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पीएम मोदी ने राहुल को बताया, कैसे जीतेगी कांग्रेस? विपक्षी दलों को मोदी ने दी ये नसीहत

उमाकांत त्रिपाठी। संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है. इस सत्र में शिरकत करने पहुंचे पीएम मोदी ने संसद के बाहर मीडिया को संबोधित किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि सर्दी बहुत धीमी गति से आ रही है, लेकिन राजनैतिक गर्मी बड़ी तेज से बढ़ रही है। कल ही चार राज्यों के चुनाव के नतीजे सामने आए हैं। परिणाम बहुत ही उत्साहजनक हैं। वहीं मध्य प्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को करारी शिकस्त देने के बाद पीएम मोदी ने विपक्ष को खास सलाह दी है। उन्होंने कहा कि- ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे विधानसभा चुनावों में हार की निराशा संसद के अंदर न निकालें और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि इससे उनके प्रति लोगों का नजरिया बदल सकता है।

चुनावी हार का गुस्सा सदन में ना उतारें

इस दौरान उन्होंने कहा कि- मैं सभी सांसदों से कहता हूं कि लोकतंत्र का मंदिर जन आकांक्षाओं के लिए विकसित भारत की नींव को अधिक मजबूत बनाने के लिए अच्छा मंच है। उन्होंने सांसदों से ज्यादा से ज्यादा तैयारी करके आने के लिए आग्रह किया। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि सकारात्मक विचार लेकर आइए हम 10 कदम चलेंगे तो आप 12 कदम चलिए। बाहर के परायज का गुस्सा सदन में मत उतारना, हताशा, निराश होती है। लेकिन दम दिखाने के लिए कुछ करना होगा। लोकतंत्र के मंदिर को ये मंच मत बनाइए। जब सुशासन होता है, जब जन कल्याण के प्रति समर्पण होता है, तो ‘सत्ता-विरोधी’ शब्द अप्रासंगिक हो जाता है. आप इसे “सत्ता-समर्थक” या “सुशासन” या “पारदर्शिता” या “कह सकते हैं। जन कल्याण के लिए ठोस योजनाएं लेकिन यह अनुभव रहा है। इतने उत्कृष्ट सार्वजनिक जनादेश के बाद, हम संसद के इस नए मंदिर में मिल रहे हैं।

देश में नकारात्मकता को नकार दिया है

पीएम मोदी ने कहा कि- सभी समाजों और सभी समूहों की महिलाएं, युवा, हर समुदाय और समाज के किसान और मेरे देश के गरीब। ये 4 ऐसी महत्वपूर्ण जातियां हैं जिनके सशक्तिकरण, उनके भविष्य को सुनिश्चित करने वाली ठोस योजनाएं और अंतिम व्यक्ति तक पहुंच के उसूलों पर जो चलता है, उन्हें भरपूर समर्थन मिलता है। जब गुड गवर्नेंस औऱ जनहित का समर्थन होता है तो एंटी इनकंबेंसी इरेलीवेंट हो जाती। इतने उत्तम जनादेश के बाद आज हम संसद के इस नए मंदिर में मिल रहे हैं। जब इस नए परिसर का उद्घाटन हुआ था, तो उस समय एक छोटा सा सत्र था और एक ऐतिहासिक निर्णय हुआ था। लेकिन इस बार लबें समय तक इस सदन में कार्य करने का अवसर मिलेगा। देश ने नकारात्मकता को नकारा है। मैं लगातार सत्र के प्रारंभ में विपक्षियों के साथ विचार विमर्श करता हूं। लोकतंत्र का यह मंदिर जन आकांक्षाओं के लिए, विकसित भारत की नींव को और अधिक मजबूत बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण मंच हैं।

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