उमाकांत त्रिपाठी। बांग्लादेश में चल रही हिंसा को देखते हुए नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एनईएसओ) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बड़ी मांग की है। एनईएसओ ने शाह से हस्तक्षेप करने की मांग की है कि बांग्लादेश से कोई भी अवैध रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में प्रवेश न कर पाए। उन्होंने ये भी अनुरोध किया कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक भी बांग्लादेशी को शरण न दी जाए।
पत्र लिखकर की ये मांग
केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे गए पत्र में एनईएसओ ने कहा कि- इस समय भारत सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरुरी है कि सीमा पार से अवैध प्रवास की कोशिशों को रोका जाए। साथ ही पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर पूरी तरह से और सख्ती से निगरानी की जाए। उन्होंने लिखा कि- पिछली घटनाओं से ये हमेशा होता है कि जब भी बांग्लादेश में गृहयुद्ध या दंगा होता है, तो उत्तर पूर्व क्षेत्र को हमेशा देश से बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों का खामियाजा भुगतना पड़ता है। ऐसे हालात में भारत को भी गंभीर मुश्किलों से गुरजना होता है। खासकर उत्तर पूर्व क्षेत्र के उन चार राज्यों में घुसपैठ ज्यादा होती है जहां चार राज्यों की सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है।
क्या है NESO
नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (NESO) असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के सात राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले आठ छात्र संगठनों का एक समूह है और इसमें ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU), खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU), गारो स्टूडेंट्स यूनियन (GSU), ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन (AMSU), मिजो जिरलाई पावल (MZP), नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF), ऑल अरुणाचल प्रदेश स्टूडेंट्स यूनियन (AAPSU) और त्विप्रा स्टूडेंट्स फेडरेशन (TSF) शामिल हैं। आपको बता दें कि त्रिपुरा बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर की सीमा साझा करता है, मेघालय 443 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, मिजोरम 318 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है और असम बांग्लादेश के साथ 262 किलोमीटर लंबी साझा सीमा साझा करता है। बांग्लादेश में चल रहे संकट के चलते NESO ने देश में पलायन को लेकर चिंता जताई है।














