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नक्सली, जम्मू कश्मीर और कांग्रेस पर खुलकर बोले गृहमंत्री अमित शाह, सवालों के मिले ये जवाब

उमाकांत त्रिपाठी। हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक निजी चैनल से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कई सारे सवालों के जवाब दिए। पढ़िए अमित शाह की ये खास बातचीत।

सवाल: नक्सलियों का एक बड़ा ईकोसिस्टम है। जो अर्बन नक्सल हैं, वे जंगलों से दूर रह कर इसे चलाते हैं। क्या सरकार उन पर भी शिकंजा कस रही है?
जवाब: देश को जितना नुकसान इन हथियारबंद नक्सलियों ने पहुंचाया है, उतना ही नुकसान इन अर्बन नक्सल ने पहुंचाया है। ये के ऑस, कन्फ्यूजन और कॉन्फिलिक्ट द्वारा अराजकता की स्थिति उत्पन्न करते हैं। इनके ऊपर सुरक्षा एजेंसियां तो कार्रवाई कर ही रही है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों से ऐसा माहौल भी पैदा कर रहे हैं, ताकि लोग इनके झांसों में न आएं और इनके टूलकिट का शिकार न बने। एक चिंता का विषय यह भी है कि यह तथाकथित अर्बन नक्सल हमारे शैक्षणिक संस्थानों में भी अंदर तक घुस गए हैं और हमारे युवाओं को गलत नरेटिव द्वारा पथभ्रष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारी खुफिया और सुरक्षा संस्थाओं की इन पर पैनी नजर है और में स्पष्ट कर दूं कि मोदी सरकार इनके खिलाफ सिर्फ लड़ाई नहीं लड़ रही, बल्कि लगातार जीत भी रही है।

सवालः अब केंद्र और छत्तीसगढ़ दोनों में आपकी सरकार है। क्या इससे नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई को और गति मिलेगी?
जवाब: पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि यह लड़ाई केंद्र या प्रदेश की नहीं बल्कि देश की है और मुझे खुशी है कि केंद्र को कमोबेश इस लड़ाई में सभी राज्य सरकारों का सहयोग मिला है। छतीसगढ़ में भाजपा सरकार होने से समन्वय निश्चित रूप से और बेहतर हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार वामपंथी उग्रवाद से लड़ने के लिए बेहतर केंद्र- राज्य समन्वय पर लगातार जोर देती रही है। हमने प्रभावित राज्यों को बिना भेदभाव के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बटालियन, हेलीकॉप्टर, प्रशिक्षण, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी, फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन का निर्माण आदि के लिए मदद मुहैया करवाई। मोदी सरकार ने सिक्युरिटी रिलेटेड एक्स्पेन्डिचर (एसआरई) योजना, स्पेशल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्कीम (एसआईएस) के तहत 10 वर्षों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों को 3006 करोड़ जारी किए गए। एसआरई के तहत धन के रिलीज में पिछले 10 वर्षों में 194% वृद्धि की गई। जल्द ही छत्तीसगढ़ सरकार नई आत्मसमर्पण नीति लाएगी, जिससे युवा हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे।

