उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के चार जिलों में जल्द शुरू होगा वैदिक पेंट का संयंत्र

उत्तर प्रदेश का खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग जल्द ही चार जिलों में वैदिक पेंट की इकाई लगाएगा और अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इन इकाइयों से इसका उत्पादन शुरू होने की संभावना है।

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक (वाराणसी मंडल) डीएस भाटी ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में बताया कि पायलट परियोजना के तहत जयपुर के सांगानेर में अभी केवल दो तरह के उत्पादों- डिस्टेंपर और व्हाइट पेंट का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग ने उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, वाराणसी, बलिया और मेरठ के पंजोखरा में वैदिक पेंट की इकाई लगाने की योजना बनाई है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चलते इसमें थोड़ा विलंब हो सकता है, लेकिन अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में इन इकाइयों से उत्पादन शुरू करने की पूरी कोशिश है।

भाटी ने बताया कि वैदिक पेंट की एक इकाई स्थापित करने में कम से कम 25-30 लाख रुपये निवेश की जरूरत पड़ती है, जोकि इकाई के आकार पर निर्भर करता है। इकाई लगाने पर 25-35 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

यहां माघ मेले में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की प्रदर्शनी का निरीक्षण करने आए भाटी ने बताया कि वैदिक पेंट की विशेषता यह है कि इसमें केमिकल नहीं मिला होता है और यह नैसर्गिक पेंट है। साथ ही यह उतना ही टिकाऊ है जितना कि बाजार में उपलब्ध अन्य पेंट, जबकि इसकी कीमत बाजार के केमिकल वाले पेंट की तुलना में कम है।

भाटी ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा वैदिक पेंट को अन्य रंगों में भी उपलब्ध कराने पर अनुसंधान किया जा रहा है और बहुत जल्द विभिन्न रंगों में भी यह पेंट बाजार में उपलब्ध होगा।

यहां चल रही प्रदर्शनी के बारे में उन्होंने बताया कि इसमें 17-18 राज्य हिस्सा ले रहे हैं और इस बार ‘फोकस स्टेट’ नगालैंड है जहां के मूंगा सिल्क में लोग खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मूंगा सिल्क साल में केवल तीन महीने पैदा होता है और इसका वस्त्र एक अलग ही पहचान दिलाता है।

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