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लाल आंतक पर लगेगी लगाम: गृहमंत्री अमित शाह ने बताया पूरा प्लान, नक्सलवाद पर होगा आखिरी प्रहार?

उमाकांत त्रिपाठी। गृह मंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खिलाफ अभियान को और गति देने की जरूरत पर जोर दिया है.नवा रायपुर में वामपंथी उग्रवाद और अंतर-राज्यीय समन्वय पर समीक्षा बैठक में शनिवार को उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद को वित्तपोषण और नक्सलियों को हथियारों की आपूर्ति बंद होनी चाहिए. इस बैठक में नक्सल प्रभावित सात राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.एक अधिकारी ने यहां बताया कि बैठक के दौरान वामपंथी उग्रवाद से निपटने की रणनीति, अंतर-राज्यीय समन्वय, सुरक्षा बलों की क्षमता निर्माण, नक्सल मामलों की त्वरित जांच और अभियोजन तथा माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के व्यापक विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई.

2026 से पहले खत्म हो जाएगी नक्सलवाद की समस्या?
बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान अब निर्णायक चरण में है और उनकी सरकार मार्च 2026 से पहले इस समस्या को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि- हमें अब नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की शुरुआत में जितनी गति और तीव्रता थी, उससे दोगुनी गति और तीव्रता से काम करने की जरूरत है, तभी इस समस्या को हमारे देश से पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है.”

नक्सल प्रभावित राज्यों को शाह की सलाह
नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिवों को हर पखवाड़े वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक नक्सल विरोधी अभियानों की लगातार निगरानी नहीं की जाएगी, हम वांछित परिणाम हासिल नहीं कर पाएंगे. गृह मंत्री ने आगे कहा कि नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण नीति लचीली होनी चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाना चाहिए कि इसका दुरुपयोग न हो. शाह ने कहा कि राज्यों को नक्सलवाद से जुड़े अंतरराज्यीय मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपनी चाहिए.

जानें बैठक में कौन-कौन थे शामिल?
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शामिल थे. अधिकारी ने बताया कि बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो और एनआईए के निदेशक, सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी के महानिदेशकों ने भी हिस्सा लिया.

 

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