उमाकांत त्रिपाठी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बात की और संसद के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के मुद्दे पर चर्चा की. टीएमसी के शीर्ष सूत्रों की मानें तो ममता बनर्जी ने अयोध्या से नवनिर्वाचित सांसद अवधेश प्रसाद को डिप्टी स्पीकर बनाने का प्रस्ताव दिया है.
डिप्टी स्पीकर पर हो रही सियासत
डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा है. लेकिन माना जा रहा है कि अवधेश प्रसाद बीजेपी सरकार के लिए एक कठिन प्रस्ताव हैं क्योंकि सपा सांसद ने अयोध्या (फैजाबाद सीट) से जीत हासिल की है. ममता ने एक गैर कांग्रेसी विपक्षी उम्मीदवार का प्रस्ताव रखा है जबकि कांग्रेस डिप्टी स्पीकर का पद चाहती थी. विपक्षी INDIA ब्लॉक डिप्टी स्पीकर की मांग पर अड़ा हुआ है. लेकिन एनडीए सरकार डिप्टी स्पीकर का पद बगैर चुनाव के विपक्ष को देना नहीं चाहती. यही वजह है कि विपक्ष ने स्पीकर चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा था.
विपक्ष के लिए जरूरी डिप्टी स्पीकर का पद
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि हमारा विरोध प्रतीकात्मक और लोकतांत्रिक था, क्योंकि वो (एनडीए) हमें डिप्टी स्पीकर का पद नहीं दे रहे थे. झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने भी कहा कि अगर सरकार डिप्टी स्पीकर का पद देने पर राजी हो जाती तो स्पीकर के लिए चुनाव नहीं कराना पड़ता. डिप्टी स्पीकर का पद भी उतना ही अहम है, जितना स्पीकर का. संविधान का अनुच्छेद 95 कहता है कि डिप्टी स्पीकर, स्पीकर का काम तब संभालता है जब वो पद खाली हो गया हो या फिर वो गैरमौजूद हों. अगर डिप्टी स्पीकर का पद खाली है और स्पीकर भी मौजूद नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त लोकसभा सांसद सदन की कार्यवाही संभालता है. संविधान ने डिप्टी स्पीकर को भी वही शक्तियां दी हैं, जो स्पीकर को दी है.













