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मोदी सरकार लाएगी डिजिटल इंडिया बिल: डीपफेक वीडियो और कंटेंट पर रोक लगाने के लिए करेगा काम

उमाकांत त्रिपाठी।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जनरेट किए गए डीपफेक वीडियो और कंटेंट पर रोक लगाने के लिए मोदी सरकार डिजिटल इंडिया बिल लाने वाली है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विधेयक में AI टेक्नोलॉजी के बेहतर उपयोग और तरीकों पर चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बिल के लिए विपक्षी दलों का समर्थन लेने की भी कोशिश करेगी।24 जून से शुरू हो रहे 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में सबसे पहले नए सांसदों का शपथ ग्रहण और राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा। इसी सत्र में सरकार पूर्ण बजट भी पेश करेगी। सूत्रों के मुताबिक, बजट के अलावा सत्र में डिजिटल इंडिया बिल पर भी बहस हो सकती है। इस बिल में सोशल मीडिया पर जारी होने वाले वीडियो को रेगुलेट करने का भी प्रावधान हो सकता है।

पीएम मोदी बोले
PM नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स को दिए एक इंटरव्यू में डीपफेक वीडियो के खतरे को बताया था। मोदी ने कहा था- AI अच्छी चीज है, लेकिन अगर यह सही ट्रेनिंग के बिना किसी को दिया जाता है तो इसका दुरुपयोग होने की आशंका है।

पीएम मोदी बोले
मोदी ने कहा- भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कोई भी डीपफेक का इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए AI जनेरेटेड कंटेंट्स पर वाटरमार्क होना चाहिए, ताकि लोगों को पता चले कि यह AI जनेरेटेड है। इससे कोई गुमराह नहीं होगा। एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना, सचिन तेंदुलकर और गृह मंत्री अमित शाह तक के डीपफेक वीडियो आ चुके हैं।
चुनाव के दौरान 27 अप्रैल को अमित शाह का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। शाह ने असम के गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फेक और ओरिजिनल वीडियो के बीच का अंतर बताया था।

डीपफेक रोकने के लिए सरकार ने जनवरी में तय किए थे नियम
डीपफेक रोकने के लिए केंद्रीय IT मंत्रालय ने नए नियम चुनाव से पहले जनवरी में ही तैयार कर लिए थे। इसके मुताबिक, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नए नियमों का उल्लंघन करेगा, उसका भारत में कारोबार रोक दिया जाएगा।

IT मंत्रालय ने बताया था कि 17 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के बीच हुई दो बार मीटिंग हुई। इसमें तय हुआ था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म डीपफेक कंटेंट को AI के जरिए फिल्टर करने का काम करेंगे। डीपफेक कंटेंट डालने वालों पर IPC की धाराओं और IT एक्ट के तहत केस दर्ज होंगे।

पिछले साल तत्कालीन IT राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि सरकार फेक वीडियो और सोशल मीडिया के वीडियो को रेगुलेट करने का बिल लाने की तैयारी में है। उन्होंने फाइनेंशियल एक्सप्रेस के डिजीफंड एंड सेफ्टी समिट में कहा था कि इस बिल पर लंबी चर्चा और बहस की जरूरत है, जिसमें समय लग सकता है। चुनाव से पहले इसे संसद के पटल पर लाना मुमकिन नहीं लगता।

ऐसे होंगे नए नियम: फेक कंटेंट जहां अपलोड होगा, उस प्लेटफॉर्म को भी जिम्मेदार मानेंगे
डीप फेक कंटेंट मिलते ही कोई भी FIR करा सकता है। विक्टिम और उसकी तरफ से नियुक्त व्यक्ति को भी केस दर्ज कराने के अधिकार होंगे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स से यह शपथ लेगा कि वह डीपफेक कंटेंट नहीं डालेगा। प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स को इस संबंध में अलर्ट मैसेज देंगे। सहमति के बाद ही यूजर अकाउंट एक्सेस कर सकेगा।
डीप फेक कंटेंट को 24 घंटे में हटाना होगा। जिस यूजर ने कंटेंट अपलोड किया है, उसका अकाउंट बंद कर सूचना दूसरे प्लेटफॉर्म को देनी होगी, ताकि आरोपी वहां अकाउंट न बना सके।

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