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दो सिर वाले जीव के राज से उठा पर्दा, डायनसोर काल में भी पाए जाते थे, इस रिसर्च से चौंक गई दुनिया

उमाकांत त्रिपाठी।दो सिर वाले जीवों की बातें अक्सर हमें चौंका देती हैं. कभी सांप, कभी कछुआ, तो कभी मछली में इस तरह की दुर्लभ गड़बड़ी देखी जाती है. लेकिन सोचिए, यही चीज डायनासोर के जमाने में भी होती थी. ऐसा खुलासा एक पुराने स्टडी में हुआ, जिसने साइंस की दुनिया को हिलाकर रख दिया. 2006 में चीन के रिसर्चर्स ने हाइफलोसॉरस (Hyphalosaurus) नाम के छोटे जलीय जीव का फॉसिल खोजा. यह जीव करीब 120 करोड़ साल पहले झीलों में रहता था. हाइफलोसॉरस के हजारों फॉसिल अब तक मिल चुके हैं, लेकिन यह खोज सबसे अलग है. वजह यह कि इसमें दो पूरे सिर और लंबी गर्दनें हैं. रिसर्चर्स ने लिखा, ‘पेक्टोरल गिर्डल से आगे रीढ़ की हड्डी दो हिस्सों में बंट जाती है और दोनों तरफ सिर बन जाता है.

जानिए- क्या है दो सिर वाले जीवों के पीछे की साइंस?
वैज्ञानिकों का कहना है कि- यह स्थिति ‘एक्सियल बाइफर्केशन’ कहलाती है. यह तब होती है जब भ्रूण जुड़वां बनने की कोशिश करता है लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती. नतीजा यह निकलता है कि एक ही शरीर पर दो सिर बन जाते हैं. आज के वक्त में भी सांप, कछुआ, हिरण और मछलियों में यह स्थिति देखी जा चुकी है. लेकिन ऐसे जीव ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाते. यही वजह है कि यह हाइफलोसॉरस भी सिर्फ 70 मिलीमीटर लंबा था और लगता है कि जन्म के बाद ही मर गया.

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