सवाल: हाल ही में जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस का गठबंधन हुआ, उस गठबंधन को लेकर आपने कांग्रेस पार्टी से 10 सवाल पूछे? आपको लगता है जम्मू-कश्मीर की जनता इन सवालों से जुड़ेगी?
जवाब: कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस पार्टी के साथ गठबंधन किया है, तो मैं कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहता हूं कि क्या वो नेशनल कांफ्रेंस द्वारा उनके घोषणा पत्र में किए गए वादों से सहमत है? क्या कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में फिर से ‘अलग झंडे’ के वादे का समर्थन करती है? क्या कांग्रेस पार्टी आर्टिकल 370 और 35ए को लाना चाहती है? क्या कांग्रेस पार्टी पाकिस्तान के साथ ‘एलओसी ट्रेड’ शुरू कर बॉर्डर पार से आतंकवाद और उसके ईकोसिस्टम का पोषण करने का समर्थन करती है? क्या कांग्रेस दलितों, गुज्जर, बकरवाल और पहाड़ियों के आरक्षण को समाप्त कर फिर से उनके साथ अन्याय करने के जेकेएनसी के वादे के साथ है?क्या कांग्रेस कश्मीर के युवाओं के बदले पाकिस्तान के साथ वार्ता का समर्थन करती है? कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देकर जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सवाल: आपकी छत्तीसगढ़ में सहकारिता के विस्तार को लेकर बैठकें हुईं। सहकारिता मंत्री बनने के बाद आपने एक के बाद एक बड़े कदम उठाए। आपको लगता है कि छत्तीसगढ़ और बाकी देश में भी सहकारिता उतना व्याप्त हो पाएगा, जितना गुजरात और महाराष्ट्र में है?
जवाब: मोदी जी ने अलग से सहकारिता मंत्रालय बनाकर सहकारी क्षेत्र की सभी संभावनाओं को नए पंख दिए हैं। आज सहकारिता मंत्रालय ने 54 से अधिक इनिशिएटिव्स लेकर सहकारिता को टेक्नोलॉजी एवं अन्य आय के अवसरों से जोड़ने का कार्य किया है। आज पीएसीएस को बहुआयामी बनाकर इसकी क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया गया है। देश का सहकारिता तंत्र आज किसानों की बीज से लेकर उर्वरक और उत्पादन के निर्यात से लेकर भंडारण तक का कार्य करता है। साथ ही, सहकारी बैंकों को आधुनिक बनाकर, सहकारी चीनी मिलों को एथेनोल ब्लेंडिंग से अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध करवाकर सहकारिता मंत्रालय सहकारी तंत्र को मजबूत बना रहा है। ये कार्य छत्तीसगढ़ में भी संभव है और यहां तो कृषि और वन उपज की बड़ी विस्तृत प्रणाली है। मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता बहुत व्याप्त होगा।

सवाल: आपकी सरकार आने के बाद से सैकड़ों माओवादी मारे जा चुके हैं। यह कैसे मुमकिन हुआ?
जवाब: मोदी सरकार नक्सलियों के खिलाफ रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और उनके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त कर रही है। हमारे सुरक्षा बलों ने नये-नये इनोवेटिव तरीकों से नक्सालियों को घेरा। पहली बार सुरक्षाबलों ने बूढ़ा पहाड़, चक्रबंधा और भीमबांध के कठिन क्षेत्रों से माओवादियों को सफलतापूर्वक निकालकर वहां स्थायी कैंप स्थापित किए हैं और 30-40 साल के बाद ये क्षेत्र नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की नई सुबह देख रहे हैं। साथ ही, हमने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन भी किया। एसटीएफ की विशेषज्ञता और नॉलेज शेयरिंग की सहायता से केंद्रीय तथा राज्यों के पुलिस बलों में स्पेशल ऑपरेशन टीम्स का गठन किया। इसके अलावा, हमने नवीनतम टेक्नोलॉजी का उपयोग भी किया। माओवादियों का गढ़ समझे जाने वाले क्षेत्रों में सिक्युरिटी वेक्यूम को समाप्त किया और 2019 से 277 नए कैम्पों की स्थापना द्वारा सुरक्षा ग्रिड का विस्तार किया। इसके अलावा, एनआईए में अलग वर्टीकल बनाकर 94 मामलों में जाँच तथा 64 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए। यानि, हमने हर उस माध्यम को तलाशा और उसका उपयोग किया, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को हिंसा से मुक्त किया जा सके।

सवाल : नक्सलवाद की जन्मस्थली नक्सलबाड़ी नक्सलमुक्त हो गया, पर देश में नक्सलवाद फैलता रहा। इसके पीछे आप क्या कारण मानते हैं?
जवाब: देखिए, किसी विचार की जन्मस्थली और अनुयायियों के बीच कोई इन्हेरेंट रिश्ता नहीं होता है। नक्सलबाड़ी में गरीबों पर जुल्म हुए, लोगों ने हथियार उठा लिए, लेकिन उन्हें यह समझ आने लगा कि हिंसा रास्ता नहीं है। वामपंथियों ने उसे एक अवसर के रूप में देखा और सरकार की नाकामी को माध्यम बनाकर अपने उल्लू सीधा किया।

 

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