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इंदौर में फिजिकल रिलेशन से नाखुश पत्नी ने मांगा तलाक, ‘सेक्स’ असंतुष्टि बनी डिवोर्स की वजह, MP में ऐसे 60% केस

खबर इंडिया की। मध्यप्रदेश के इंदौर से रिश्तों और शादीशुदा जिंदगी को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक महिला ने सिर्फ इसलिए तलाक मांग लिया क्योंकि वह अपने पति के साथ फिजिकल रिलेशन से संतुष्ट नहीं थी। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों परिवारों के बीच लगातार विवाद होने लगा और बात समाज की पंचायत तक पहुंच गई।

परिवार और समाज के लोगों ने दोनों पक्षों को बैठाकर समझाया। डॉक्टरों और काउंसलर्स की मदद ली गई। आखिरकार मामला सुलझ गया और दोनों दोबारा साथ रहने को तैयार हो गए। लेकिन इस घटना ने एक बड़े सामाजिक बदलाव की ओर इशारा जरूर कर दिया है।

दरअसल, इंदौर के सिंधी समाज ने परिवारों के विवाद सुलझाने के लिए 17 जुलाई 2023 से एक मध्यस्था केंद्र शुरू किया था। अब तक यहां 800 से ज्यादा मामलों की सुनवाई हो चुकी है। सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि इनमें बड़ी संख्या पति-पत्नी के रिश्तों से जुड़े विवादों की थी।

केंद्र के संस्थापक सदस्य किशोर कोडवानी के मुताबिक कुल मामलों में 48 प्रतिशत विवाद दांपत्य जीवन से जुड़े थे। इनमें भी करीब 60 प्रतिशत मामलों की जड़ फिजिकल रिलेशन में असंतुष्टि रही। यानी पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंधों को लेकर तनाव अब परिवार टूटने की बड़ी वजह बनता जा रहा है।

समाज के मुताबिक कई मामलों में मेडिकल समस्याएं, मानसिक तनाव, लाइफस्टाइल और पारिवारिक दबाव रिश्तों को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ दंपतियों में आपसी संवाद की कमी भी सामने आई। ऐसे मामलों में डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की मदद से काउंसलिंग कराई गई, जिसके बाद कई टूटते परिवार फिर से जुड़ गए।

समाज के लोगों का कहना है कि पहले ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात नहीं होती थी, लेकिन अब नई पीढ़ी अपनी समस्याओं को छिपाने के बजाय खुलकर सामने रख रही है। यही वजह है कि शादी के कुछ महीनों बाद ही कई रिश्ते टूटने की कगार तक पहुंच जाते हैं।

कई मामलों में आर्थिक स्थिति भी विवाद की वजह बनी। अगर लड़की संपन्न परिवार से आती है और लड़के की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, तो दोनों की लाइफस्टाइल में बड़ा फर्क नजर आता है। धीरे-धीरे यही अंतर झगड़ों का कारण बन जाता है।

सिंधी पंचायत ने विवाह योग्य युवक-युवतियों का सर्वे भी कराया। रिपोर्ट में सामने आया कि 22 से 29 साल की उम्र में 39 प्रतिशत लड़कियां और 34 प्रतिशत लड़के अब तक अविवाहित हैं। वहीं 30 से 40 साल की उम्र में 60 प्रतिशत लड़के और 57 प्रतिशत लड़कियां शादी नहीं कर पाए हैं।

समाज के जानकारों का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल, करियर प्रेशर, मानसिक तनाव और रिश्तों को लेकर बढ़ती अपेक्षाएं आज शादीशुदा जिंदगी को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही हैं। यही वजह है कि अब समाज और परिवारों को रिश्तों को बचाने के लिए काउंसलिंग और संवाद का सहारा लेना पड़ रहा है।

इंदौर की यह पहल अब दूसरे समाजों के लिए भी एक उदाहरण बन रही है, जहां कोर्ट-कचहरी के बजाय बातचीत और समझदारी से टूटते रिश्तों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

 

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