उमाकांत त्रिपाठी।ओडिशा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल किया है। राज्य की 147 सीटों में से बहुमत का आंकड़े 74 को पार करते हुए BJP ने 78 सीटें हासिल की। अब राज्य का सीएम कौन होगा इसको लेकर कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं।
पार्टी के तीन नेताओं सुरेश पुजारी, मनमोहन सामल और गिरीश मुर्मू के नाम सीएम की रेस में चल रहे हैं। इनमें भी सुरेश पुजारी सीएम पोस्ट के लिए स्ट्रांग कैंडिडेट माने जा रहे हैं। सुरेश ने ब्रजराजनगर विधानसभा सीट से जीत हासिल की है।मनमोहन शामल ओडिशा बीजेपी के स्टेट प्रेसिडेंट हैं।
वहीं, गिरीश मुर्मू को पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का करीबी बताया जाता है। पहले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम भी इस लिस्ट में शामिल था, लेकिन मोदी 3.0 कैबिनेट में उन्हें जगह दी गई। लिहाजा उन्हें सीएम फेस नहीं माना जा रहा है।
इधर, BJP ने ओडिशा के नए CM के चयन के लिए केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और भूपेंद्र यादव को ओडिशा का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। भाजपा के ओडिशा प्रभारी विजय पाल सिंह तोमर के ने बताया कि पार्टी विधायक दल की मंगलवार को बैठक होगी। नई सरकार 12 जून का शपथ लेगी।
सुरेश पुजारी है अमित शाह के करीबी
ब्रजराजनगर के विधायक सुरेश कुमार पुजारी पिछले लोकसभा चुनाव में बरगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। 2024 में उन्हें पार्टी ने विधानसभा चुनाव में उतारा था। पेशे से वकील रहे पुजारी केंद्रीय मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। अमित शाह जब राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब वह राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य थे। वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव भी रह चुके हैं।
गिरीश मुर्मू है पीएम मोदी के करीबी
पूर्व CAG चीफ और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल गिरीश मुर्मु का नाम भी सीएम फेस के लिए चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1985 बैच के गुजरात कैडर के IAS अधिकारी मुर्मु, नरेंद्र मोदी के करीबी हैं।
मुर्मु ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया है। जब अमित शाह गृह मंत्री थे तब वह गृह विभाग के संयुक्त सचिव भी थे। ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा मुर्मु को ओडिशा का मुख्यमंत्री बनाकर आदिवासी कार्ड खेल सकती है।
मनमोहन सामल है बीजेपी के पुराने नेता
मनमोहन सामल बीजेपी के पुराने नेता हैं। वे कॉलेज के दिनों में ABVP में थे। बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्होंने दो बार BJP के स्टेट प्रेसिडेंट के तौर पर काम किया है। साल 2004 में पहली बार भद्रक जिले के धामनगर सीट से विधायक चुने गए थे।
भाजपा-BJD गठबंधन के दौरान उन्होंने नवीन पटनायक मंत्रिमंडल में राजस्व और खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री के रूप में कार्य किया है। मनमोहन राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामल के नाम पर पार्टी कार्यकर्ताओं को भी ऑब्जेक्शन नहीं है
BJD-भाजपा ने दो बार गठबंधन में सरकार बनाई थी
भाजपा और BJD ने दो विधानसभा चुनाव (2000 और 2004) गठबंधन में लड़ा था। उस समय BJD, NDA की सबसे भरोसेमंद पार्टी मानी जाती थी। साल 2000 में BJD ने 68 और भाजपा ने 38 सीटें जीती थीं।
147 में से 106 सीटों के साथ दोनों पार्टियों ने पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया। 2004 के चुनाव में भाजपा और BJD ने कुल 93 सीटें जीतीं। दोबारा सत्ता में आईं।
पटनायक सबसे ज्यादा CM रहने का रिकॉर्ड नहीं बना पाए
ओडिशा में BJD साल 2000 से लगातार सत्ता में रही। BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक 24 साल से मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 5 मार्च 2000 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। तब से 2019 तक वे 5 बार से ओडिशा के CM हैं।
सिक्किम के पूर्व CM पवन चामलिंग (24 साल और 165 दिन) के बाद नवीन पटनायक (24 साल और 83 दिन) सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले देश के दूसरे नेता हैं। अगर फिर से BJD की सरकार बनती तो नवीन पटनायक सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने वाले नेता होते।
BJD ने 2009 में 11 साल का गठबंधन तोड़ा
2009 विधानसभा चुनाव से पहले BJD ने भाजपा से 11 साल पुराना का गठबंधन तोड़ लिया। BJD चाहती थी कि भाजपा विधानसभा चुनाव में 163 सीटों में से 40 पर चुनाव लड़े, जबकि भाजपा 63 सीटों पर लड़ना चाहती थी।
2019 में BJD ने 112 सीटें जीतीं। भाजपा 23, कांग्रेस 9 और अन्य के खाते में दो सीटें आईं। 2024 के चुनाव में भी भाजपा और BJD के गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पाई। हालांकि, इस बार भाजपा की ओर से खुद प्रधानमंत्री मोदी 10 से ज्यादा सभाएं-रैलियां की। उन्होंने हर रैली में कहा कि 4 जून को नवीन बाबू रिटायर होंगे और 10 जून को BJP का CM शपथ लेगा।














