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अमित शाह की सुरक्षा में चूक मामला: सख्त हुआ गृहमंत्रालय, हरियाणा सरकार ने जांच के लिए बनाई कमेटी

उमाकांत त्रिपाठी। 31 मार्च 2025 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. इस गंभीर मामले की जांच के लिए हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जज जस्टिस एचएस भल्ला करेंगे, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव विजेंद्र कुमार और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) संजय कुमार इसके सदस्य होंगे. कमेटी का मुख्य उद्देश्य इस चूक के कारणों का पता लगाना और जिम्मेदारी तय करना है. साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाना भी इसका लक्ष्य है.

सुरक्षा चूक का मामला: 31 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिसार के अग्रोहा में महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे. इस दौरान महाराजा अग्रसेन की मूर्ति का अनावरण होना था. हालांकि, इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान पुलिस अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी के कारण सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी सामने आई.

सूत्रों के अनुसार, शाह की सुरक्षा में तैनात एक डीएसपी और एक इंस्पेक्टर उस समय अपनी ड्यूटी स्थल पर मौजूद नहीं थे. दोनों अधिकारी कथित तौर पर कहीं चले गए थे, जिसके कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ. इस चूक ने ना केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर किया.

केंद्रीय गृह मंत्रालय का कड़ा रुख: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया. 15 अप्रैल को मंत्रालय ने हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर इस मामले की गहन जांच के निर्देश दिए. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी चूक अस्वीकार्य है और भविष्य में इस तरह की गलतियों को रोकने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जाए.मंत्रालय ने यह भी कहा कि- जांच के बाद दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाए. मंत्रालय के इस कड़े रुख के बाद हरियाणा सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जस्टिस भल्ला की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी.

 

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल: सूत्रों का कहना है कि- इस मामले को शुरू में स्थानीय पुलिस अधिकारियों द्वारा दबाने की कोशिश की गई थी. कुछ अधिकारियों ने इस चूक को मामूली बताकर इसे अनदेखा करने का प्रयास किया. हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय की लिखित आपत्ति के बाद मामला सुर्खियों में आया और सरकार को जांच कमेटी गठित करने के लिए मजबूर होना पड़ा. यह घटना न केवल पुलिस प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल की खामियों को भी सामने लाती है.

कमेटी की भूमिका और अपेक्षाएं: जस्टिस भल्ला की अगुवाई वाली कमेटी को इस मामले की गहराई से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कमेटी यह पता लगाएगी कि सुरक्षा चूक के पीछे क्या कारण थे और इसमें किन अधिकारियों की लापरवाही थी. इसके अलावा, कमेटी को यह भी सुझाव देना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है. कमेटी के अन्य सदस्य, विजेंद्र कुमार और संजय कुमार, अपने प्रशासनिक और कानूनी अनुभव के आधार पर इस जांच में महत्वपूर्ण योगदान देंगे. उम्मीद की जा रही है कि कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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