खबर इंडिया की।Ayodhya Ram Mandir Chadhava Chori Case अब केवल कथित चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मामला अब राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिखाई दे रहा है। इस मामले में पहली बार महंत दिनेंद्र दास ने खुलकर पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं दूसरी ओर, प्रशासन आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने की संभावना भी जताई जा रही है।
अयोध्या में यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ट्रस्ट के अंदरूनी विवाद, पुलिस जांच, वकीलों के प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई ने इसे राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बना दिया है।
ट्रस्ट के अंदर शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर
महंत दिनेंद्र दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूरे मामले की जिम्मेदारी पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल राव राजनीति कर रहे हैं और जानबूझकर लोगों को उलझाने का काम करते हैं।
महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि राम मंदिर की परंपराओं और मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए, लेकिन कुछ लोग व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। गौरतलब है कि गोपाल राव मूल रूप से कर्नाटक के निवासी हैं और राम मंदिर निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
इस बयान के बाद ट्रस्ट के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। राजनीतिक और धार्मिक हलकों में भी इस बयान के बाद चर्चा तेज हो गई है।
अयोध्या में सड़कों पर उतरे 500 से अधिक वकील
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार सुबह करीब 11:45 बजे अयोध्या बार एसोसिएशन से जुड़े 500 से अधिक वकील सड़कों पर उतर आए। उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर नारेबाजी की।
वकीलों ने सिविल लाइन चौकी पहुंचकर तीनों समेत चार लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र के अनुसार, पुलिस प्रशासन ने शिकायत प्राप्त कर ली है और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।
यह प्रदर्शन दर्शाता है कि मामला अब केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी इसका प्रभाव दिखाई देने लगा है।
आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश प्रशासन इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार, अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) ने उन मकानों की पहचान कर ली है, जिनके निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है या जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी लवकुश मिश्रा का शहादतगंज स्थित निर्माणाधीन मकान और अनुकल्प मिश्रा का कौशलपुरी स्थित मकान प्रशासन के रडार पर हैं। इन दोनों संपत्तियों को लेकर आज ही नोटिस जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि मंदिर में नौकरी मिलने के बाद आरोपियों की आर्थिक स्थिति में किस प्रकार बदलाव आया और संपत्तियों के निर्माण में धन का स्रोत क्या था।
नोटों की गड्डियों वाला वीडियो जांच के दायरे में
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब आरोपी अविनाश शुक्ला के भाई अमित शुक्ला का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह कथित तौर पर नोटों की गड्डियां हाथ में लिए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने इस वीडियो को जांच के दायरे में शामिल कर लिया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, उसमें दिखाई देने वाली रकम का स्रोत क्या है और उसका इस पूरे मामले से कोई संबंध है या नहीं। यदि वीडियो के संबंध में ठोस प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
चंपत राय से पूछताछ के बाद अब अनिल मिश्रा से हो सकती है जांच
पुलिस इस मामले में लगातार जांच आगे बढ़ा रही है। जानकारी के अनुसार, 30 जून को अयोध्या जेल में आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ की गई थी। इसके अलावा, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी करीब तीन घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है।
अब जांच एजेंसियां ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा से पूछताछ कर सकती हैं। विशेष रूप से आरोपियों लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा की नियुक्ति प्रक्रिया में उनकी भूमिका की जांच की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि विभिन्न बयानों और दस्तावेजों का क्रॉस-वेरिफिकेशन करने से मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
मामला क्यों बन गया राष्ट्रीय चर्चा का विषय?
अयोध्या स्थित राम मंदिर देश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी आर्थिक अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप का राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। यही कारण है कि चढ़ावा चोरी का यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस का विषय बन गया है।















