Gold Silver Price Today: खबर इंडिया की।फेस्टिव सीजन में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। Gold Silver Price Today के मुताबिक, घरेलू सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी का भाव 9,134 रुपए गिरकर 1.81 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले गुरुवार को चांदी 1.90 लाख रुपए प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी।
वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत में भी 2,201 रुपए की गिरावट आई है। इसके बाद सोने का भाव घटकर 1.41 लाख रुपए रह गया। लगातार महंगे होते सोने-चांदी के बीच आई इस गिरावट से उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है, जो त्योहारों और शादी के सीजन के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं।
इस महीने सोना 8 हजार और चांदी 39 हजार रुपए सस्ती
अक्टूबर महीने में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है। उपलब्ध IBJA आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने चांदी 39,485 रुपए प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। वहीं, सोने की कीमत में 8,084 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है।
इससे पहले 1 अक्टूबर 2026 को एक किलो चांदी का भाव करीब 2.20 लाख रुपए था। वहीं, 10 ग्राम सोना 1.48 लाख रुपए के स्तर पर कारोबार कर रहा था। अब दोनों कीमती धातुओं के दाम में आई गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए कि IBJA के रेट और ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाले अंतिम भाव में अंतर हो सकता है। गहने खरीदते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागू शुल्क भी जुड़ते हैं।
सोने की कीमतों में गिरावट की 3 बड़ी वजहें
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां और निवेशकों की रणनीति अहम मानी जा रही हैं।
1. ऊंचे भाव पर निवेशकों की बिकवाली
त्योहारों से पहले सोने की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। ऐसे में बड़े निवेशकों ने मुनाफा वसूली के लिए सोने की बिकवाली शुरू कर दी। बाजार में जब बड़ी मात्रा में बिक्री होती है तो कीमतों पर दबाव बनता है।
2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड की मजबूती का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों की मुद्रा रखने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग प्रभावित हो सकती है और कीमतों में गिरावट आ सकती है।
3. आम खरीदारों की कम होती मांग
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोने के भाव देखकर कई आम खरीदारों ने खरीदारी टाल दी। खासकर महंगे गहनों की खरीदारी में ग्राहकों ने सावधानी बरती। मांग कमजोर होने से भी कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
चांदी सस्ती होने के पीछे ये 3 कारण
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। इसके पीछे औद्योगिक मांग, निवेशकों की बिकवाली और सर्राफा बाजार का रुझान जैसे कारण शामिल हैं।
1. औद्योगिक मांग में कमजोरी
चांदी का इस्तेमाल केवल गहने बनाने में ही नहीं, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती आने पर उद्योगों की मांग प्रभावित हो सकती है। इससे चांदी की कीमतों पर दबाव बनता है।
2. बाजार में बिकवाली का दबाव
शेयर और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच बड़े ट्रेडर्स और निवेशक अपनी पोजिशन कम कर सकते हैं। चांदी में बिकवाली बढ़ने से इसकी कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।
3. सोने की कीमतों में गिरावट का असर
सोने और चांदी दोनों का कारोबार कीमती धातुओं के बाजार में होता है। निवेशकों की धारणा और बाजार के रुझान का असर दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे में सोने की कीमतों में गिरावट आने पर चांदी में भी बिकवाली बढ़ सकती है।
क्या सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट आगे भी जारी रहेगी?
सोने और चांदी की कीमतों में आगे क्या रुख रहेगा, इसे लेकर निवेशकों और खरीदारों के मन में सवाल है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक, सोने-चांदी की खरीदारी एक साथ पूरी रकम लगाकर करने के बजाय किस्तों में करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
उनकी सलाह है कि ग्राहक कुछ खरीदारी अभी कर सकते हैं और बाकी रकम को 15 से 20 दिन के अंतराल पर निवेश कर सकते हैं। इससे बाजार में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
निवेश के लिहाज से एक-दो महीने के बजाय 6 महीने से एक साल तक का नजरिया रखना चाहिए। हालांकि, सोने और चांदी में निवेश पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर, ब्याज दरों और मांग-सप्लाई के आधार पर बदल सकती हैं।
अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग क्यों होते हैं?
