उमाकांत त्रिपाठी। भारत और वियतनाम के रिश्तों को नई मजबूती देने के लिए वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम तीन दिन की राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही है। खास बात यह है कि भारत और वियतनाम अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 10 साल पूरे कर रहे हैं और ऐसे समय में यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है।
राष्ट्रपति टो लैम मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एयरपोर्ट पर उनका अभिनंदन किया। उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों का बड़ा दल भी भारत आया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस यात्रा का मुख्य फोकस रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है।
दिल्ली पहुंचने से पहले टो लैम ने बिहार के गया शहर का भी दौरा किया। इसके बाद राजधानी में राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। अपने दौरे के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
भारत और वियतनाम के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी काफी पुराने हैं। उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष से लेकर आधुनिक दौर की रणनीतिक साझेदारी तक, दोनों देशों ने एक-दूसरे का साथ दिया है।
साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान इस रिश्ते को “व्यापक रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ा है। वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक अहम साझेदार माना जाता है।
व्यापार की बात करें तो 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। भारत वियतनाम को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर लगातार काम हो रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरे में रक्षा सहयोग को लेकर कुछ अहम समझौतों पर भी चर्चा हो सकती है।
इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति टो लैम से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-वियतनाम की सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर विचार साझा किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही टो लैम को राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भारत और वियतनाम की दोस्ती समय की कसौटी पर खरी उतरी है और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी।
अब सबकी नजर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति टो लैम की बैठक पर है। उम्मीद की जा रही है कि यह यात्रा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक नई रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव साबित हो सकती है।















