उमाकांत त्रिपाठी।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता से राजनीति में आए C. Joseph Vijay करीब 100 दिन पहले मिली ऐतिहासिक चुनावी जीत के बाद पहली बार एक बड़े राष्ट्रीय मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ नजर आए। महाबलीपुरम में आयोजित Southern Zonal Council Meeting में दक्षिण भारत के कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे। 20 अगस्त 2026 को हुई इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के उपाध्यक्ष के तौर पर भाग लिया।
इस Southern Zonal Council Meeting में केवल राजनीतिक मुद्दे ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय जल विवाद, नदी जोड़ने की संभावनाएं, बुनियादी ढांचा, क्षेत्रीय सुरक्षा और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना की ओर से उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्का समेत कई नेता मौजूद रहे।
अमित शाह ने पानी के विवाद जल्द सुलझाने पर दिया जोर
Southern Zonal Council Meeting की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में दक्षिण भारत के लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद रहे। कावेरी, कृष्णा, मेकेदातु और मुल्लईपेरियार जैसे मामलों को लेकर राज्यों के बीच वर्षों से मतभेद रहे हैं। ऐसे में अमित शाह ने राज्यों के बीच बातचीत और आपसी सहमति के जरिए लंबित जल संबंधी विवादों को तेजी से सुलझाने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान नदी जल प्रबंधन को लेकर व्यापक सहयोग की जरूरत पर भी चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक अमित शाह ने ब्रह्मपुत्र, गोदावरी और कावेरी जैसी प्रमुख नदियों को जोड़ने की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लंबे समय तक देश की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। यह विचार देश में नदी जोड़ो परियोजनाओं को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर सामने लाता है।
हालांकि नदी जोड़ना केवल इंजीनियरिंग का विषय नहीं है। इसके साथ राज्यों के अधिकार, पर्यावरणीय प्रभाव, विस्थापन, नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पड़ोसी देशों से जुड़े पहलुओं पर भी गंभीर विचार की आवश्यकता होगी। इसलिए Southern Zonal Council Meeting में इस तरह के मुद्दे पर राज्यों के बीच संवाद को अहम माना गया।
चंद्रबाबू नायडू ने उठाया नदी जोड़ने का मुद्दा
बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी नदी जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने गोदावरी-कावेरी से जुड़े नदी जोड़ो प्रस्ताव का मुद्दा उठाया। आंध्र प्रदेश लंबे समय से अतिरिक्त जल को दूसरे नदी बेसिनों तक पहुंचाने वाली परियोजनाओं को लेकर अपनी मांग रखता रहा है।
नदी जल को लेकर दक्षिणी राज्यों के हित कई बार एक-दूसरे से टकराते भी हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा नदी के पानी का सवाल महत्वपूर्ण है, जबकि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय रहा है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना का मुद्दा उठाया। कर्नाटक का तर्क है कि प्रस्तावित परियोजना से जल प्रबंधन में मदद मिलेगी और इसका लाभ तमिलनाडु तथा पुडुचेरी को भी मिल सकता है। दूसरी ओर तमिलनाडु लंबे समय से इस परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां जाहिर करता रहा है।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने मुल्लईपेरियार बांध से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने नए बांध के निर्माण की स्थिति में तमिलनाडु को उसके हिस्से का पानी उपलब्ध कराने की बात कही और निर्माण की लागत केरल द्वारा उठाने का प्रस्ताव रखा।
Delimitation पर भी राज्यों की अलग-अलग चिंता
Southern Zonal Council Meeting में पानी के अलावा लोकसभा सीटों के परिसीमन यानी Delimitation का मुद्दा भी चर्चा में रहा। दक्षिणी राज्यों की एक बड़ी चिंता यह है कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से उन राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखने का सुझाव दिया। उनके प्रस्ताव में 1971 की जनगणना को आधार मानने और मौजूदा सीटों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की बात भी शामिल थी।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत अलग और संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने केंद्र से स्पष्ट कानूनी सुरक्षा की मांग की कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण किसी राज्य का संसद में प्रतिनिधित्व प्रतिशत कम न हो। विजय का तर्क रहा कि संवैधानिक संघवाद और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
यानी दक्षिणी राज्यों के सामने सवाल केवल सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि भविष्य में संसद में उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी का भी है। यही वजह है कि Delimitation आने वाले समय में केंद्र और राज्यों के बीच एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
CM Vijay का बदला हुआ रुख क्यों अहम?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के लिए यह बैठक राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही। मई 2026 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर दक्षिणी राज्यों के अन्य मुख्यमंत्रियों और केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके महत्वपूर्ण संवादों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मई में विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी थी।
विजय पहले परिसीमन को लेकर मौजूदा लोकसभा सीटों को बनाए रखने की मांग से जुड़े रुख के करीब दिखाई देते थे। लेकिन Southern Zonal Council Meeting में उन्होंने राज्य के संसद प्रतिनिधित्व के प्रतिशत को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। इसे अधिक व्यावहारिक और संवैधानिक सुरक्षा पर आधारित रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
उनके बयान में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व, संघीय संतुलन और राज्यों के भरोसे को बनाए रखने की चिंता प्रमुख रही। ऐसे में विजय की राजनीति में अब केवल तमिलनाडु के मुद्दे ही नहीं, बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़े राष्ट्रीय विषय भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
बैठक में सहकारी संघवाद पर रहा फोकस
Southern Zonal Council Meeting का मूल उद्देश्य ही राज्यों और केंद्र के बीच संवाद के जरिए साझा समस्याओं का समाधान तलाशना है। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के अलावा पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप भी शामिल हैं।
बैठक में स्वास्थ्य, फंडिंग, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराज्यीय समन्वय जैसे मुद्दों पर भी विचार हुआ। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बैठक में शामिल नेताओं ने सहकारी संघवाद को मजबूत करने और साझा क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करने पर जोर दिया।
कुल मिलाकर महाबलीपुरम की यह बैठक दक्षिण भारत की राजनीति के लिहाज से कई संकेत छोड़ गई। एक तरफ पानी के पुराने विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश दिखी, तो दूसरी तरफ नदी जोड़ो परियोजनाओं ने नई बहस को जन्म दिया। वहीं Delimitation के मुद्दे ने केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व के सवाल को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के लिए भी यह मंच खास रहा, जहां उन्होंने पहली बार दक्षिणी राज्यों के शीर्ष नेताओं के साथ मिलकर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। आने वाले समय में नदी जल विवाद, परिसीमन और राज्यों के वित्तीय हिस्से जैसे मुद्दों पर केंद्र के साथ दक्षिणी राज्यों की बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।














