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वक्फ बिल पर जेपीसी की पहली बैठक: क्या बोले अध्यक्ष जगदंबिका, मुस्लिम सांसदों ने इन मुद्दों पर जताया विरोध

उमाकांत त्रिपाठी।वक्फ (संशोधन) बिल पर जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) की गुरुवार को पहली बैठक हुई. बैठक में मुस्लिम सांसदों ने वक्फ ट्रिब्यूनल में स्थानीय डीएम और नॉन माइनॉरिटी मेंबर्स को शामिल करने का विरोध किया.यह बैठक बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में हुई. इसमें अल्पसंख्यक मामलों और कानून मंत्रालयों के अधिकारियों ने मसौदा कानून में प्रस्तावित संशोधनों के बारे में सदस्यों को जानकारी दी. बैठक में विपक्षी दलों के सांसदों ने कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि-इस कानून से धार्मिक स्वतंत्रता, समानता की स्वतंत्रता, अनुच्छेद 26 और कई अन्य कानूनों का उल्लंघन होगा.

संयुक्त संसदीय समिति की पहली बैठक संशोधन बिल 2024 को लेकर चर्चा हुई
संयुक्त संसदीय समिति की यह पहली बैठक बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में संसद भवन एनेक्सी में हुई. यह समिति बिल पर मंथन करने के बाद शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. 31 संसद सदस्यों वाली जेपीसी की पहली बैठक में अल्पसंख्यक मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा वक्फ संशोधन बिल 2024 और इसमें किए गए प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चर्चा हुई.

बैठक में स्थानीय डीएम को शामिल करने का विरोध हुआ
बैठक में तमाम कानूनी पहलुओं से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई. बैठक में कानून मंत्रालय से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक में मुस्लिम सांसदों ने वक्फ ट्रिब्यूनल में स्थानीय डीएम और नॉन माइनॉरिटी मेंबर्स को शामिल करने का विरोध किया. लोकसभा सचिवालय की ओर से कहा गया कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वो विधेयक पर प्रस्तावित संशोधनों पर समिति को जानकारी देंगे.

8 अगस्त को पेश किया गया था बिल
बैठक से पहले जगदंबिका पाल ने कहा कि विधेयक पर समिति विस्तार से चर्चा करेगी. इससे जुड़ी चिंताओं पर भी विमर्श करेगी. समिति सभी हितधारकों की बात सुनेगी. सभी 44 संशोधनों पर चर्चा होगी. अगले सत्र तक एक अच्छा और व्यापक विधेयक लाएंगे. इस बिल को 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था.
बहस के बाद इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था. बिल पेश करते हुए सरकार की ओर से कहा गया था कि प्रस्तावित कानून से मस्जिदों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं होगा. जबकि विपक्ष ने इसे मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए उठाया गया कदम बताया था. साथ ही आरोप लगाया कि ये संविधान पर हमला है.

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