिल है, जिसके जरिए महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। इन संशोधनों को लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।
मौजूदा जानकारी के अनुसार, इस बिल में OBC आरक्षण को शामिल नहीं किया गया है, जबकि SC/ST वर्ग के लिए आरक्षण पहले की तरह जारी रहेगा।
फिलहाल, महिला आरक्षण और उससे जुड़े संशोधनों को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ऐतिहासिक कदम भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को किस तरह नई दिशा देता है।













