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पीएम मोदी ने किया वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट का उद्घाटन, जानिए क्या है इस समिट का मकसद?

उमाकांत त्रिपाठी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट 3.0 का उद्घाटन किया। इस दौरा उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की भूमिका को लेकर कई बातें कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि समावेशी विकास में DPI का योगदान किसी क्रांति से कम नहीं है। आपको बता दें कि इस बार भारत तीसरे ग्लोबल साउथ समिट की मेज़बानी कर रहा है। इस समिट का मकसद वैश्विक दक्षिण के देशों को एक मंच पर लाना और विभिन्न मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण बताना है।

समिट के उद्घाटन पर क्या बोले पीएम?
वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट 3.0 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि- “समावेशी विकास में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का योगदान किसी क्रांति से कम नहीं है।” हमारे G-20 प्रेसीडेंसी के तहत बनाया गया ग्लोबल DPI रिपॉजिटरी के अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। “हमें खुशी है कि ग्लोबल साउथ के 12 भागीदारों के साथ ‘इंडिया स्टैक’ साझा करने के लिए समझौते हुए हैं।” पीएम मोदी ने बताया कि हमने एक ‘सामाजिक प्रभाव कोष’ बनाया है, जिसमें देश 25 मिलियन अमरीकी डॉलर का योगदान देगा। पीएम ने ग्लोबल साउथ के देशों को एकजुट होने की पर जोर दिया। उन्होंने एक-दूसरे के अनुभवों से सामूहिक रूप से सीखने, क्षमताओं को साझा करने और साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने की अपील भी की।

महिलाओं के नेतृत्व में हो विकास
पीएम ने कहा कि- “ग्लोबल साउथ समिट की आवाज़ एक ऐसा मंच बन गई है, जहाँ हमने विकास से जुड़ी समस्याओं और प्राथमिकताओं पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। इसका मकसद पारस्परिक व्यापार, समावेशी विकास और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देना है। अपने संबोधन के दौरान पीएम ने सहयोग को मजबूत करने में बुनियादी ढांचे, डिजिटल और ऊर्जा कनेक्टिविटी की भूमिका का महत्व भी बताया। पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ एक्सीलेंस सेंटर और अन्य पहलों के माध्यम से शिक्षा, क्षमता निर्माण और कौशल विकास में हुई महत्वपूर्ण प्रगति के बारे में भी बताया।

 

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