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कांग्रेस को एक और झटका, कांग्रेस सांसद गीता कोड़ा बीजेपी में हुई शामिल; कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

उमाकांत त्रिपाठी।झारखंड प्रदेश कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। सिंहभूम से सांसद और झारखंड पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा सोमवार को कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गई। बताया जा रहा है कि बीते कुछ दिनों से वो गठबंधन से नाराज चल रही थी।रांची में बीजेपी पार्टी ऑफिस में प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने उनका पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी भी मौजूद रहे।बीजेपी जॉइन करने के बाद गीता कोड़ा ने कहा कि कांग्रेस के पास कोई नीति नहीं ,कोई सोच नहीं, पार्टी ने देश को गर्त में ले जाने का काम किया है।

गीता ने की सदस्यता ग्रहण
गीता कोड़ा ने सदस्यता ग्रहण करने के बाद कहा कि मैंने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली है, इसके पीछे का कारण सभी जानते हैं। कांग्रेस ने जिस तरह देश को गर्त में डाला है, कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है।कांग्रेस सभी को साथ लेकर चलने की बात करती है लेकिन अपना परिवार साथ लेकर चल रही है।

राजनीति का उद्देश्य जनता की सेवा करना है। जनता के बीच रहना। जहां जनता के हित को दरकिनार किया जा रहा है, वैसी पार्टी में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। अब मैं भाजपा के साथ जनता की सेवा करूंगी। मोदी के सपनों के भारत में जो भी मेरी भूमिका होगी उसे निभाऊंगी।

स्वागत करते हुए कहा
बाबूलाल मरांडी ने गीता कोड़ा का स्वागत करते हुए कहा- गीता कोड़ा पहचान की मोहताज नहीं है। गीता कोड़ा दो बार विधायक रही हैं, सांसद बनीं और काम कर रही हैं। वह कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष भी रही हैं। नरेंद्र मोदी के काम से प्रभावित होकर ही वह भाजपा में शामिल हुई हैं। गीता कोड़ा के योगदान से कोल्हान ही नहीं पूरे झारखंड में भाजपा एक नयी ताकत और नई ऊर्जा के साथ काम करेगी। अब झारखंड की 14 लोकसभा सीटें भाजपा के खाते में आएगी। हम नरेंद्र मोदी के खाते में झारखंड की सभी सीटें देंगे।

दो बार रही विधायक
गीता गोड़ा 2009 से 2019 तक दो बार विधायक रह चुकी हैं। वो पहली बार सिंहभूम लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। मधु कोड़ा सितंबर 2006 से अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे थे। लंबे समय से गीता कोड़ा के भाजपा में आने की चर्चा थी लेकिन पहले इन्होंने इन संभावनाओं से इनकार किया था।

नाराजगी आई सामने
पिछले दिनों कांग्रेस को झारखंड में विधायकों के असंतोष का भी सामना करना पड़ा था। पार्टी के 12 विधायक अपने खेमे के विधायकों को मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज थे। दरअसल 16 फरवरी को चंपई सोरेन ने कैबिनेट के विस्तार में कांग्रेस कोटे से उन्हीं 4 विधायकों को मंत्री बनाया गया था, जो इसके पहले की हेमंत सरकार में मंत्री थे। इसी बात से नाराज विधायक दिल्ली पहुंचे और हाईकमान से मुलाकात की थी।

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