देश के अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतें एक जैसी नहीं होतीं। एक ही दिन दिल्ली, मुंबई, भोपाल, चेन्नई और कोलकाता में सोने के भाव में अंतर देखने को मिल सकता है। इसके पीछे चार प्रमुख कारण हैं।
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ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी खर्च: एक शहर से दूसरे शहर सोना पहुंचाने में परिवहन और सुरक्षा का खर्च जुड़ता है। इसका असर स्थानीय कीमतों पर पड़ सकता है।
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खरीदारी की मात्रा: अलग-अलग राज्यों में सोने की मांग और खरीदारी की मात्रा अलग होती है। दक्षिण भारत में सोने की खपत अधिक होने के कारण वहां का बाजार भी अलग तरीके से काम करता है।
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स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन: शहर और राज्य के सर्राफा संगठनों के स्थानीय रेट और बाजार की परिस्थितियों का असर कीमतों पर पड़ सकता है।
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पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स के पास मौजूद पुराने स्टॉक की खरीद कीमत और नई खरीद के रेट भी ग्राहकों को मिलने वाली कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।
ऑल टाइम हाई से चांदी 1.99 लाख और सोना 36 हजार रुपए सस्ता
इस साल सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को यह बढ़कर 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी।
अब चांदी अपने इस उच्चतम स्तर से करीब 1.99 लाख रुपए नीचे आ चुकी है। इसी तरह 31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था। 29 जनवरी 2026 को यह बढ़कर 1.76 लाख रुपए के स्तर पर पहुंच गया था। अब सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 36 हजार रुपए सस्ता हो चुका है।
इन आंकड़ों से साफ है कि कीमती धातुओं के बाजार में तेजी के बाद अब बड़ी गिरावट का दौर देखने को मिल रहा है।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
सोने की कीमतों में गिरावट के बीच अगर आप गहने खरीदने जा रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. BIS हॉलमार्क वाला सोना खरीदें
हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) से हॉलमार्क वाला सोना खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता की जानकारी मिलती है। खरीदारी से पहले हॉलमार्क और HUID नंबर की BIS Care ऐप से जांच भी करें।
2. कीमत और वजन की जांच करें
सोना खरीदने से पहले उस दिन का बाजार भाव जरूर पता करें। 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। ज्वेलरी खरीदते समय वजन, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और GST का पूरा हिसाब लें। बिल लेना न भूलें।
असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना भी जरूरी है। कुछ सामान्य तरीकों से शुरुआती पहचान की जा सकती है, लेकिन इनसे चांदी के असली होने की पूरी गारंटी नहीं मिलती।
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मैग्नेट टेस्ट: शुद्ध चांदी आमतौर पर चुंबक से नहीं चिपकती। हालांकि, केवल इस टेस्ट से असली और नकली चांदी का फैसला नहीं किया जा सकता।
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आइस टेस्ट: चांदी की ऊंची तापीय चालकता के कारण उसके संपर्क में रखी बर्फ तेजी से पिघल सकती है।
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स्मेल टेस्ट: शुद्ध चांदी में आमतौर पर कोई खास धातु जैसी गंध नहीं होती। हालांकि, गंध के आधार पर शुद्धता तय करना सही तरीका नहीं है।
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क्लॉथ टेस्ट: कुछ चांदी की वस्तुओं को सफेद कपड़े से रगड़ने पर काला निशान आ सकता है। लेकिन यह टेस्ट भी निर्णायक नहीं है।
चांदी की शुद्धता की सही जांच के लिए हॉलमार्क, BIS प्रमाणन और अधिकृत जांच केंद्र की मदद लेना बेहतर है।
सोना-चांदी खरीदने से पहले इन बातों को समझें
फेस्टिव सीजन में सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए राहत की खबर जरूर है, लेकिन केवल सस्ता होने के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए। ग्राहकों को अपनी जरूरत, बजट और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
गहने खरीदने वालों के लिए हॉलमार्क, शुद्धता, वजन और मेकिंग चार्ज की जांच जरूरी है। वहीं, निवेश करने वालों को बाजार के उतार-चढ़ाव और संभावित जोखिम को समझकर ही फैसला लेना चाहिए।













